
रांची। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से जुड़े बड़गाईं जमीन मामले में सोमवार को होने वाली सुनवाई तकनीकी कारणों से टल गई। रांची की विशेष पीएमएलए अदालत में हेमंत सोरेन की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेशी होनी थी, लेकिन तकनीकी समस्या के कारण यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। इसके बाद अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 24 सितंबर 2026 की तारीख निर्धारित की है। इस दिन आरोप तय करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।
बताया जा रहा है कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की व्यवस्था में तकनीकी दिक्कत आने के कारण सोमवार की कार्यवाही प्रभावित हुई। अदालत ने अगली सुनवाई के लिए हेमंत सोरेन को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश होने का निर्देश दिया है।
हाईकोर्ट से नहीं मिली कार्यवाही पर रोक
बड़गाईं जमीन मामले में हेमंत सोरेन ने विशेष पीएमएलए अदालत की कार्यवाही को चुनौती देते हुए झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उनकी ओर से विशेष अदालत द्वारा डिस्चार्ज याचिका खारिज किए जाने के आदेश को चुनौती दी गई थी। साथ ही निचली अदालत में चल रही कार्यवाही पर रोक लगाने की मांग की गई थी।
18 सितंबर 2026 को झारखंड हाईकोर्ट ने निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। इसके बाद विशेष पीएमएलए अदालत में मामले की आगे की प्रक्रिया का रास्ता साफ हो गया। हाईकोर्ट में सोरेन की ओर से मामले में पूर्व स्वीकृति यानी सैंक्शन से जुड़े कानूनी सवाल भी उठाए गए थे, लेकिन अदालत ने इस आधार पर कार्यवाही पर रोक लगाने का आदेश नहीं दिया।
8.86 एकड़ जमीन से जुड़ा है मामला
यह मामला रांची के बड़गाईं अंचल के शांति नगर और बरियातू रोड क्षेत्र में स्थित करीब 8.86 एकड़ जमीन से जुड़ा है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जमीन से जुड़े कथित रिकॉर्ड में हेरफेर और उससे संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जांच की है।
जांच के दौरान बड़गाईं अंचल कार्यालय में जमीन से संबंधित सरकारी रिकॉर्ड, दस्तावेज और रजिस्टर की जांच की गई थी। ED का आरोप है कि जमीन के रिकॉर्ड में कथित तौर पर हेरफेर कर उसके स्वामित्व और कब्जे की स्थिति बदलने की कोशिश की गई।
जांच एजेंसी के अनुसार, संबंधित जमीन के करीब 12 प्लॉट एक साझा परिसर और चारदीवारी से घिरे पाए गए थे। ED ने जमीन पर कथित कब्जे और नियंत्रण से जुड़े लोगों के बयान भी दर्ज किए हैं।
रिकॉर्ड में छेड़छाड़ का भी आरोप
ED की ओर से अदालत में रखे गए पक्ष के मुताबिक, जांच के दौरान जमीन से संबंधित सरकारी दस्तावेजों में कथित छेड़छाड़ और फर्जी दस्तावेज तैयार किए जाने के तथ्य सामने आए। जांच एजेंसी ने इन गतिविधियों को जमीन से जुड़े कथित अपराध और मनी लॉन्ड्रिंग से जोड़ते हुए अपनी कार्रवाई आगे बढ़ाई।
ED के मुताबिक, 29 जनवरी 2024 को हुई तलाशी के दौरान नकदी और अन्य सामान भी बरामद किए गए थे। हालांकि, मामले में लगाए गए आरोपों पर अंतिम न्यायिक फैसला अभी नहीं हुआ है और ये दावे अभियोजन पक्ष एवं जांच एजेंसी के पक्ष के रूप में ही देखे जा रहे हैं।
जून में खारिज हो चुकी है डिस्चार्ज याचिका
रांची की विशेष पीएमएलए अदालत ने 8 जून 2026 को हेमंत सोरेन की डिस्चार्ज याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद मामले की सुनवाई आगे बढ़ाने का रास्ता खुला। सोरेन की ओर से इस आदेश को झारखंड हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी।
हाईकोर्ट में याचिका पर सुनवाई के दौरान निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगाने की मांग की गई, लेकिन 18 सितंबर को हाईकोर्ट ने इस स्तर पर कार्यवाही रोकने से इनकार कर दिया। इसके बाद विशेष पीएमएलए अदालत में आरोप तय करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की तैयारी शुरू हुई।
अब 24 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
सोमवार को तकनीकी समस्या के कारण कार्यवाही टलने के बाद अब 24 सितंबर 2026 को दोपहर 3 बजे विशेष पीएमएलए अदालत में मामले की अगली सुनवाई होगी। इस दौरान हेमंत सोरेन की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेशी और आरोप तय करने की प्रक्रिया पर आगे की कार्रवाई होने की संभावना है।
फिलहाल मामले में अदालत का अंतिम फैसला नहीं आया है। जमीन और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े आरोपों पर न्यायिक प्रक्रिया जारी है और ED की ओर से लगाए गए आरोपों का अंतिम निर्धारण अदालत के फैसले के बाद ही होगा।





