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छत्तीसगढ़: सुकमा में 26 नक्सलियों ने किया सरेंडर, 64 लाख का था इनाम

On: January 7, 2026 7:52 PM
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सुकमा: छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में 26 नक्सलियों ने सरेंडर किया है। इस सरेंडर से नक्सलियों की बटालियन नंबर-1 को बड़ा झटका लगा है। कमांडर इन चीफ देवा बारसे के आत्मसमर्पण के बाद अब उसकी पूरी टीम बिखरती नजर आ रही है। देवा के साथ काम कर चुके 26 नक्सलियों ने सुकमा में पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया है। इनमें 7 महिलाएं भी शामिल हैं। खास बात यह है कि इन 26 नक्सलियों में से 13 पर कुल 64 लाख रुपये का इनाम घोषित था।


पुलिस अधिकारियों के अनुसार आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली लंबे समय से सुकमा, माड़ क्षेत्र और ओडिशा बॉर्डर से सटे इलाकों में सक्रिय थे। इनमें से कई नक्सली आंध्र-ओडिशा बॉर्डर (AOB), दक्षिण बस्तर और माड़ डिवीजन में भी गतिविधियों को अंजाम दे चुके हैं। इन सभी पर 1 लाख रुपये से लेकर 10 लाख रुपये तक का इनाम घोषित था।


कैडर स्ट्रक्चर का खुलासा


आत्मसमर्पण करने वालों में नक्सली संगठन के विभिन्न स्तरों के कैडर शामिल हैं। इनमें CYPCM – 1, DVCM – 1, PPCM – 3,
ACM – 3 और 18 नक्सली पार्टी मेंबर शामिल हैं। ये सभी नक्सली क्षेत्र में हुई कई बड़ी वारदातों, सुरक्षाबलों पर हमलों, आगजनी और जबरन वसूली जैसी घटनाओं में शामिल रहे हैं।


हाई प्रोफाइल महिला नक्सली भी शामिल


आत्मसमर्पण करने वालों में हाई प्रोफाइल महिला नक्सली लाली उर्फ मुचाकी आयते का नाम भी शामिल है। वह प्लाटून डिप्टी कमांडर के पद पर कार्यरत थी और उस पर 10 लाख रुपये का इनाम घोषित था। इसके अलावा हेमला लखमा, आसमिता उर्फ कमलू समेत कई युवा कैडर भी आत्मसमर्पण करने वालों में शामिल हैं, जो मिलिशिया या पार्टी मेंबर के तौर पर संगठन से जुड़े थे।


सुरक्षा बलों की संयुक्त सफलता


इस बड़ी सफलता में डीआरजी सुकमा, इंटेलिजेंस ब्रांच, सीआरपीएफ की विभिन्न बटालियनों और कोबरा बटालियन की सूचना शाखा की अहम भूमिका रही। लंबे समय से चल रही रणनीतिक कार्रवाई, निरंतर दबाव और संवाद के चलते नक्सलियों को मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित किया गया।


पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर किया आत्मसमर्पण


पुलिस के मुताबिक यह सामूहिक आत्मसमर्पण छत्तीसगढ़ सरकार की ‘नक्सलवादी आत्मसमर्पण पुनर्वास नीति-2025’ और सुकमा पुलिस के विशेष अभियान ‘पूना मार्गेम’ से प्रभावित होकर हुआ है। ‘पूना मार्गेम’ का अर्थ है ‘पुनर्वास से पुनर्जीवन’, जिसका उद्देश्य भटके युवाओं को हिंसा छोड़कर समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है।


सरकार की नीति के तहत सभी आत्मसमर्पित नक्सलियों को 50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि, उनके ऊपर घोषित इनाम की राशि और पुनर्वास से जुड़ी अन्य सुविधाएं दी जाएंगी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह सरेंडर नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में एक बड़ी उपलब्धि है और आने वाले समय में और भी नक्सलियों के आत्मसमर्पण की उम्मीद है।

Vishwajeet

मेरा नाम विश्वजीत कुमार है। मैं वर्तमान में झारखंड वार्ता (समाचार संस्था) में कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हूं। समाचार लेखन, फीचर स्टोरी और डिजिटल कंटेंट तैयार करने में मेरी विशेष रुचि है। सटीक, सरल और प्रभावी भाषा में जानकारी प्रस्तुत करना मेरी ताकत है। समाज, राजनीति, खेल और समसामयिक मुद्दों पर लेखन मेरा पसंदीदा क्षेत्र है। मैं हमेशा तथ्यों पर आधारित और पाठकों के लिए उपयोगी सामग्री प्रस्तुत करने का प्रयास करता हूं। नए विषयों को सीखना और उन्हें रचनात्मक अंदाज में पेश करना मेरी कार्यशैली है। पत्रकारिता के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की कोशिश करता हूं।

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