
बालासोर: ओडिशा के बालासोर जिले में वन विभाग की टीम ने जंगल से पांच बेहद दुर्लभ ओरंगुटान को रेस्क्यू किया है। भोगराई ब्लॉक के जंगल से बरामद किए गए सभी ओरंगुटान करीब एक से दो साल की उम्र के बताए जा रहे हैं। भारत में ओरंगुटान का कोई प्राकृतिक आवास नहीं होने के कारण इस बरामदगी ने वन विभाग और सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है।
वन विभाग अब इस बात की जांच में जुटा है कि इंडोनेशिया और मलेशिया के वर्षावनों में पाए जाने वाले ये दुर्लभ जीव आखिर भारत के ओडिशा तक कैसे पहुंचे। शुरुआती तौर पर आशंका जताई जा रही है कि इनके पीछे अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी नेटवर्क का हाथ हो सकता है।
ओरंगुटान दुनिया के सबसे बुद्धिमान ग्रेट एप्स में शामिल हैं। इनके लाल-भूरे बाल और विशिष्ट शारीरिक बनावट इन्हें बेहद खास बनाती है। अवैध वन्यजीव बाजार में इनकी भारी मांग होने की वजह से तस्कर इन्हें निशाना बनाते हैं। बताया जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय अवैध बाजार में एक ओरंगुटान की कीमत करीब 20 से 25 लाख रुपये तक हो सकती है। इस हिसाब से पांच ओरंगुटान की अनुमानित कीमत एक करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है।
बचाए गए ओरंगुटान को फल और ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन (ORS) दिया गया है। डॉक्टर की सलाह के मुताबिक, उन्हें एक खास मिक्सचर भी दिया गया है। रेस्क्यू के बाद वन विभाग ने पांचों ओरंगुटान को सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया है। फिलहाल उन्हें क्वारंटाइन में रखा गया है, जहां उनकी स्वास्थ्य जांच की जा रही है। वन विभाग के डॉक्टर उनके स्वास्थ्य की निगरानी करने के साथ जरूरी उपचार भी करेंगे। अधिकारियों के मुताबिक, स्वास्थ्य जांच और आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन ओरंगुटान को भुवनेश्वर स्थित नंदनकानन जू में शिफ्ट किया जाएगा।
मामले की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग ने जांच शुरू कर दी है। वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) को भी बरामदगी की जानकारी दी गई है। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश करेंगी कि ओरंगुटान को भारत में किस रास्ते से लाया गया, इन्हें जंगल में किसने छोड़ा और इनके पीछे कौन लोग या नेटवर्क सक्रिय हैं।






