रिम्स में आयुष्मान कार्ड वाले मरीजों का होगा मुफ्त इलाज, मिलेगा हर सुविधा का लाभ

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झारखंड वार्ता न्यूज
रांची: रिम्स में नामांकित आयुष्मान कार्ड वाले मरीजों को किसी भी तरह से दवा और अन्य मेडिकल सामान अपने पैसे से नहीं खरीदना पड़ेगा। रिम्स प्रबंधन ने इस संबंध में सभी विभागाध्यक्षों को पत्र जारी कर कहा है कि इस आदेश का सख्ती से पालन किया जाये और पात्र मरीजों को योजना का लाभ दिया जाये। उनकी जिम्मेदारी है कि वे आयुष्मान योजना के तहत भर्ती होने वाले मरीजों के इलाज की पूरी व्यवस्था करें और ऐसे मरीजों के भर्ती होते ही संबंधित अधिकारी को पूरी जानकारी दें।
मरीज को प्रवेश के समय स्व-घोषणा पत्र जमा करना होगा
जिन मरीजों के पास आयुष्मान कार्ड नहीं है, उन्हें अस्पताल में भर्ती करते समय डॉक्टरों को उनसे स्व-घोषणा पत्र लेना अनिवार्य होगा। मरीज यह लिखेगा कि उसके पास आयुष्मान कार्ड क्यों नहीं है और कारण क्या है। इसके पीछे संस्था का उद्देश्य यह है कि ऐसे मरीजों के कार्ड बनाने का काम शुरू हो जाएगा और जब पता चल जाएगा कि किसके कार्ड बन सकते हैं तो उन्हें उसी योजना के तहत इलाज मुहैया कराया जाएगा। कार्ड बनते ही मरीजों को दे दिया जाएगा। इससे एक तो कार्ड बनाने में सुविधा होगी और दूसरा मरीजों को इलाज में भी फायदा होगा।
आयुष्मान मरीजों को समय पर नहीं मिलती दवा
यहां डॉक्टरों ने कहा कि यह योजना बहुत अच्छी है और इसका लाभ मरीजों को भी मिलना चाहिए। लेकिन सिस्टम पर सवाल उठाते हुए डॉक्टरों ने कहा कि कई मरीजों को समय पर दवा नहीं मिलती है, कई इंप्लांट भी ऐसे होते हैं जिन्हें मिलने में एक महीने तक का समय लग जाता है। ऐसी स्थिति में मरीजों का इलाज कैसे करें?
इस संबंध में रिम्स अधीक्षक डाॅ. हिरेंद्र बिरुआ कहते हैं कि इस योजना के तहत मरीजों को जरूरत पड़ने पर एक ही दिन में दवा और इंप्लांट उपलब्ध कराया जा रहा है। वर्तमान में स्थिति बहुत अच्छी है और ऑर्थो, सीटीवीएस, कार्डियोलॉजी सहित अन्य विभाग तत्काल आधार पर मांग को पूरा कर रहे हैं।
हालांकि अधिकांश विभागों को कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन अन्य विभागों को भी सहयोग करना चाहिए और अगर एचओडी खुद मरीजों की जरूरतों पर थोड़ा ध्यान दें तो मरीजों को सामान भी मिल जाता है और इलाज भी तुरंत हो जाता है। इसके लिए सभी को आगे आना होगा, संस्था पूरी मदद कर रही है।
हर माह होगी कार्य की समीक्षा
आयुष्मान योजना से मरीजों को कितना लाभ मिल रहा है या नहीं, इसकी हर माह समीक्षा की जायेगी। निदेशक खुद सभी अलग-अलग विभागों की समीक्षा करेंगे और यहां भर्ती मरीजों की स्थिति पर भी नजर रखेंगे।