रांची: झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की सीजीएल परीक्षा पेपर लीक मामले में लंबे समय से फरार चल रहा मास्टरमाइंड विनय शाह उर्फ हरिहर सिंह आखिरकार पुलिस के हत्थे चढ़ गया। उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने उसे गुरुवार को गोरखपुर के शाहपुर थाना क्षेत्र से दबोच लिया।
विनय के खिलाफ सीआईडी-रांची ने जनवरी में ही धोखाधड़ी, विश्वासघात, मूल्यवान प्रतिभूतियों के साथ छेड़छाड़ एवं परीक्षा अधिनियम की गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया था। उसकी लंबे समय से तलाश चल रही थी।
लोकेशन ट्रैक कर एसटीएफ ने दबोचा
एसटीएफ गोरखपुर की टीम, उप पुलिस अधीक्षक धर्मेश कुमार शाही के पर्यवेक्षण में कई दिनों से विनय शाह की गतिविधियों पर नजर रख रही थी। 20 नवंबर को इनपुट मिला कि विनय शाहपुर के यांत्रिक कारखाना क्षेत्र में छिपा हुआ है। टीम ने दबिश देकर उसे हिरासत में लिया और पूछताछ की।
पहचान की पुष्टि के लिए एसटीएफ ने तुरंत झारखंड सीआईडी से संपर्क किया। कुछ ही देर बाद रांची से आई टीम ने उसकी पहचान की पुष्टि कर आधिकारिक गिरफ्तारी की प्रक्रिया पूरी की।
नेपाल सिम और भारतीय सिम बरामद
गिरफ्तारी के समय विनय हनुमंत नगर कॉलोनी (पादरी बाजार), शाहपुर में किराए के मकान में रह रहा था। छापेमारी के दौरान पुलिस को उसके पास से एक नेपाली सिम कार्ड और एक भारतीय सिम कार्ड बरामद हुए। प्रारंभिक पूछताछ में उसने माना कि वह लगातार अपनी लोकेशन बदलकर पुलिस को गुमराह करता रहा।
जे स्क्योर होटल में रची गई थी साजिश
पूछताछ में विनय ने यह भी खुलासा किया कि 22 सितंबर 2024 के जेएसएससी सीजीएल परीक्षा का प्रश्नपत्र उसी ने लीक कराया था। साजिश उसके साथियों मनोज कुमार, शशिभूषण दीक्षित, संदीप त्रिपाठी के साथ मिलकर रची गई थी। यह पूरी प्लानिंग रांची के जे स्क्योर होटल में की गई थी।
परीक्षा से पहले अभ्यर्थियों को नेपाल ले जाकर कराया गया ‘रिहर्सल’
एक चौंकाने वाला खुलासा यह भी हुआ कि परीक्षा से ठीक पहले अभ्यर्थियों को मोतिहारी–रक्सौल बॉर्डर के रास्ते नेपाल ले जाया गया था, जहां उन्हें लीक प्रश्नपत्र का रिहर्सल कराया गया। इस पूरे रैकेट में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले मनोज कुमार ने काम के बदले विनय के खाते में एक लाख रुपये ट्रांसफर किए थे।
ट्रांजिट रिमांड की तैयारी
विनय को एसटीएफ ने शाहपुर थाने में दाखिल कर लिया है।
झारखंड पुलिस अब उसकी ट्रांजिट रिमांड लेकर आगे की कानूनी कार्रवाई में जुट गई है।










