
आकाश लोहार
गढ़वा
जब किसी समाज को लगता है कि उसकी आवाज व्यवस्था के शोर में कहीं दब रही है,तो वह चुप नहीं रहता,बल्कि लोकतांत्रिक तरीके से अपने अधिकारों की बात सरकार और संवैधानिक संस्थाओं तक पहुंचाता है,गढ़वा में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला,जहां सवर्ण एकता मंच,जिला इकाई गढ़वा की ओर से देश की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू के नाम एक मांग पत्र सौंपा गया है,दिनांक 9 सितंबर 2026 को तैयार किए गए इस मांग पत्र में सवर्ण समाज ने भारतीय संविधान के अनुरूप समानता,समान शिक्षा,समान अवसर और समाज के न्यायोचित हितों की रक्षा की मांग उठाई है।
मांग पत्र में कहा गया है कि आजादी से लेकर अब तक देश के निर्माण में हर समाज ने अपना योगदान दिया है,ऐसे में व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए,जिसमें किसी के साथ अन्याय न हो और हर व्यक्ति को आगे बढ़ने का समान अवसर मिले,सवर्ण एकता मंच ने UGC से जुड़े विवादित प्रावधानों को तत्काल वापस लेने,जातिगत आधार पर चली आ रही आरक्षण व्यवस्था की व्यापक समीक्षा करने तथा आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़े प्रत्येक व्यक्ति को उसकी जरूरत के आधार पर लाभ देने की मांग की है।
इसके साथ ही SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम की व्यापक समीक्षा कर इसके दुरुपयोग को रोकने के लिए आवश्यक सुधार की मांग भी उठाई गई है,मांग पत्र में सवर्ण समाज की समस्याओं और संवैधानिक हितों की संस्थागत रूप से सुनवाई और संरक्षण के लिए सवर्ण आयोग के शीघ्र गठन की मांग भी की गई है,वहीं,समाज को लेकर कथित तौर पर अपमानजनक और विभाजनकारी भाषा के सार्वजनिक इस्तेमाल पर भी मंच ने आपत्ति जताई है,मांग की गई है कि ऐसी घटनाओं में शामिल लोगों के खिलाफ निष्पक्ष जांच कर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
यह मांग पत्र सिर्फ कागज का एक टुकड़ा नहीं,बल्कि उस समाज की आवाज है,जो अपने लिए समानता,सम्मान और न्यायपूर्ण अवसर की बात संवैधानिक तरीके से सरकार तक पहुंचाना चाहता है,अब सवाल सिर्फ इतना है कि इस मांग पत्र पर सरकार और संबंधित संवैधानिक संस्थाएं कितना संज्ञान लेती हैं और सवर्ण समाज की उठी यह आवाज किस मुकाम तक पहुंचती है,क्योंकि लोकतंत्र में आवाज छोटी या बड़ी नहीं होती,जरूरी यह है कि आवाज संविधान के दायरे में हो और उसके पीछे न्याय की मांग हो।






