जमशेदपुरः राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के सोनारी एयरपोर्ट पर पहुंचने पर राज्यपाल संतोष गंगवार ने उनका स्वागत किया। जहां से सड़क मार्ग होते हुए राष्ट्रपति कदमा मरीन ड्राइव के पास जगन्नाथ आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक धर्मार्थ केन्द्र ट्रस्ट पहुंची। जहां श्री जगन्नाथ मंदिर के भूमि पूजन कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

राष्ट्रपति ने श्री जगन्नाथ मंदिर का शिलान्यास किया. पुरोहितों के द्वारा वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ मंदिर का भूमि पूजन कार्यक्रम संपन्न हुआ. इस मौके पर मंदिर प्रबंधन समिति के साथ साथ अन्य कई गणमान्य लोग इसमें शामिल हुए. इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त रही।

कार्यक्रम में उनके साथ केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, राज्यपाल संतोष गंगवार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी मौजूद रहे। भूमि पूजन के बाद एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि जमशेदपुर में प्रभु जगन्नाथ के मंदिर की स्थापना का यह सबसे उपयुक्त समय है.
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने भावुक होते हुए कहा कि भगवान जगन्नाथ जल्दी नहीं आते, उनके आने का लंबा इंतजार करना पड़ता है. उन्होंने कहा कि जब रथ यात्रा होती है, तो प्रभु झूला झूलते और मधुर गीतों के जरिए भक्तों को रिझाते हुए आते हैं. राष्ट्रपति ने धार्मिक परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि रांची में निड़ाचढ मंदिर बनने के बाद वह ‘निड़ाचढ बिहारी’ कहलाए और झारखंड से उनका गहरा नाता जुड़ा. अब जमशेदपुर में भव्य मंदिर का निर्माण शुरू होने के साथ ही प्रभु ‘जमशेदपुर बिहारी’ हो गए हैं. उन्होंने विश्वास जताया कि अब भगवान जगन्नाथ की विशेष कृपा जमशेदपुर और यहां के निवासियों पर बरसेगी.
द्रौपदी मुर्मू ने भगवान जगन्नाथ की महिमा बताते हुए कहा कि वे सर्व सुलभ हैं और पूरे विश्व के भगवान हैं. उनकी सहज लोकप्रियता और भक्तों के प्रति उनका प्रेम पूरी दुनिया में विख्यात है. इससे पूर्व, राष्ट्रपति अपने एकदिवसीय दौरे पर विशेष विमान से रांची पहुंचीं, जहां एयरपोर्ट पर राज्यपाल संतोष गंगवार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उनका भव्य स्वागत किया. मुख्यमंत्री ने उन्हें प्रतीक चिह्न भेंट कर भगवान बिरसा मुंडा की पावन धरती पर ‘जोहार’ किया, वहीं विधायक कल्पना सोरेन ने शॉल ओढ़ाकर उन्हें सम्मानित किया.
बता दें कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू इस कार्यक्रम के अलावा बारीडीह स्थित मणिपाल टाटा मेडिकल कॉलेज के कार्यक्रम में शामिल होने वाली हैं. जहां एक भवन का शिलान्यास कर छात्रों से संवाद करेंगी.
जगन्नाथ स्पिरिचुअल एंड कल्चरल चैरिटेबल सेंटर ट्रस्ट के अध्यक्ष एसके बेहरा ने बताया कि लगभग 100 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह मंदिर ढाई एकड़ भूमि पर विकसित होगा. मुख्य मंदिर परिसर डेढ़ एकड़ में और आध्यात्मिक-सांस्कृतिक केंद्र एक एकड़ में बनेगा. मंदिर की संरचना पुरी के प्रसिद्ध श्री जगन्नाथ मंदिर की तर्ज पर होगी.
निर्माण कार्य चार वर्षों में पूरा होगा, जबकि आध्यात्मिक केंद्र दो वर्षों में तैयार हो जाएगा. केंद्र का मुख्य उद्देश्य युवाओं का सर्वांगीण विकास करना है. गीता, भागवत जैसे ग्रंथों के माध्यम से नैतिकता, अनुशासन और आत्मबल की शिक्षा दी जाएगी. 200-250 किमी दायरे के शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों को यहां आमंत्रित किया जाएगा ताकि वे जिम्मेदार नागरिक बनें और जीवन की चुनौतियों का साहस से सामना कर सकें.
राष्ट्रपति के दौरे के लोकर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं. रूट पर ट्रैफिक डायवर्जन, वैकल्पिक मार्ग, बैरिकेडिंग और नो-एंट्री व्यवस्था सुनिश्चित की गई है ताकि आमजन को न्यूनतम परेशानी हो.








