जमशेदपुर में डॉक्टर के नाम पर साइबर जाल, 10 रुपये की फीस के बहाने खाते से उड़ाए 5 हजार
जमशेदपुर: शहर में साइबर अपराधियों ने ठगी का नया तरीका अपनाते हुए अब प्रतिष्ठित डॉक्टरों की पहचान का दुरुपयोग शुरू कर दिया है। ताजा मामला प्रसिद्ध चर्म रोग विशेषज्ञ और इंडियन एसोसिएशन ऑफ डर्माटोलॉजिस्ट्स, वेनेरियोलॉजिस्ट्स एंड लेप्रोलॉजिस्ट्स (IADVL) के राष्ट्रीय संयुक्त सचिव डॉ. राजीव ठाकुर से जुड़ा है। उनके नाम और पहचान का इस्तेमाल कर फर्जी ऑनलाइन अपॉइंटमेंट के जरिए मरीजों से ठगी की जा रही है। मामले की जानकारी मिलते ही डॉ. ठाकुर ने बिष्टुपुर साइबर थाना में शिकायत दर्ज कराकर फर्जी वेबसाइट, मोबाइल नंबर और बैंक खातों पर कार्रवाई की मांग की है।
जानकारी के अनुसार, डॉ. राजीव ठाकुर का गाड़ाबासा स्थित बीआर सेवा सदन और बिष्टुपुर स्थित आरपी डर्माकेयर में क्लीनिक संचालित है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि उनके किसी भी क्लीनिक में ऑनलाइन अपॉइंटमेंट या ऑनलाइन कंसल्टेशन की सुविधा उपलब्ध नहीं है। इसके बावजूद साइबर ठग इंटरनेट पर उनकी फर्जी जानकारी डालकर मरीजों को अपने जाल में फंसा रहे हैं।
घटना का खुलासा तब हुआ जब कदमा निवासी एक महिला मरीज डॉक्टर का नंबर खोजने के लिए गूगल पर सर्च कर रही थी। कुछ ही देर बाद उसे एक व्यक्ति का फोन आया, जिसने खुद को डॉक्टर के क्लीनिक का कर्मचारी बताया। अपॉइंटमेंट सुनिश्चित करने के नाम पर महिला को एक लिंक भेजा गया और केवल 10 रुपये की टोकन फीस जमा करने के लिए कहा गया। महिला ने जैसे ही लिंक पर भुगतान की प्रक्रिया शुरू की, उसके बैंक खाते से 5 हजार रुपये निकल गए। इसके बाद उसने डॉक्टर से संपर्क किया, तब पूरे फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ।
शहर में डॉक्टरों के नाम पर साइबर ठगी का यह लगातार तीसरा मामला है। इससे पहले एमजीएम मेडिकल कॉलेज के चर्म रोग विभागाध्यक्ष डॉ. ए.एन. झा और आईएडीवीएल के प्रदेश सचिव डॉ. आर. कुमार के नाम का भी इसी तरह दुरुपयोग कर मरीजों को निशाना बनाया गया था। तीनों मामलों में ठगी का तरीका लगभग एक जैसा होने से आशंका जताई जा रही है कि कोई संगठित साइबर गिरोह डॉक्टरों की फर्जी ऑनलाइन प्रोफाइल तैयार कर लोगों को ठग रहा है।
लगातार सामने आ रही घटनाओं से शहर के डॉक्टरों में चिंता बढ़ गई है। चिकित्सकों ने लोगों से अपील की है कि गूगल पर दिखने वाले मोबाइल नंबर या अपॉइंटमेंट लिंक पर बिना पुष्टि भरोसा न करें। किसी भी डॉक्टर से संपर्क करने से पहले उनके आधिकारिक नंबर या क्लीनिक से जानकारी की पुष्टि अवश्य करें और किसी भी अनजान लिंक पर, चाहे राशि 10 रुपये ही क्यों न हो, ऑनलाइन भुगतान करने से बचें।
फिलहाल साइबर थाना पुलिस मामले की जांच कर रही है। पुलिस फर्जी मोबाइल नंबर, बैंक खातों और ऑनलाइन नेटवर्क की पड़ताल में जुटी है ताकि इस गिरोह तक पहुंचा जा सके।
