
जमशेदपुर:झारखंड के RTI एक्टिविस्ट कृतिवास मंडल ने माननीय अध्यक्ष महोदय, बार काउंसिल ऑफ इंडिया, नई दिल्ली को पत्र लिखकर BCI Draft Bill, 2026 के तहत वकालत नामांकन शुल्क को 750 रूपए से बढ़ाकर 22,500 रूपए करने के प्रस्ताव पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है।
कृतिवास मंडल ने कहा कि यह 30 गुना की अभूतपूर्व बढ़ोतरी मध्यवर्गीय और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आने वाले कानून स्नातकों के लिए एक बड़ा वित्तीय अवरोध बनेगी वकालत की शुरुआत में जूनियर वकीलों को कोई निश्चित वजीफा या वित्तीय सहायता नहीं मिलती है ऐसे में 22,500 रूपए की भारी फीस इस पेशे को केवल संपन्न वर्ग तक सीमित कर देगी
कृतिवास मंडल ने माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने भी विभिन्न फैसलों में स्पष्ट किया है कि बार कौंसिल ऑफ इंडिया कानून के पेशे में प्रवेश करने वाले युवाओं/युवतियों पर आर्थिक बोझ नहीं डाल सकती फीस ऐसी होनी चाहिए जिसे समाज का सबसे गरीब छात्र भी आसानी से दे सके लेकिन इस प्रस्तावित वृद्धि से न्याय के क्षेत्र में आने वाले कानून स्नातकों का मनोबल टूटेगा।
देश के सभी राज्यों के युवाओं और युवतियों को समान अवसर देने और कानूनी पेशे को समावेशी बनाने के लिए एनरोलमेंट फीस को अधिकतम 750 रूपये ही निर्धारित किया जाए यह राशि पूरी तरह न्यायसंगत और तर्कसंगत है
कृतिवास मंडल ने बार कौंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष से अनुरोध किया है कि देश के लाखों कानून स्नातकों और नए अधिवक्ताओं के भविष्य को ध्यान में रखते हुए इस फीस वृद्धि के प्रस्ताव को तुरंत वापस लिया जाए और एनरोलमेंट शुल्क को मात्र 750 रूपये रखा जाए ।





