नई दिल्ली: ईरान युद्ध के बाद उत्पन्न एलपीजी संकट से देश अभी पूरी तरह उबर भी नहीं पाया था कि अब ईंधन की कीमतों में वृद्धि ने आम जनता की चिंता बढ़ा दी है। देश की प्रमुख निजी ईंधन रिटेलर कंपनी नायरा एनर्जी (Nayara Energy) ने पेट्रोल और डीजल के दामों में अचानक बढ़ोतरी कर उपभोक्ताओं की जेब पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया है।
कंपनी ने पेट्रोल की कीमत में ₹5 प्रति लीटर और डीजल की कीमत में ₹3 प्रति लीटर की वृद्धि की है। यह नई दरें देशभर में स्थित कंपनी के लगभग 6,967 पेट्रोल पंपों पर लागू कर दी गई हैं। हालांकि, विभिन्न राज्यों में स्थानीय करों जैसे वैट (VAT) के कारण वास्तविक बढ़ोतरी अलग-अलग हो सकती है। कुछ क्षेत्रों में पेट्रोल की कीमत में यह इजाफा ₹5.30 प्रति लीटर तक दर्ज किया गया है।
वहीं दूसरी ओर, सरकारी स्वामित्व वाली तेल विपणन कंपनियां Indian Oil Corporation, Bharat Petroleum और Hindustan Petroleum फिलहाल अपने ईंधन की कीमतों को स्थिर बनाए हुए हैं। देश के ईंधन बाजार में इन सरकारी कंपनियों की हिस्सेदारी लगभग 90 प्रतिशत है, जिसके चलते आम उपभोक्ताओं पर इनकी मूल्य नीति का व्यापक प्रभाव पड़ता है।
निजी कंपनियों के सामने लागत और मुनाफे का संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो गया है। भारत में निजी ईंधन रिटेलर्स को कीमतें नियंत्रित रखने पर किसी प्रकार की सरकारी सहायता या भरपाई नहीं मिलती, जबकि सरकारी कंपनियों को ‘गुड कॉर्पोरेट सिटिजन’ के रूप में अप्रत्यक्ष समर्थन प्राप्त होता है।
लगातार बढ़ते घाटे के दबाव में निजी कंपनियों के पास कीमतों में वृद्धि के अलावा सीमित विकल्प ही बचते हैं। इसी परिस्थिति को देखते हुए नायरा एनर्जी ने यह निर्णय लिया है। हालांकि, इस कदम से महंगाई पर असर पड़ने की आशंका भी जताई जा रही है, जिससे आम उपभोक्ताओं की परेशानी और बढ़ सकती है।












