रांची: झारखंड से राज्यसभा की दो सीटें खाली होने जा रही हैं, जिसे लेकर सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर ही राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। इन सीटों पर दावा ठोकने को लेकर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) और कांग्रेस के बीच बयानबाजी शुरू हो गई है।
राज्य की एक राज्यसभा सीट झामुमो के संस्थापक और ‘दिशोम गुरु’ शिबू सोरेन के निधन के बाद से ही रिक्त है। वहीं दूसरी सीट पर सांसद दीपक प्रकाश का कार्यकाल जून 2026 में समाप्त होने वाला है। ऐसे में दोनों सीटों को लेकर गठबंधन दलों के बीच दावेदारी तेज हो गई है।
झामुमो नेताओं का कहना है कि राज्य में पार्टी की राजनीतिक स्थिति पहले से ज्यादा मजबूत हुई है। विधानसभा में भी पार्टी की स्थिति बेहतर है, इसलिए स्वाभाविक रूप से राज्यसभा की दोनों सीटों पर उसका दावा बनता है। पार्टी के कई कार्यकर्ताओं और नेताओं का भी मानना है कि इन दोनों सीटों पर झामुमो के उम्मीदवारों को ही मौका मिलना चाहिए।
पार्टी के केंद्रीय प्रवक्ता मनोज पांडे ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में गठबंधन के भीतर बेहतर तालमेल कायम है। उन्होंने भरोसा जताया कि सभी सहयोगी दलों को विश्वास में लेकर ही अंतिम फैसला लिया जाएगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि गठबंधन धर्म को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस को इस मुद्दे पर उदारता दिखानी चाहिए।
हालांकि झामुमो के इस रुख पर कांग्रेस ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। इंडिया गठबंधन में झामुमो के बाद दूसरे सबसे बड़े दल के रूप में कांग्रेस ने भी राज्यसभा सीटों पर अपना दावा मजबूत बताया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि पिछले कई राज्यसभा चुनावों में पार्टी ने गठबंधन के हित में कई बार त्याग किया और सीटें छोड़ी हैं।
एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा कि हमने हमेशा गठबंधन को प्राथमिकता दी है और कई मौकों पर बड़ा दिल दिखाया है। लेकिन इस बार स्थिति अलग है। राज्य की दो सीटों में से कम से कम एक सीट पर कांग्रेस का दावा स्वाभाविक है और इस बार झामुमो को भी सहयोगी दल के प्रति वही उदारता दिखानी चाहिए।
राज्यसभा चुनाव को लेकर सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर बातचीत का दौर अभी जारी रहेगा। अंतिम फैसला दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व की सहमति से ही लिया जाएगा। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर गठबंधन के भीतर और भी चर्चाएं तेज होने की संभावना है।









