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जमशेदपुर: जब फाइलों के ढेर में इंसाफ दम तोड़ने लगे और 23-23 लिखित अर्जियां सिर्फ रद्दी का टुकड़ा बनकर रह जाएं, तो एक आम नागरिक की बेबसी किस हद तक जा सकती है? इसका खौफनाक और रोंगटे खड़े कर देने वाला मंजर बुधवार को जमशेदपुर डीसी कार्यालय के ठीक बाहर देखने को मिला।
राजेंद्र नगर न्यू कॉलोनी के रहने वाले अनुपम सिन्हा हाथों में केरोसिन की बोतल लिए पहुंचे और देखते ही देखते खुद पर उड़ेल लिया। इससे पहले कि माचिस की एक तीली जलती और कोई अनहोनी घटती, वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों और राहगीरों की नजर उन पर पड़ गई। मुस्तैद जवानों ने झपट्टा मारकर उन्हें दबोच लिया और एक जिंदा इंसान को राख के ढेर में तब्दील होने से बचा लिया।
क्या है इस ‘हाई-वोल्टेज ड्रामे’ के पीछे का सच?
घटना के बाद डीसी ऑफिस परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। लोगों के जेहन में एक ही सवाल था—आखिर ऐसा क्या हुआ जिसने इस शख्स को जिंदगी खत्म करने की दहलीज पर ला खड़ा किया?
अनुपम सिन्हा के मुताबिक, यह महज कोई आवेश में उठाया गया कदम नहीं, बल्कि महीनों से सिस्टम की चौखट पर ठोकरें खाने का दर्दनाक नतीजा था। उनका आरोप है कि वह पिछले सात से आठ महीनों से जमशेदपुर को-ऑपरेटिव हाउस बिल्डिंग सोसाइटी में चल रहे बड़े खेल का पर्दाफाश करने की कोशिश कर रहे हैं।
10 से 12 लाख के कथित ‘गबन’ का जाल
अनुपम का सीधा दावा है कि सोसाइटी के भीतर करीब 10 से 12 लाख रुपये की वित्तीय हेराफेरी और घपला हुआ है। उन्होंने इस कथित घोटाले को लेकर डीसी से लेकर एसडीओ तक, तमाम आला अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काटे। एक-दो बार नहीं, बल्कि पूरे 23 बार लिखित शिकायतें सौंपी गईं। लेकिन हर बार जवाब में सिर्फ ‘तारीख’ और ‘आश्वासन’ ही मिला, ठोस कार्रवाई का सिरा कहीं नहीं दिखा।
लगातार अनदेखी से तंग आकर उन्होंने सिस्टम का ध्यान अपनी ओर खींचने के लिए यह आत्मघाती कदम चुना। मौके पर मौजूद पुलिस ने उन्हें शांत कराया, वहीं पीड़ित अब भी अपनी मांग पर अड़े हैं कि मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, ताकि सोसाइटी में हुए पाई-पाई के घपले का सच सामने आ सके।




