
नरसारावपेट: आंध्र प्रदेश के नरसारावपेट से एक ऐसा हैरान करने वाला मामला सामने आया है। पेट में दर्द की शिकायत के बाद अस्पताल पहुंची एक महिला की जांच में उसके पेट के अंदर कई ऐसी वस्तुएं मिलीं, जिन्हें देखकर मेडिकल टीम भी हैरान रह गई। एंडोस्कोपी और सीटी स्कैन के बाद जब स्थिति स्पष्ट हुई तो डॉक्टरों ने तत्काल उपचार शुरू किया।
महिला के अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने शुरुआती तौर पर सामान्य जांच के तौर पर ईसीजी और एंडोस्कोपी कराई। ईसीजी रिपोर्ट सामान्य थी, लेकिन एंडोस्कोपी के दौरान पेट के भीतर लंबी और लकड़ी जैसी कई वस्तुएं दिखाई दीं। इसके बाद डॉक्टरों ने स्थिति की पूरी जानकारी के लिए सीटी स्कैन कराया। जांच में इन वस्तुओं की मौजूदगी की पुष्टि होने के बाद उन्हें निकालने की प्रक्रिया शुरू की गई।
डॉक्टर रामचंद्र रेड्डी के अनुसार, महिला के पेट में मौजूद करीब 25 सेंटीमीटर लंबा एक पेन गंभीर चोट पहुंचा चुका था। इसके कारण महिला में न्यूमोमीडियास्टिनम जैसी गंभीर जटिलता भी विकसित हो गई थी। स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने एंडोस्कोपी और लैप्रोस्कोपी की मदद से पेट में मौजूद वस्तुओं को बाहर निकालने का फैसला किया।
पेट से निकलीं 19 अलग-अलग वस्तुएं
इलाज के दौरान डॉक्टरों को महिला के पेट से एक-दो नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में अलग-अलग वस्तुएं मिलीं। मेडिकल टीम ने सर्जरी के दौरान 13 पेन, एक मोमबत्ती और पांच लकड़ी के चम्मच बाहर निकाले। पेट के अंदर इतनी संख्या में और इस तरह की अलग-अलग वस्तुओं का मिलना डॉक्टरों के लिए बेहद असामान्य मामला था।
डॉक्टरों के मुताबिक, इलाज के बाद महिला की हालत फिलहाल स्थिर है। मेडिकल टीम उसकी लगातार निगरानी कर रही है और आगे का उपचार जारी है।
एक साल पहले भी निगल लिए थे चार पेन
मामले की जांच के दौरान डॉक्टरों ने महिला से बातचीत की तो पता चला कि करीब एक साल पहले भी उसने चार पेन निगल लिए थे। उस समय भी सर्जरी के जरिए उसके पेट से पेन निकाले गए थे। घटना के बाद महिला को मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ के पास भेजा गया था और उसका उपचार चल रहा था। इसके बावजूद दोबारा ऐसी घटना सामने आने से डॉक्टरों की चिंता बढ़ गई है।
नुकीली वस्तुएं निगलना हो सकता है जानलेवा
विशेषज्ञों के अनुसार, पेन जैसी नुकीली या कठोर वस्तुओं को निगलना बेहद खतरनाक हो सकता है। ऐसी वस्तुएं पाचन तंत्र की दीवार को नुकसान पहुंचाने के साथ पेट या आंत में छेद कर सकती हैं। इससे अंदरूनी चोट, संक्रमण और अन्य गंभीर जटिलताओं का खतरा बढ़ जाता है।
ऐसे मामलों में केवल शरीर से वस्तुओं को निकालना ही पर्याप्त नहीं माना जाता। मरीज की मानसिक स्थिति का आकलन, उचित मानसिक स्वास्थ्य उपचार और नियमित निगरानी भी जरूरी होती है, ताकि इस तरह की घटना दोबारा होने से रोकी जा सके।







