
दो लाख रुपए की कथित वसूली और वनकर्मियों की मिलीभगत के आरोपों की होगी जांच
आकाश लोहार
गढ़वा
जंगल सिर्फ पेड़ों का समूह नहीं,बल्कि बेजुबान वन्यजीवों का घर और प्रकृति की अनमोल धरोहर है,लेकिन जब इसी जंगल की जमीन पर कथित रूप से अवैध बालू का कारोबार फलने फूलने लगे,पेड़ों पर आरी चलने लगे और वन्यजीवों के आशियाने उजड़ने की नौबत आ जाए,तो सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर प्रकृति की इस संपत्ति की रखवाली कौन कर रहा है,गढ़वा जिले के धुरकी प्रखंड अंतर्गत कनहर नदी के विभिन्न घाटों से अवैध बालू उत्खनन कर वन विभाग की भूमि पर बालू का भंडारण किए जाने और इस दौरान पेड़ों की कटाई किए जाने की शिकायत ने जिला प्रशासन का ध्यान खींचा है,मामले की गंभीरता को देखते हुए उपायुक्त सह जिला दण्डाधिकारी पशुपति नाथ मिश्रा ने सख्त रुख अपनाया है,उन्होंने वन प्रमंडल पदाधिकारी,उत्तरी वन प्रमंडल को पत्र लिखकर पूरे मामले की नियमानुसार जांच कराने और दोषियों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
वनभूमि पर मशीनों से कटाई,फिर बालू का भंडारण :- प्राप्त शिकायत में आरोप लगाया गया है कि धुरकी क्षेत्र में जेसीबी और लोडर जैसी भारी मशीनों का इस्तेमाल कर वनभूमि पर पेड़ों की कटाई की जा रही है,इसके बाद जमीन को समतल कर वहां कथित रूप से अवैध बालू का भंडारण किया जा रहा है,यदि जांच में ये आरोप सही पाए जाते हैं,तो यह मामला केवल अवैध बालू कारोबार तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि वनभूमि के संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय भी बन जाएगा,शिकायत में कुछ व्यक्तियों के साथ वन विभाग के स्थानीय कर्मियों की कथित संलिप्तता का भी आरोप लगाया गया है,हालांकि,इन आरोपों की वास्तविकता जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
दो लाख रुपए की कथित वसूली का आरोप,जांच के घेरे में पूरा मामला :- इस पूरे प्रकरण में सबसे गंभीर आरोप वनभूमि पर बालू भंडारण के लिए कथित तौर पर दो लाख रुपए की वसूली किए जाने का है,शिकायतकर्ता का आरोप है कि वन विभाग की भूमि पर बालू का भंडारण करने के लिए कथित रूप से ₹2,00,000 की राशि वसूलने के बाद जमीन उपलब्ध कराई जाती है,आवेदन में वनपाल,वनरक्षी और रेंजर की कथित मिलीभगत का भी आरोप लगाया गया है,ये आरोप गंभीर हैं,लेकिन अभी इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है,ऐसे में जांच के जरिए यह स्पष्ट होना जरूरी है कि वनभूमि पर बालू का भंडारण किन परिस्थितियों में हुआ,इसके पीछे कौन लोग हैं और क्या इसमें किसी सरकारी कर्मी की भूमिका रही है,जिला प्रशासन ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाने पर जोर दिया है।
जंगल उजड़ा तो वन्यजीव कहां जाएंगे,ग्रामीणों की सुरक्षा पर भी सवाल :- इस मामले का एक दूसरा पहलू भी है,जो सीधे प्रकृति और ग्रामीणों की सुरक्षा से जुड़ा है,शिकायत में कहा गया है कि वनभूमि पर पेड़ों की कटाई और बालू भंडारण के कारण वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास प्रभावित हो रहे हैं,जंगल में आश्रयस्थल नष्ट होने से जंगली जानवर आसपास के गांवों की ओर आने को विवश हो सकते हैं,इससे ग्रामीणों की जान माल और फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका बनी हुई है,जंगलों का संरक्षण केवल पर्यावरण बचाने की जिम्मेदारी नहीं,बल्कि इंसान और वन्यजीवों के बीच संतुलन बनाए रखने की भी जरूरत है,ऐसे में यदि वनभूमि पर अवैध गतिविधियां हो रही हैं,तो उन पर समय रहते रोक लगाना बेहद जरूरी है।
वीडियो और जीपीएस तस्वीरें सौंपी गईं,जांच दल को मिला भारी मात्रा में बालू :- शिकायतकर्ता ने अपने आवेदन के साथ वनभूमि पर पेड़ों की कटाई और कथित अवैध बालू भंडारण से संबंधित वीडियो तथा जीपीएस फोटोग्राफ भी उपलब्ध कराए हैं,वहीं,जिला प्रशासन द्वारा गठित जिलास्तरीय जांच दल ने धुरकी प्रखंड के संबंधित क्षेत्र में भारी मात्रा में बालू का भंडारण पाया है,इस निष्कर्ष के बाद मामले की गंभीरता और बढ़ गई है,अब जांच के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों,स्थल की स्थिति और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की पड़ताल महत्वपूर्ण होगी।
डीसी का सख्त निर्देश,एक सप्ताह में मांगी कार्रवाई की रिपोर्ट :- वनभूमि के संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उपायुक्त सह जिला दण्डाधिकारी पशुपति नाथ मिश्रा ने वन प्रमंडल पदाधिकारी,उत्तरी वन प्रमंडल को पूरे मामले की नियमानुसार जांच कराने का निर्देश दिया है,उन्होंने कहा है कि जांच में जिन व्यक्तियों की संलिप्तता प्रमाणित हो,उनके विरुद्ध नियमानुसार आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाए,साथ ही,वनभूमि पर अवैध बालू भंडारण और पेड़ों की कटाई रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं,उपायुक्त ने की गई कार्रवाई का प्रतिवेदन एक सप्ताह के भीतर उपलब्ध कराने का निर्देश भी दिया है।
अब जांच पर टिकी निगाहें,क्या सामने आएगी पूरी सच्चाई :- धुरकी की कनहर नदी से जुड़ा यह मामला अब केवल बालू के भंडारण का नहीं,बल्कि वनभूमि की सुरक्षा,प्राकृतिक संपदा के संरक्षण और कथित अनियमितताओं की सच्चाई सामने लाने का भी है,अब निगाहें वन विभाग की जांच पर टिकी हैं,क्या वनभूमि पर बालू भंडारण के पीछे जिम्मेदार लोगों की पहचान हो पाएगी,क्या पेड़ों की कटाई के आरोपों की सच्चाई सामने आएगी और क्या कथित वसूली तथा वनकर्मियों की मिलीभगत के आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी,इन सभी सवालों का जवाब जांच के बाद ही मिलेगा,फिलहाल जिला प्रशासन के निर्देश से यह स्पष्ट है कि मामले को गंभीरता से लिया गया है,अब जरूरत है समयबद्ध,निष्पक्ष और प्रभावी कार्रवाई की,ताकि जंगल की जमीन सुरक्षित रहे,वन्यजीवों का आशियाना बचा रहे और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति लोगों का भरोसा कायम रहे।




