
जमशेदपुर: सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के बाद शहर में फुटपाथों पर अतिक्रमण का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षित और निर्धारित फुटपाथ पर पैदल चलना नागरिकों के मौलिक अधिकार का हिस्सा है। फैसले के बाद जमशेदपुर में भी फुटपाथों को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग तेज हो गई है।
अधिवक्ता सुधीर कुमार पप्पू ने जिला प्रशासन, उपायुक्त और टाटा स्टील प्रबंधन से शहर के प्रमुख मार्गों पर फुटपाथों से अतिक्रमण हटाने की मांग की है। उनका कहना है कि फुटपाथों पर दुकानों, ठेलों और अन्य अवैध कब्जों के कारण लोगों को मजबूरी में मुख्य सड़क पर चलना पड़ता है। इससे खासकर बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा बना रहता है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट की न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति ए.एस. चंदुरकर की खंडपीठ ने Maniyar Iliyaz @ Shaik Riyaz बनाम P. Ayyappan मामले में 19 जून 2026 को फैसला सुनाया। फैसले में अदालत ने सुरक्षित एवं निर्धारित फुटपाथ पर पैदल चलने के अधिकार को संविधान के भाग-III के तहत मौलिक अधिकार से जोड़ा।
मामला एक सड़क दुर्घटना से संबंधित था, जिसमें एक पिता अपने पांच वर्षीय बेटे के साथ स्कूल जा रहा था। घटनास्थल पर न तो फुटपाथ था और न ही पैदल पार करने की उचित व्यवस्था। इसी संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट ने पैदल यात्रियों की सुरक्षा और उनके अधिकारों को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की।
अदालत ने इस अधिकार को संविधान के अनुच्छेद 19(1)(d) के तहत आवागमन की स्वतंत्रता से जोड़ते हुए अनुच्छेद 19(1)(a), 19(1)(b), 19(1)(c) और अनुच्छेद 21 के व्यापक संवैधानिक संरक्षण के संदर्भ में भी देखा।
फुटपाथ बनाना और सुरक्षित रखना स्थानीय निकायों की जिम्मेदारी
फैसले में यह भी रेखांकित किया गया कि जहां सड़कें हैं, वहां संबंधित नगर निकायों, शहरी विकास प्राधिकरणों, नगरपालिकाओं और पंचायतों की जिम्मेदारी है कि वे पैदल यात्रियों के लिए फुटपाथ का निर्माण, रखरखाव और सुरक्षा सुनिश्चित करें।
अदालत ने पैदल यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को महज यातायात व्यवस्था का हिस्सा नहीं, बल्कि नागरिकों के संवैधानिक अधिकार से जुड़ा विषय माना है।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद जमशेदपुर में फुटपाथों की स्थिति को लेकर सवाल उठने लगे हैं। शहर के कई प्रमुख इलाकों में फुटपाथों पर दुकानें, ठेले और अन्य तरह के कब्जे दिखाई देते हैं। कई जगह फुटपाथ पार्किंग या व्यावसायिक गतिविधियों के लिए भी इस्तेमाल होते हैं।
नतीजा यह है कि पैदल चलने वाले लोगों को फुटपाथ छोड़कर सड़क पर उतरना पड़ता है। व्यस्त सड़कों पर तेज रफ्तार वाहनों के बीच पैदल चलना दुर्घटना का जोखिम बढ़ा देता है।
प्रशासन से कार्रवाई की मांग
अधिवक्ता सुधीर कुमार पप्पू ने मांग की है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ध्यान में रखते हुए जमशेदपुर के फुटपाथों का सर्वे कराया जाए और जहां भी अतिक्रमण है, उसे हटाया जाए। साथ ही फुटपाथों को दोबारा कब्जे में जाने से रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाई जाए।
नागरिकों का कहना है कि केवल अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी। फुटपाथों का नियमित रखरखाव, पार्किंग पर नियंत्रण और पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित रास्ता सुनिश्चित करना भी जरूरी है।
अब देखना यह है कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद जमशेदपुर में प्रशासन और संबंधित प्रबंधन फुटपाथों को लेकर कितना गंभीर कदम उठाते हैं। क्योंकि सवाल सिर्फ फुटपाथ खाली कराने का नहीं, बल्कि शहरवासियों को सुरक्षित तरीके से पैदल चलने का उनका संवैधानिक अधिकार दिलाने का है।



