कोलकाता: पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के बारासात इलाके से सामने आए एक वायरल वीडियो ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है। इस वीडियो में बारासात-1 पंचायत समिति के उपाध्यक्ष मोहम्मद गियासुद्दीन मंडल एक व्यवसायी के साथ भारी मात्रा में नकदी के ढेर के पास बैठे नजर आ रहे हैं। वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैलने के बाद राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।
वायरल फुटेज में देखा जा सकता है कि कुर्सी पर बैठे व्यवसायी राकिबुल इस्लाम के सामने नोटों का इतना बड़ा ढेर रखा है कि उनका चेहरा तक लगभग ढक गया है। उनके बाईं ओर पंचायत समिति के उपाध्यक्ष मोहम्मद गियासुद्दीन मंडल बैठे दिखाई देते हैं। कुछ देर बाद वीडियो में एक अन्य व्यक्ति नायलॉन का बैग लेकर वहां पहुंचता है, जिसमें और नकदी डाली जाती है। इस पूरे दृश्य ने सवाल खड़े कर दिए हैं कि इतनी बड़ी रकम किस लेन-देन से जुड़ी है।
वीडियो वायरल होते ही पंचायत उपाध्यक्ष मोहम्मद गियासुद्दीन मंडल ने सफाई देते हुए कहा कि यह वीडियो साल 2022 का है। उनका दावा है कि वह सिर्फ वहीं पास में बैठे थे और जिस लेन-देन का वीडियो में जिक्र है, उसमें उनकी कोई भूमिका नहीं है। वहीं व्यवसायी राकिबुल इस्लाम ने भी कहा कि यह रकम जमीन की खरीद-बिक्री से जुड़ी थी और पैसे गिने जा रहे थे।
इधर, सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के स्थानीय नेतृत्व ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच की बात कही है। पार्टी का कहना है कि यदि जांच में किसी तरह की अनियमितता या दोष सामने आता है, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि विपक्ष ने इस पूरे मामले को लेकर तृणमूल कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। स्थानीय बीजेपी नेताओं का कहना है कि यह वीडियो सत्तारूढ़ पार्टी के नेताओं के कथित भ्रष्टाचार और चरित्र को उजागर करता है। बीजेपी का आरोप है कि ऐसे मामलों से पहले भी तृणमूल की छवि दागदार रही है।
बारासात-1 नंबर ब्लॉक तृणमूल कांग्रेस के संयोजक मोहम्मद ईशा सरकार ने भी कहा है कि वीडियो की सत्यता की जांच की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर आरोप सही पाए जाते हैं तो पार्टी की ओर से कार्रवाई तय है। साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि वीडियो में दिखाई दे रही इतनी बड़ी रकम आखिर कहां से आई।
फिलहाल, वायरल वीडियो को लेकर पश्चिम बंगाल की सियासत गरमा गई है और सभी की नजरें जांच के नतीजों पर टिकी हुई हैं।













