
रांची: 14वीं जेपीएससी सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं से जुड़ी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 24 अगस्त 2026 को सुनवाई करेगा। यह सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की तीन सदस्यीय पीठ करेगी।
याचिकाकर्ता हरिशरण देवगन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर 19 अप्रैल 2026 को हुई इस परीक्षा को रद्द कर नए सिरे से परीक्षा आयोजित कराने की मांग की है। जिसमें परीक्षा के संचालन और मूल्यांकन में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया गया है। साथ ही, JPSC सिविल सेवा प्रीलिम्स में कथित अनियमितताओं की जांच राज्य पुलिस की CID के बजाय केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से कराने की मांग की है।
हालांकि यह याचिका राज्य सरकार की ओर से परीक्षा और नियुक्तियों को रद्द करने के फैसले से पहले दाखिल की गई थी। अब परिस्थितियों में बदलाव के बाद सुप्रीम कोर्ट के सामने यह महत्वपूर्ण सवाल होगा कि मौजूदा स्थिति में याचिका पर आगे सुनवाई की आवश्यकता है या नहीं।
दरअसल, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली झारखंड सरकार ने 18 अगस्त को अधिसूचना जारी कर JPSC और TDPL के माध्यम से आयोजित 22 भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया था। इसके साथ ही 23 अन्य परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच कराने का आदेश भी दिया गया था।
इस बीच JPSC की भर्ती परीक्षाओं को लेकर झारखंड हाईकोर्ट में भी मामला पहुंच चुका है। 20 अगस्त को हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के उस फैसले पर रोक लगा दी, जिसके तहत JPSC की भर्ती परीक्षाओं के जरिए की गई नियुक्तियों को रद्द करने का आदेश जारी किया गया था।
कोर्ट ने JPSC की 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा और फूड सेफ्टी ऑफिसर परीक्षा से संबंधित नियुक्तियों को रद्द करने के सरकार के आदेश पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। अदालत ने इस मामले में झारखंड सरकार और JPSC से जवाब भी मांगा है।




