
सना: यमन में लंबे समय से जारी संघर्ष एक बार फिर बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। हूती विद्रोहियों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमनी सरकार के समर्थक सुरक्षा बलों के बीच पश्चिमी ताइज और लाल सागर के तटीय इलाकों में भीषण लड़ाई छिड़ गई है। गुरुवार से शुरू हुई इस लड़ाई में अब तक 129 लोगों के मारे जाने की खबर है। इसे हाल के वर्षों में यमन में हुई सबसे घातक झड़पों में से एक बताया जा रहा है।
सरकारी बलों के 66 जवान और 62 हूती लड़ाके मारे गए
एएफपी की ओर से अलग-अलग सैन्य और चिकित्सा सूत्रों से जुटाए गए आंकड़ों के मुताबिक, यमनी सरकारी बलों की ओर से 66 सैनिक मारे गए हैं। वहीं हूती विद्रोहियों से जुड़े चिकित्सा और सैन्य सूत्रों ने अपने कम से कम 62 लड़ाकों के मारे जाने की जानकारी दी है। इसके अलावा एक नागरिक की मौत की भी सूचना है। इन आंकड़ों को जोड़ने पर मृतकों की संख्या 129 पहुंचती है। हालांकि, दोनों पक्षों द्वारा बताए गए आंकड़ों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
बाब अल-मंदेब की ओर बढ़ रहे हूती
मौजूदा संघर्ष का सबसे अहम पहलू हूती विद्रोहियों की बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य की दिशा में बढ़त है। गुरुवार को हूतियों ने पश्चिमी ताइज प्रांत में कई सरकारी ठिकानों के खिलाफ जमीनी हमला किया। इसके साथ रॉकेट, ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों का भी इस्तेमाल किए जाने की रिपोर्ट है।
सैन्य सूत्रों के मुताबिक, हूती लड़ाकों ने लाल सागर के करीब और ताइज के आसपास कई ऊंचाई वाले रणनीतिक ठिकानों पर कब्जा करने की कोशिश की। इन पहाड़ी इलाकों से सरकारी बलों की गतिविधियों के साथ-साथ मोखा बंदरगाह और बाब अल-मंदेब की तरफ जाने वाले रास्तों पर नजर रखना आसान होता है।
मोखा बंदरगाह क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
हूतियों के अभियान का एक प्रमुख लक्ष्य मोखा (Mokha/Al-Makha) बंदरगाह और उसके आसपास का इलाका बताया जा रहा है। मोखा लाल सागर के तट पर स्थित है और बाब अल-मंदेब के बेहद करीब है।
सैन्य विश्लेषकों के मुताबिक, ऊंचाई वाले इलाकों पर नियंत्रण हासिल करने के बाद हूती तटीय क्षेत्र की ओर दबाव बढ़ा सकते हैं। इससे सरकारी नियंत्रण वाले मोखा को अलग-थलग करने और आसपास के सैन्य एवं आपूर्ति मार्गों पर दबाव बनाने में उन्हें मदद मिल सकती है।
इससे पहले अगस्त में भी मोखा बंदरगाह हूती हमलों का निशाना बना था। उस समय यमनी अधिकारियों ने कहा था कि बंदरगाह पर बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से हमला किया गया, जिससे बंदरगाह के कुछ हिस्सों को नुकसान पहुंचा था।
सरकारी बलों ने भी शुरू किया जवाबी हमला
हूतियों की शुरुआती बढ़त के बाद यमनी सरकारी बलों ने पलटवार किया है। शुक्रवार को सरकारी सेना ने पश्चिमी ताइज के जबल हबाशी इलाके में अल-खजान और अल-मकहाना की पहाड़ियों को फिर से अपने नियंत्रण में लेने का दावा किया।
सरकारी बलों और उनके सहयोगी सैनिकों की ओर से हूती ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की गई। इससे संकेत मिलता है कि लड़ाई अब सिर्फ एक सीमित मोर्चे तक नहीं रह गई है, बल्कि ताइज से लेकर लाल सागर के तटीय इलाकों तक इसका दायरा बढ़ रहा है।
