
जिस पर्व पर हर साल गूंजता था उत्सव का रंग,इस बार वहां दिखेगा श्रद्धा और शोक का भाव
आकाश लोहार
गढ़वा
त्योहार आते हैं तो घर आंगन रोशन होते हैं,प्रतिष्ठानों में पूजा होती है और खुशियों की गूंज सुनाई देती है,लेकिन इस बार विश्वकर्मा पूजा का रंग थोड़ा अलग होगा,पूजा होगी,पर उत्सव नहीं,आस्था होगी,लेकिन सांस्कृतिक कार्यक्रमों की गूंज नहीं होगी,क्योंकि इस बार विश्वकर्मा समाज ने अपनी खुशियों पर संयम रखते हुए स्वर्गीय सुदिव्य कुमार सोनू को श्रद्धांजलि देने का फैसला किया है,समाज का कहना है कि जिनसे आत्मीय जुड़ाव रहा,उनके जाने का दुख केवल शब्दों में नहीं,बल्कि अपने व्यवहार और निर्णयों में भी दिखाई देना चाहिए।
बाबा विश्वकर्मा मंदिर निर्माण को लेकर जुटा समाज :- बाबा विश्वकर्मा मंदिर निर्माण को लेकर गुरुवार की शाम कल्याणपुर के गौरीटीकर स्थित मंदिर निर्माण स्थल पर विश्वकर्मा समाज की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई,बैठक की अध्यक्षता समाज के प्रदेश उपाध्यक्ष सुरेंद्र विश्वकर्मा ने की,इस दौरान मंदिर निर्माण कार्य को गति देने,समाज के सामूहिक सहयोग से निर्माण को आगे बढ़ाने तथा मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट गठित करने समेत कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई,बैठक में समाज के लोगों ने कहा कि बाबा विश्वकर्मा का मंदिर केवल ईंट पत्थर का निर्माण नहीं,बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए समाज की आस्था,एकता और पहचान का प्रतीक होगा।
पूजा होगी,लेकिन सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं :- बैठक के बाद समाज के प्रदेश उपाध्यक्ष सुरेंद्र विश्वकर्मा ने बड़ा फैसला सामने रखा,उन्होंने कहा कि इस वर्ष विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर समाज के लोग पूर्व की भांति अपने अपने प्रतिष्ठानों में विधिवत पूजा अर्चना करेंगे,लेकिन किसी भी प्रकार का सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित नहीं किया जाएगा,यानी भगवान विश्वकर्मा की पूजा की परंपरा पूरी श्रद्धा के साथ निभाई जाएगी,लेकिन इस बार जश्न और मनोरंजन से समाज दूरी बनाए रखेगा।
सुदिव्य सोनू के निधन पर शोक और श्रद्धांजलि :- सुरेंद्र विश्वकर्मा ने बताया कि यह निर्णय झारखंड सरकार के पूर्व मंत्री एवं विश्वकर्मा समाज के सम्मानित सदस्य रहे स्वर्गीय सुदिव्य कुमार सोनू के आकस्मिक निधन पर शोक और श्रद्धांजलि व्यक्त करने के उद्देश्य से लिया गया है,उन्होंने कहा कि समाज उनके निधन से मर्माहत है,ऐसे समय में धूमधाम और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के बजाय उनके प्रति सम्मान और संवेदना व्यक्त करना ही उचित होगा।
प्रशासन से भी की गई बड़ी मांग :- विश्वकर्मा समाज ने जिला प्रशासन से भी मांग की है कि विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर जिले में किसी भी प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रम के आयोजन की अनुमति नहीं दी जाए,समाज का मानना है कि इस फैसले से स्वर्गीय सुदिव्य कुमार सोनू के प्रति सम्मान और श्रद्धांजलि की भावना और मजबूत होगी।
दो मिनट का मौन और नम आंखों से श्रद्धांजलि :- बैठक के अंत में माहौल उस वक्त भावुक हो गया,जब स्वर्गीय सुदिव्य कुमार सोनू की याद में श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई,समाज के लोगों ने उनके प्रति सम्मान प्रकट करते हुए दो मिनट का मौन धारण किया,इसके बाद बाबा विश्वकर्मा से दिवंगत आत्मा की शांति और शोकाकुल परिजनों को इस अपार दुख को सहने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की गई,उस वक्त शायद शब्द कम पड़ गए थे,लेकिन मौन ही बहुत कुछ कह रहा था।
मंदिर निर्माण के साथ समाज की एकजुटता का संकल्प :- बैठक में मौजूद लोगों ने मंदिर निर्माण कार्य को आपसी सहयोग और एकजुटता के साथ आगे बढ़ाने का संकल्प लिया,समाज के पदाधिकारियों और सदस्यों ने कहा कि बाबा विश्वकर्मा मंदिर का निर्माण समाज के लिए गौरव का विषय है और इसे पूरा करने में हर संभव सहयोग किया जाएगा,कार्यक्रम का संचालन सुनील कुमार विश्वकर्मा ने किया।
बैठक में मुख्य रूप से उपस्थित :- लक्ष्मी विश्वकर्मा,उपेंद्र विश्वकर्मा,राम मिलन विश्वकर्मा,बबलू विश्वकर्मा,अवधेश कुमार,सोमनाथ विश्वकर्मा,विमलेश विश्वकर्मा,श्रवण विश्वकर्मा,अशोक विश्वकर्मा,सुरेंद्र विश्वकर्मा,राजमणि विश्वकर्मा,राम सकल,अजीत,प्रदीप,फूलचंद विश्वकर्मा,बाबू लोहार सहित विश्वकर्मा समाज के कई बुद्धिजीवी,पदाधिकारी एवं सदस्य मौजूद रहे।
इस बार विश्वकर्मा पूजा में भगवान विश्वकर्मा की पूजा होगी,दीप भी जलेगा,लेकिन खुशियों का शोर नहीं होगा,क्योंकि कुछ रिश्ते पद और राजनीति से नहीं,दिल से बनते हैं और जब अपना कोई चला जाता है,तो उसकी याद में खामोशी भी श्रद्धांजलि बन जाती है,विश्वकर्मा समाज का यह फैसला शायद यही संदेश दे रहा है,आस्था अपनी जगह है,लेकिन अपनों के जाने का दर्द भी अपनी जगह है।






