
जमशेदपुर:झारखंड आरटीआई एक्टिविस्ट कृतिवास मंडल द्वारा केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार को लिखित शिकायत दर्ज कराई गई थी शिकायत में आरोप लगाया गया था कि पूर्वी सिंहभूम जिले के विभिन्न प्रखंडों में मनरेगा अंतर्गत क्रियान्वित योजनाओं का कार्य मनरेगा के संविदा कनीय अभियंता से न कराकर 15वें वित्त आयोग का कार्य भी उनसे कराया जा रहा है, जो ग्रामीण विकास विभाग, झारखण्ड सरकार के पत्रांक (N) 1676, रांची, दिनांक 14.12.2023 का घोर उल्लंघन है।
उक्त शिकायत के आलोक में नगेन्द्र पासवान उप विकास आयुक्त-सह-अतिरिक्त जिला कार्यक्रम समन्वयक, पूर्वी सिंहभूम द्वारा ज्ञापांक 1209/जि०ग्रा०, दिनांक 05.08.2026 जारी कर जिले के सभी प्रखंड विकास पदाधिकारियों – जमशेदपुर, पटमदा, बोड़ाम, पोटका, धालभूमगढ़, चाकुलिया, बहरागोड़ा, गुड़ाबांधा, मुसाबनी, डुमुरिया, घाटशिला को कड़ी हिदायत दी गई है कि प्रखंड स्तर पर मनरेगा का कार्य केवल मनरेगा के कनीय अभियंता (संविदा) से ही कराया जाए तथा विभागीय निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।
उपरोक्त संबंध में नगेन्द्र पासवान उप विकास आयुक्त पूर्वी सिंहभूम के द्वारा विवेकानंद अंडर सेक्रेटरी मनरेगा भारत सरकार नई दिल्ली को भी प्रतिवेदन समर्पित किया गया है ।
आरटीआई एक्टिविस्ट कृतिवास मंडल ने कहा कि मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण योजना में संविदा कर्मियों पर अतिरिक्त बोझ डालने से न सिर्फ कार्य की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है बल्कि मजदूरों को समय पर भुगतान में भी देरी हो रही है। विभागीय आदेश के बाद भी नियमों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
उन्होंने केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय से मांग की है कि जिन प्रखंड विकास पदाधिकारियों द्वारा अब तक आदेश का उल्लंघन किया गया है, उन पर विधि-सम्मत कार्रवाई की जाए और भविष्य में मनरेगा का कार्य केवल निर्धारित संविदा कनीय अभियंता से ही कराया जाना सुनिश्चित किया जाए।




