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रांची: लापता बच्चों को लेकर जनाक्रोश चरम पर, धुर्वा बंद का दिखा व्यापक असर; आक्रोशितों ने टायर जलाकर किया सड़क जाम

On: January 11, 2026 4:52 PM
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रांची: राजधानी रांची के धुर्वा थाना क्षेत्र से रहस्यमय तरीके से लापता हुए मासूम भाई-बहन अंश (5 वर्ष) और अंशिका (4 वर्ष) की तलाश अब केवल पुलिस जांच नहीं रह गई है, बल्कि यह पूरे इलाके की सामूहिक चिंता और जनआंदोलन का रूप ले चुकी है। दोनों बच्चों के लापता हुए नौ दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक उनका कोई ठोस सुराग नहीं मिल पाया है।


मामले की गंभीरता को देखते हुए झारखंड पुलिस ने जांच तेज कर दी है। बच्चों की खोज के लिए 40 सदस्यीय विशेष पुलिस टीम लगातार छापेमारी और तलाशी अभियान चला रही है। पुलिस आसपास के इलाकों में संदिग्धों से पूछताछ कर रही है, वहीं दर्जनों सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले जा रहे हैं।


इधर, रविवार को दोनों बच्चों के नहीं मिलने से आक्रोशित स्थानीय लोगों ने धुर्वा बंद का आह्वान किया। बंद का व्यापक असर देखने को मिला। मौसीबाड़ी के पास ग्रामीणों और परिजनों ने टायर जलाकर सड़क जाम कर दी, जिससे इलाके में यातायात पूरी तरह ठप हो गया। सड़क जाम के कारण आम लोगों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।


प्रदर्शनकारियों का साफ कहना है कि जब तक अंश और अंशिका का कोई ठोस सुराग नहीं मिलता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। ग्रामीणों और परिजनों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि अब तक की जांच संतोषजनक नहीं रही है।


स्थिति बिगड़ने की आशंका को देखते हुए पूरे क्षेत्र में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। प्रशासन हालात पर कड़ी नजर बनाए हुए है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके। इसी दौरान मौसीबाड़ी के पास बंद समर्थक एक व्यक्ति को पुलिस ने हिरासत में लिया, जिसके बाद प्रदर्शनकारियों में और अधिक आक्रोश देखने को मिला।


इस बीच रांची पुलिस ने बच्चों को खोजने के लिए इनाम की घोषणा भी की है। पुलिस के अनुसार, अंश और अंशिका के बारे में सही जानकारी देने वाले व्यक्ति को 51 हजार रुपये का नकद पुरस्कार दिया जाएगा। बच्चों की तस्वीरों और इनाम की जानकारी वाले पोस्टर रांची के विभिन्न इलाकों में चस्पा किए गए हैं, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक सूचना पहुंच सके।


गौरतलब है कि दोनों मासूम बच्चे 2 जनवरी को रहस्यमय तरीके से लापता हो गए थे। परिजनों ने उसी दिन पुलिस को सूचना दी थी, जिसके बाद से रांची पुलिस का पूरा महकमा बच्चों की तलाश में जुटा हुआ है। बावजूद इसके, नौ दिन गुजर जाने के बाद भी कोई ठोस सफलता हाथ नहीं लगी है।


फिलहाल धुर्वा इलाके में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है। लोग उम्मीद लगाए बैठे हैं कि जल्द ही दोनों मासूम सुरक्षित मिलेंगे। वहीं प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती है, जनाक्रोश को नियंत्रित करते हुए बच्चों को सकुशल वापस लाना।


अंश और अंशिका की तलाश अब सिर्फ एक केस नहीं, बल्कि पूरे धुर्वा इलाके के लिए भावनात्मक और सामाजिक संघर्ष का प्रतीक बन चुकी है।

Vishwajeet

मेरा नाम विश्वजीत कुमार है। मैं वर्तमान में झारखंड वार्ता (समाचार संस्था) में कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हूं। समाचार लेखन, फीचर स्टोरी और डिजिटल कंटेंट तैयार करने में मेरी विशेष रुचि है। सटीक, सरल और प्रभावी भाषा में जानकारी प्रस्तुत करना मेरी ताकत है। समाज, राजनीति, खेल और समसामयिक मुद्दों पर लेखन मेरा पसंदीदा क्षेत्र है। मैं हमेशा तथ्यों पर आधारित और पाठकों के लिए उपयोगी सामग्री प्रस्तुत करने का प्रयास करता हूं। नए विषयों को सीखना और उन्हें रचनात्मक अंदाज में पेश करना मेरी कार्यशैली है। पत्रकारिता के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की कोशिश करता हूं।

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