अदन से ताइज भेजे गए अतिरिक्त सैनिक
हूती विद्रोहियों की बढ़त को देखते हुए यमनी सरकार ने ताइज क्षेत्र में अतिरिक्त सैनिक भेजे हैं। एक यमनी अधिकारी के मुताबिक, अदन से ताइज के लिए सैनिक भेजे गए और यह कदम सऊदी अरब के कहने पर उठाया गया।
यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का मुख्यालय अदन में है, जबकि हूती राजधानी सना समेत देश के बड़े हिस्से पर नियंत्रण रखते हैं। ऐसे में ताइज और लाल सागर के बीच का इलाका दोनों पक्षों के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है।
2022 के बाद फिर बड़े पैमाने पर सैन्य तनाव
यमन में अप्रैल 2022 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से युद्धविराम के बाद कई मोर्चों पर अपेक्षाकृत शांति रही थी। हालांकि, हाल के महीनों में तनाव दोबारा बढ़ा और जुलाई में संघर्ष विराम की स्थिति कमजोर पड़ने के बाद हूतियों और सरकारी बलों के बीच सैन्य गतिविधियां तेज हुईं। मौजूदा हमला 2022 के बाद हूतियों के सबसे बड़े सैन्य अभियानों में से एक माना जा रहा है।
दुनिया के लिए क्यों बढ़ी चिंता?
बाब अल-मंदेब सिर्फ यमन का रणनीतिक इलाका नहीं है। यह लाल सागर को अदन की खाड़ी और आगे हिंद महासागर से जोड़ने वाला प्रमुख समुद्री मार्ग है। लाल सागर आगे स्वेज नहर के जरिए भूमध्य सागर से जुड़ता है। यूरोप और एशिया के बीच समुद्री व्यापार के लिए यह रास्ता बेहद महत्वपूर्ण है। इसलिए अगर संघर्ष के कारण बाब अल-मंदेब के आसपास जहाजों की आवाजाही बाधित होती है, तो इसका असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार, समुद्री बीमा, माल ढुलाई और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है।
हूतियों ने इससे पहले भी लाल सागर में गुजरने वाले जहाजों को निशाना बनाया है। 2023 में गाजा युद्ध शुरू होने के बाद से इस क्षेत्र में उनके हमलों ने वैश्विक शिपिंग कंपनियों के लिए सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ाई थीं।
हूतियों की रणनीति क्या है?
विशेषज्ञों और क्षेत्रीय अधिकारियों के आकलन के मुताबिक, मौजूदा अभियान का उद्देश्य केवल कुछ पहाड़ियों या सैन्य ठिकानों पर कब्जा करना नहीं है। हूती बाब अल-मंदेब के आसपास के ऊंचे इलाकों और मोखा तक पहुंच बनाने वाले मार्गों पर दबाव बढ़ाकर अपनी रणनीतिक स्थिति मजबूत करना चाहते हैं। अगर हूती बाब अल-मंदेब या मोखा बंदरगाह पर अपनी पकड़ मजबूत करते हैं, तो सरकार और सऊदी अरब के साथ किसी भी संभावित बातचीत में उनकी सौदेबाजी की ताकत बढ़ सकती है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल ताइज और मोखा के बीच कई मोर्चों पर तनाव बना हुआ है। सरकारी बल हूती बढ़त को रोकने के लिए अतिरिक्त सैनिक और जवाबी कार्रवाई कर रहे हैं, जबकि हूती विद्रोही बाब अल-मंदेब के आसपास रणनीतिक ऊंचाइयों और तटीय इलाकों की ओर अपना दबाव बढ़ाने की कोशिश में हैं।
अगर लड़ाई लंबे समय तक जारी रहती है और मोखा या बाब अल-मंदेब के आसपास सैन्य नियंत्रण का संतुलन बदलता है, तो इसका असर यमन के गृहयुद्ध से कहीं आगे तक जा सकता है। लाल सागर के इस अहम समुद्री गलियारे में किसी भी बड़े व्यवधान से अंतरराष्ट्रीय शिपिंग और ऊर्जा बाजारों पर नया दबाव बनने की आशंका है।




