
रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2025 में कथित गड़बड़ी से जुड़ी याचिका पर आज सुनवाई हुई। अदालत ने मामले में केंद्र सरकार, झारखंड सरकार और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका में परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच CBI या किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी से कराने की मांग की गई है।
परीक्षा रद्द कराने के बजाय स्वतंत्र जांच की मांग
इस मामले में खास बात यह है कि याचिका में JPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2025 को सीधे रद्द करने की मांग नहीं की गई है। याचिकाकर्ता का जोर पूरी परीक्षा प्रक्रिया में सामने आए कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने पर है।
याचिका में मांग की गई है कि यदि परीक्षा प्रक्रिया में किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो उसकी जांच ऐसी एजेंसी से कराई जाए, जिस पर निष्पक्षता को लेकर कोई सवाल न उठे। इसी वजह से CBI अथवा किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी से जांच कराने का आग्रह किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट के नोटिस का क्या मतलब?
सुप्रीम कोर्ट की ओर से नोटिस जारी किए जाने के बाद अब केंद्र और राज्य सरकार समेत अन्य संबंधित पक्षों को अपना पक्ष अदालत के सामने रखना होगा। हालांकि, नोटिस जारी होने का यह अर्थ बिल्कुल नहीं है कि सुप्रीम कोर्ट ने JPSC की 2025 प्रारंभिक परीक्षा को रद्द करने का आदेश दे दिया है। अदालत फिलहाल याचिका में लगाए गए आरोपों और स्वतंत्र जांच की मांग पर संबंधित पक्षों से जवाब मांग रही है। आगे की सुनवाई में सरकार और अन्य पक्षों के जवाब के आधार पर मामले की दिशा तय हो सकती है।
झारखंड में JPSC और JSSC की कई भर्ती परीक्षाओं को लेकर पहले से विवाद की स्थिति बनी हुई है। परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और अभ्यर्थियों के आंदोलन के बीच राज्य सरकार ने कई भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया था। इस फैसले में JPSC की 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षाएं भी शामिल थीं। परीक्षा और उससे हुई नियुक्तियों को लेकर सरकार के फैसले के बाद बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के सामने भविष्य को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई थी।
हाईकोर्ट के आदेश से नियुक्त अभ्यर्थियों को राहत
इसी विवाद के बीच पिछले सप्ताह झारखंड हाईकोर्ट से भी महत्वपूर्ण फैसला सामने आया था। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के 11वीं और 13वीं JPSC परीक्षा तथा इन परीक्षाओं के आधार पर हुई नियुक्तियों को रद्द करने के फैसले पर रोक लगा दी थी। इस आदेश से उन अभ्यर्थियों को अंतरिम राहत मिली, जिनकी नियुक्तियां सरकार के फैसले के कारण प्रभावित होने की आशंका थी। हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब इन नियुक्तियों को लेकर तत्काल स्थिति कुछ हद तक स्पष्ट हुई है।
हाईकोर्ट के इस घटनाक्रम के तुरंत बाद JPSC की वर्ष 2025 की प्रारंभिक परीक्षा से जुड़ी स्वतंत्र जांच की मांग सुप्रीम कोर्ट के सामने पहुंची है। इससे झारखंड की भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई और महत्वपूर्ण हो गई है। एक तरफ 11वीं और 13वीं JPSC परीक्षा तथा उनसे हुई नियुक्तियों को लेकर हाईकोर्ट का आदेश सामने आया है, तो दूसरी तरफ 2025 की सिविल सर्विस प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है।
अब इस मामले में केंद्र सरकार, झारखंड सरकार और अन्य संबंधित पक्षों के जवाब पर सभी की नजर रहेगी। सुप्रीम कोर्ट यह देखेगा कि परीक्षा में लगाए गए अनियमितता के आरोपों की स्वतंत्र जांच कराने के लिए पर्याप्त आधार मौजूद हैं या नहीं।






