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स्वास्थ्य मंत्री इरफान रामनवमी में डीजे पर रोक लगाने में परेशान,गिरिडीह सदर अस्पताल में मोबाइल फ्लैश लाइट में इलाज

On: March 16, 2026 12:47 PM
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रांची: झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान रामनवमी में डीजे बजेगा या नहीं इसको लेकर हैं परेशान और इधर खबर आ रही है कि शनिवार देर रात बिजली गुल होने के कारण गिरिडीह सदर अस्पताल में अफरा-तफरी मच गयी, वहीं रविवार शाम भी बिजली व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गयी। जो झारखंड कि स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल फिर से एक बार उठाने के लिए मजबूर कर दिया है।

गिरिडीह सदर अस्पताल में पावर नहीं रहने के कारण गंभीर रूप से घायल मरीजों का इलाज मोबाइल की फ्लैश लाइट की रोशनी में करना पड़ा।

बताया जाता है कि मुफस्सिल थाना क्षेत्र के तिगोंजोरी निवासी नीलमुनि देवी, अजय हेंब्रम, अनुष्का हेंब्रम, विजय किस्कू और पवन किस्कू बाइक व ऑटो की टक्कर में घायल हो गये थे. सभी घायलों को इलाज के लिए सदर अस्पताल लाया गया, लेकिन यहां पहुंचते ही उन्हें बदहाल व्यवस्था का सामना करना पड़ा।
इमरजेंसी वार्ड तक में नहीं थी बिजली

बिजली गुल होने के कारण अस्पताल परिसर पूरी तरह अंधेरे में डूबा रहा. यहां तक कि ड्रेसिंग रूम में भी रोशनी की कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं थी. एक घायल का सिर फटा हुआ था. ऐसे में डॉक्टरों व स्वास्थ्यकर्मियों को मजबूरी में मोबाइल की फ्लैश लाइट जलाकर उसको टांका लगाना पड़ा. यह दृश्य देखकर परिजनों में आक्रोश और चिंता दोनों दिखी. घायल के परिजन काली सोरेन ने बताया कि इमरजेंसी वार्ड तक में बिजली नहीं थी, जिससे इलाज में काफी परेशानी हुई. जानकारी के अनुसार, शनिवार रात करीब 12 बजे अस्पताल के इलेक्ट्रिक विभाग के कर्मी मौके पर पहुंचे और जनरेटर स्टार्ट किया, तब जाकर स्थिति कुछ हद तक सामान्य हुई.

इधर मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सदर अस्पताल के डीएस डॉ प्रदीप बैठा क्या कहना है कि रात में बिजली गुल होने की कोई सूचना नहीं है. अस्पताल में बिजली व्यवस्था सामान्य है. पूरे मामले की जांच करायी जायेगी और यदि किसी स्तर पर लापरवाही पायी जाती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जायेगी.

Satish Sinha

मैं सतीश सिन्हा, बीते 38 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़ा हूँ। इस दौरान मैंने कई अखबारों और समाचार चैनलों में रिपोर्टर के रूप में कार्य करते हुए न केवल खबरों को पाठकों और दर्शकों तक पहुँचाने का कार्य किया, बल्कि समाज की समस्याओं, आम जनता की आवाज़ और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की वास्तविक तस्वीर को इमानदारी से उजागर करने का प्रयास भी निरंतर करता रहा हूँ। पिछले तकरीबन 6 वर्षों से मैं 'झारखंड वार्ता' से जुड़ा हूँ और क्षेत्रीय से जिले की हर छोटी-बड़ी घटनाओं की सटीक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग के माध्यम से पत्रकारिता को नई ऊँचाइयों तक ले जाने का प्रयास कर रहा हूँ।

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