नई दिल्ली: देश के बीमा क्षेत्र में बड़े सुधार की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए संसद ने ‘सबका बीमा, सबकी रक्षा (बीमा कानूनों में संशोधन) बिल, 2025’ को मंज़ूरी दे दी है। बुधवार को यह विधेयक लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में बहुमत से पारित हो गया। इस बिल के साथ ही इंश्योरेंस सेक्टर में FDI की सीमा 74 प्रतिशत से बढ़ाकर 100 प्रतिशत कर दी गई है।
सरकार का कहना है कि इस फैसले से देश में बीमा की पहुंच बढ़ेगी, प्रतिस्पर्धा तेज होगी, प्रीमियम दरों में कमी आएगी और रोज़गार के नए अवसर पैदा होंगे।
विपक्ष के संशोधन खारिज, सेलेक्ट कमेटी को भेजने की मांग ठुकराई
बिल पर चर्चा के दौरान विपक्षी दलों ने कई संशोधन प्रस्ताव पेश किए, जिनमें इसे आगे की जांच के लिए संसदीय समिति (सेलेक्ट कमेटी) को भेजने की मांग भी शामिल थी। हालांकि, सदन ने सभी संशोधनों को खारिज करते हुए विधेयक को पारित कर दिया।
वित्त मंत्री का जवाब: अभी और संभावनाएं बाकी हैं
विधेयक पर बहस का जवाब देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि बीमा क्षेत्र को और खोलने की अब भी काफी गुंजाइश है। उन्होंने बताया कि 100 प्रतिशत FDI की अनुमति मिलने से विदेशी कंपनियां भारत में सीधे निवेश कर सकेंगी।
सीतारमण ने कहा कि कई विदेशी कंपनियों को अब तक जॉइंट वेंचर पार्टनर न मिलने के कारण भारत में आने में दिक्कत होती थी। नई व्यवस्था से यह बाधा दूर होगी और ज्यादा पूंजी इस सेक्टर में आएगी।
बढ़ेगा कॉम्पिटिशन, घट सकता है प्रीमियम
वित्त मंत्री ने भरोसा दिलाया कि बाजार में नई कंपनियों के प्रवेश से प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, जिसका सीधा फायदा उपभोक्ताओं को मिलेगा। उन्होंने कहा कि कॉम्पिटिशन बढ़ने से बीमा प्रीमियम कम होने चाहिए, जिससे आम लोगों के लिए बीमा लेना आसान होगा।
रोज़गार को लेकर आशंकाओं पर सरकार का जवाब
कुछ सांसदों ने इस बिल से नौकरियों पर असर पड़ने की आशंका जताई, जिसे वित्त मंत्री ने सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि जब FDI लिमिट को 26 प्रतिशत से बढ़ाकर 74 प्रतिशत किया गया था, तब से बीमा क्षेत्र में रोज़गार लगभग तीन गुना हो चुका है।
उनका कहना था कि नई कंपनियों और निवेश के आने से आने वाले समय में और ज्यादा नौकरियां पैदा होंगी।
जल्दबाजी के आरोपों को किया खारिज
विपक्ष द्वारा लगाए गए “जल्दबाजी में बिल पास कराने” के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए निर्मला सीतारमण ने कहा कि इस विधेयक पर करीब दो वर्षों तक व्यापक चर्चा और विचार-विमर्श किया गया है।
किन कानूनों में होगा संशोधन
‘सबका बीमा, सबकी रक्षा’ बिल के तहत निम्नलिखित कानूनों में संशोधन किया जाएगा:
बीमा अधिनियम, 1938
जीवन बीमा निगम (LIC) अधिनियम, 1956
बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) अधिनियम, 1999
इसके अलावा, यह विधेयक गैर-बीमा कंपनी और बीमा कंपनी के विलय का रास्ता भी खोलता है।
पॉलिसीधारकों के लिए विशेष प्रावधान
बिल के उद्देश्यों और कारणों के अनुसार, इसका मकसद केवल निवेश बढ़ाना नहीं बल्कि पॉलिसीधारकों के हितों की सुरक्षा भी है। इसके तहत पॉलिसीधारक शिक्षा और संरक्षण कोष की स्थापना का प्रावधान होगा। बीमा क्षेत्र के तेज़ और संतुलित विकास पर जोर और उपभोक्ताओं के अधिकारों को मजबूत करना।
क्या बदलेगा आम लोगों के लिए?
सरकार का दावा है कि इस ऐतिहासिक फैसले से बीमा सेवाएं ज्यादा लोगों तक पहुंचेंगी, प्रीमियम दरें किफायती होंगी, बेहतर सर्विस और ज्यादा विकल्प मिलेंगे और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर बनेंगे।
संसद से पास हुआ ‘सबका बीमा, सबकी रक्षा’ बिल, इंश्योरेंस सेक्टर में 100% FDI को मिली मंजूरी












