
पीएम श्री उच्च विद्यालय खुकडाडीह के प्रधानाध्यापक अरुण कुमार की अनोखी पहल, “किशोरवय संबंधो, रिश्तों की समझ, युवाओं में डिप्रेशन व मोबाइल की लत से बचाव” विषयक एक्सपर्ट टॉक आयोजित
युवा होते बच्चों में किशोरवय संबंधो, रिश्तों की समझ बढ़ाने व डिजिटल माध्यमों के सकारात्मक उपयोग को लेकर किशोर होते बच्चों से लगातार संवाद बेहद अहम
सामाजिक संस्था निश्चय फाउंडेशन के संस्थापक तरुण कुमार ने बतौर विशेषज्ञ बच्चों से किया संवाद, किशोरावस्था में ही अपने जीवन लक्ष्य निर्धारित कर उस दिशा में कड़ी मेहनत करना ही है जीवन में सफलता प्राप्त करने का सबसे बेहतर फॉर्मूला
जमशेदपुर : वर्तमान समय में किशोर होते बच्चों का जीवन भी मानसिक जटिलताओं से अब अछूता नहीं रहा, अब किशोर होते बच्चों और युवाओं में अवसाद ( Depression) की समस्या आम हो चली है। इसके चलते अब समाज को कई गंभीरतम परिणाम भुगतने पड़ रहे है।

बच्चों व युवाओं के बेहतर मानसिक स्वास्थ्य हेतु किशोरवय संबंध, रिश्तों की समझ बढ़ाने व डिजिटल माध्यमों के सकारात्मक उपयोग को लेकर किशोर होते बच्चों से लगातार संवाद बेहद अहम है। जमशेदपुर के ग्रामीण इलाके में अवस्थित पीएमश्री उच्च विद्यालय खुकडाडीह के प्रधानाध्यापक अरुण कुमार की पहल पर विद्यालय में किशोरवय संबंधों की समझ व मोबाइल की लत विषयक “एक्सपर्ट टॉक” कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान बच्चों व किशोरों के मुद्दों पर गहरी समझ रखने वाले सामाजिक कार्यकर्ता व सामाजिक संस्था निश्चय फाउंडेशन के संस्थापक तरुण कुमार ने बतौर विशेषज्ञ बच्चों के साथ कार्यशाला आयोजित कर बच्चों के साथ लंबी बातचीत की। कार्यशाला के दौरान कक्षा 9वीं एवं 10 वीं के छात्राओं को हार्मोनल चेंज व किशोरावस्था के दौरान किशोर-किशोरियों में आने वाले शारीरिक, मानसिक परिवर्तन के बारे में विस्तार से चर्चा की गई।

किशोरों के मनोवैज्ञानिक पहलुओं पर चर्चा करते हुए किशोरावस्था में विपरीत लिंग के प्रति स्वत: आकर्षण व किशोरवय रिश्तों के मायनों को भी समझाने की कोशिश की गई। चर्चा के दौरान यह बात निकलकर आई कि गांवों में अब शिक्षा का स्तर तो बढ़ा है, इससे बाल विवाह के घटनाओं में कमी आ रही है, लेकिन अब कुछ किशोर होते बच्चे आकर्षण में फंसकर खुद ही विवाह जैसे बंधन में बंध जाते है। इससे बच्चों के घरवाले भी उनपर भरोसा नहीं कर पाते। वह मोबाइल फोन व इंटरनेट को इसका बड़ा कारण मानते है। चर्चा के माध्यम से किशोरियों में यह समझ विकसित करने की कोशिश की गई कि किशोरावस्था में विपरीत लिंग के प्रति आकर्षण होना, दोस्ती की चाह प्राकृतिक है, लेकिन आधुनिक होते समाज में हमें अपने जीवन लक्ष्यों को निर्धारित कर उस दिशा में आगे बढ़ने का प्रयास करना होगा। अगर हम अपने जीवन लक्ष्यों को ध्यान में रखकर कार्य करेंगे, मानवीय रिश्तों के मायनों को गहराई व गरिमा को समझने की कोशिश करेंगे तो किशोरावस्था में आकर्षण में उलझकर अपने प्रगति पर विराम नहीं लगाएंगे, बल्कि दोस्ती को अपनी मजबूती बनाएंगे, कमजोरी नहीं।
डिजिटल माध्यमों के सकारात्मक उपयोग, इंटरनेट का सदुपयोग करने, अपनी निजी जानकारियों व फोटो वीडियो को सोशल प्लेटफॉर्म पर डालने से बचने पर भी बातचीत की गई। किसी भी तरह की परेशानी या मानसिक समस्या होने पर भरोसेमंद लोगों व विशेषज्ञों से सहायता लेने में कोई झिझक नहीं करनी चाहिए। लगभग 3 घंटों तक चले संवाद कार्यक्रम में लगभग 140 किशोरियों ने भाग लिया, इस दौरान उन्हें संभावित बीमारियों, बचाव, कानूनों व देशभर के कहानियों व खबरों के माध्यम से अपनी सुरक्षा को लेकर सजग रहने हेतु अवगत करवाया गया।
कार्यक्रम में भाग लेने के अनुभव पर बातचीत करते हुए लड़कियों ने बताया कि कार्यक्रम में भाग लेकर उन्हें नया दृष्टिकोण मिला है, अब वह अपने जीवन लक्ष्यों के प्रति, अपनी पहचान के प्रति ज्यादा सजग महसूस कर रही है। ऐसे कार्यक्रम विद्यालय के लड़कों के साथ भी आयोजित किए जाने चाहिए, जिससे वह भी मुद्दों के प्रति संवेदनशील हो सके। प्रधानाध्यापक अरुण कुमार ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान छात्राओं के प्रश्नों व अनुभव को बेझिझक होकर साझा करने ने कार्यक्रम को जीवंत बना दिया, किशोर होते बच्चों के साथ ऐसे कार्यक्रम बेहद आवश्यक है। मौके पर भारती दुबे, बेबी मार्डी, रेशमा परवीन व अन्य शिक्षिकाएं भी मुख्य रूप से उपस्थित थी, जिनके मार्गदर्शन में विद्यालय बच्चे बेहतर शिक्षा ग्रहण कर रहे है।




