
झारखंड वार्ता
श्री बंशीधर नगर (गढ़वा)। श्री श्री ठाकुर अनुकूलचंद्र जी के अनुयायियों की ओर से जंगीपुर ग्राम स्थित सत्संग उपासना केंद्र उर्जीतपा में साप्ताहिक सत्संग का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन, शंख ध्वनि और वंदे पुरुषोत्तम ध्वनि के साथ हुआ। इसके बाद सभी जीवों के कल्याण की कामना करते हुए सामूहिक नाम जप और ध्यान किया गया। साथ ही श्री श्री ठाकुर जी के हस्तलिखित ग्रंथ सत्यानुसरण एवं नारीनीति का पाठ किया गया।
सत्संग के दौरान वक्ताओं ने इष्ट के प्रति विश्वास, नाम जप की महिमा, मानव प्रेम और जीवों के कल्याण के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सत्संग मनुष्य को सदाचार, सेवा और आध्यात्मिक जीवन की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
इष्ट के प्रति विश्वास से मिलती है जीवन को दिशा : विजय नंदन सिन्हा
इष्ट चर्चा करते हुए ऋत्विक विजय नंदन सिन्हा ने कहा कि अपने इष्ट के प्रति गहरा विश्वास रखने से जीवन की कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति मिलती है। उन्होंने स्वस्त्ययनी व्रत के पालन के महत्व पर चर्चा करते हुए कहा कि नियमित अनुशासन और आध्यात्मिक साधना से शरीर एवं मन को स्वस्थ रखने में सहायता मिलती है।
उन्होंने कहा कि श्री श्री ठाकुर अनुकूलचंद्र जी ने मनुष्य से प्रेम करने और मानवीय संबंधों को महत्व देने का संदेश दिया है। उनके विचारों के अनुसार, मनुष्य के प्रति प्रेम और सद्भाव बनाए रखना जीवन का महत्वपूर्ण उद्देश्य होना चाहिए। उन्होंने आगामी 22 नवंबर को आयोजित होने वाले श्री श्री ठाकुर जी के जन्म महोत्सव को सफल बनाने के लिए सभी सत्संगियों से तन, मन और धन से सहयोग करने की अपील की।
सतनाम के जप की महिमा अपरंपार : शक्ति दास सिन्हा
सत्संगी शक्ति दास सिन्हा ने कहा कि ईश्वर प्रदत्त सतनाम सभी मनुष्यों के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में नाम जप का विशेष महत्व रहा है। भगवान शिव द्वारा भगवान श्रीराम के नाम का स्मरण और देवर्षि नारद द्वारा नारायण नाम के निरंतर जाप का उल्लेख करते हुए उन्होंने नाम की महिमा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि नाम जप से मनुष्य को आध्यात्मिक शांति और सकारात्मक दिशा प्राप्त होती है।
शिव की पूजा के साथ उनके गुणों को जीवन में अपनाना जरूरी : धृति सुंदर लाल
सत्संग का संचालन कर रहे ऋत्विक धृति सुंदर लाल ने भगवान शिव की महिमा पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि शिव का अर्थ मंगल है। भगवान शिव समस्त जीवों के कल्याण और मंगल के प्रतीक हैं। उन्होंने भगवान शिव को सर्व योग एवं सिद्धियों का अधिपति बताते हुए उनकी पूजा में बेलपत्र के महत्व की जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि भगवान शिव का त्रिशूल सत्व, रज और तम तीन गुणों का प्रतीक माना जाता है, जबकि उनका डमरू ध्वनि और शब्द का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि हम जिन देवी-देवताओं की पूजा करते हैं, उनके आदर्शों और गुणों को अपने जीवन में अपनाने का प्रयास भी करना चाहिए। पूजा का वास्तविक उद्देश्य केवल आराधना तक सीमित नहीं, बल्कि अच्छे विचारों और सद्गुणों को व्यवहार में उतारना भी है।
कार्यक्रम में सुमंत दा, अजय दा, संजय दा, भोला प्रसाद, श्रीकांत लाल, धृति दीप, अजय कुमार, कलावती देवी, चंचल गुप्ता, दीपमाला, वृंदा देवी, तारा देवी, रीता देवी, मधु, प्रिया, तनु प्रिया और शिवानी सोनी सहित बड़ी संख्या में सत्संगी उपस्थित थे।




