
हजारीबाग। हजारीबाग में खासमहल जमीन को लेकर शुरू हुआ विवाद अब झारखंड की राजनीति के केंद्र में आ गया है। पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता योगेंद्र साव ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ बेहद तीखी टिप्पणी करते हुए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। साव ने मुख्यमंत्री को भ्रष्ट बताते हुए राज्य के जल-जंगल-जमीन को कॉरपोरेट के हाथों सौंपने का आरोप लगाया। उनके इस बयान के बाद सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर भी राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
50 डिसमिल खासमहल जमीन पर कार्रवाई से शुरू हुआ विवाद
पूरा मामला हजारीबाग के हुरहुरू स्थित कैंटोनमेंट मौजा की करीब 50 डिसमिल खासमहल जमीन से जुड़ा है। 18 सितंबर को सदर अंचलाधिकारी सह खासमहल पदाधिकारी आशुतोष कुमार पुलिस बल और जेसीबी के साथ मौके पर पहुंचे थे। प्रशासन के अनुसार जमीन सरकारी खासमहल भूमि है और वहां अतिक्रमण की शिकायत के बाद कार्रवाई की गई।
प्रशासन का कहना है कि जमीन पर दोबारा निर्माण किए जाने की शिकायत मिली थी। इससे पहले भी इस जमीन को अतिक्रमणमुक्त कराया जा चुका था। कार्रवाई के दौरान वहां बनी गौशाला और पीसीसी सड़क को हटाया गया।
जेसीबी के सामने बैठ गए योगेंद्र साव
प्रशासनिक कार्रवाई का विरोध करने योगेंद्र साव भी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों के साथ उनकी तीखी बहस हुई और रिपोर्टों के अनुसार एक समय वह जेसीबी के सामने बैठ गए तथा कार्रवाई रोकने की मांग की।
दूसरी ओर, साव का दावा है कि जमीन को लेकर उनके पास दस्तावेज और पावर ऑफ अटॉर्नी है। उन्होंने यह भी कहा कि खासमहल जमीन के नवीनीकरण के लिए उपायुक्त को आवेदन दिया गया है और इस मामले में उन्होंने राज्य के भू-राजस्व मंत्री से भी मुलाकात की है। प्रशासन इन दावों से अलग जमीन को सरकारी खासमहल भूमि बता रहा है।
हेमंत सोरेन पर लगाए गंभीर आरोप
इसी विवाद के दौरान सामने आए वीडियो में योगेंद्र साव मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर तीखे आरोप लगाते दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री को भ्रष्ट बताते हुए सरकार पर राज्य के जल-जंगल-जमीन को कॉरपोरेट के हाथों सौंपने का आरोप लगाया।
साव ने अधिकारियों एल. खियांग्ते और विनय चौबे का भी जिक्र किया। हालांकि, उनके द्वारा लगाए गए आरोप राजनीतिक आरोप हैं और उपलब्ध रिपोर्टों में इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
अंबा प्रसाद ने पिता के बयान से जताई असहमति
योगेंद्र साव की बेटी और बड़कागांव की पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने मुख्यमंत्री पर की गई व्यक्तिगत टिप्पणी से सार्वजनिक रूप से असहमति जताई है। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक कार्रवाई का विरोध अपनी जगह है, लेकिन संवैधानिक शिष्टाचार का उल्लंघन करते हुए मुख्यमंत्री पर व्यक्तिगत टिप्पणी करना उनके पिता से अपेक्षित नहीं था।
अंबा प्रसाद के इस रुख से यह स्पष्ट हुआ कि जमीन विवाद और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर पिता-पुत्री की राजनीतिक प्रतिक्रिया एक जैसी नहीं है।
JMM ने जताई नाराजगी, कांग्रेस भी बयान से हुई अलग
योगेंद्र साव के बयान के बाद सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा ने भी नाराजगी जताई। पार्टी महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कांग्रेस नेतृत्व से मामले में संज्ञान लेने और साव के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री के खिलाफ इस तरह की बयानबाजी स्वीकार्य नहीं है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने भी साव की टिप्पणी को अनुचित बताया है। इससे संकेत मिलता है कि पार्टी के भीतर भी उनके बयान को लेकर असहमति सामने आई है।
पहले भी कांग्रेस से हो चुका है टकराव
योगेंद्र साव और कांग्रेस नेतृत्व के बीच टकराव पहले भी सामने आ चुका है। मार्च 2026 में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और गठबंधन सरकार के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों को लेकर उन्हें तीन साल के लिए पार्टी से निष्कासित किया गया था। हालांकि जून 2026 में झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने उनका निष्कासन रद्द कर दिया और उनकी पार्टी में वापसी हुई।
अब एक बार फिर मुख्यमंत्री के खिलाफ उनके बयान ने कांग्रेस और JMM के बीच गठबंधन संबंधों को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज कर दी है।
भाजपा को भी मिला सरकार पर हमला करने का मौका
मामले को लेकर भाजपा ने भी कांग्रेस और गठबंधन सरकार पर निशाना साधा है। झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने योगेंद्र साव के बयान को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार और कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल उठाए हैं।
फिलहाल हुरहुरू की 50 डिसमिल जमीन को लेकर प्रशासन और योगेंद्र साव के दावों में अंतर बना हुआ है। वहीं जमीन विवाद से निकला यह मामला अब प्रशासनिक कार्रवाई से आगे बढ़कर झारखंड की सियासत में कांग्रेस-JMM गठबंधन के लिए भी चर्चा का विषय बन गया है।





