रांची: बड़बोलेपन के लिए विख्यात झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी के स्वास्थ्य विभाग में कथित रूप से एक और घोटाले की बदबू पूरे प्रदेश भर में फैल रही है। झारखंड के मुख्य सचिव ने अपर सचिव को मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं लेकिन आरोप लगाने वाली भारतीय जनता पार्टी का कहना है कि जांच का आदेश स्वागत योग्य है लेकिन दूध की रखवाली बिल्ली ही करेगी इस पर सवाल है।
बता दें कि झारखंड के स्वास्थ्य विभाग में कथित घोटालों और अनियमितताओं को लेकर मुख्य सचिव ने स्वास्थ्य विभाग के सचिव को पत्र लिखकर विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं। यह मामला मुख्य रूप से दवा खरीद, टेंडर प्रक्रिया में पक्षपात और ऊँची दरों पर सामान खरीदने के आरोपों से संबंधित है।
इस घटनाक्रम से जुड़ी मुख्य बातें निम्नलिखित हैं आरोप बीजेपी और अन्य विपक्षी नेताओं का आरोप है कि स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी के कार्यकाल में चहेतों को टेंडर दिलाने और दवा खरीद में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं की गई हैं।
रिपोर्टों के अनुसार, जिन उत्पादों की कीमत कम थी, उन्हें कई गुना अधिक दरों पर खरीदने का आरोप लगाया गया है।
विपक्ष ने इस मामले की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने और स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे की मांग की है।
मुख्य सचिव द्वारा जांच के निर्देश दिए जाने के बाद, अब विभाग स्तर पर इस पर कार्यवाही की उम्मीद है, हालांकि विपक्ष इस जांच की निष्पक्षता पर भी सवाल उठा रहा है।यह मामला फिलहाल राज्य की राजनीति में काफी चर्चा का विषय बना हुआ है।
स्वास्थ्य विभाग में अनियमितता की जांच मुख्य सचिव द्वारा स्वास्थ्य सचिव को सौंपे जाने पर सियासत शुरू
प्रदेश भाजपा ने जहां एक तरफ इसका स्वागत किया है, वहीं दूसरी ओर इसकी आलोचना करते हुए कहा है कि यह दूध की रखवाली बिल्ली को करने जैसा है।
भाजपा मुख्य सचेतक नवीन जायसवाल ने प्रदेश कार्यालय में मीडियाकर्मियों को संबोधित करते हुए कहा कि जिस तरह से स्वास्थ्य मंत्री पर अपने लोगों को नियुक्त करने के साथ विभागीय निविदा में एक ही परिवार के सदस्यों को अलग-अलग नाम से देने का काम किया गया है, उससे साफ जाहिर होता है कि किस तरह से गड़बड़ी की गई है.
उन्होंने कहा कि मुख्य सचिव ने जांच का आदेश देकर अच्छा काम किया है, लेकिन जिस विभाग में गड़बड़ी हुई है, उसी विभाग के सचिव को जांच का जिम्मा देना उचित नहीं है. भारतीय जनता पार्टी मुख्यमंत्री से मांग करती है कि इसकी जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से करायी जाए. जिससे यह पता चल सके कि किस तरह की गड़बड़ियां विभाग में हुई है.
उन्होंने कहा कि मुख्य सचिव ने जिस तरह से संज्ञान में लिया है, वह स्वागत योग्य कदम है और इसकी जांच स्वतंत्र एजेंसी से हो तो एक बड़ा घोटाला उजागर होगा. उन्होंने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा है कि यदि वास्तव में स्वास्थ्य विभाग में हुई अनियमितता की जांच राज्य सरकार कराना चाहती है तो बिना देर किए हुए जिस किसी भी स्वतंत्र एजेंसी से उसे इच्छा है वह जांच करा ले.
ये है मामला जिसपर हो रही है सियासत
झारखंड के स्वास्थ्य विभाग में अनियमितता का आरोप लगाते हुए एक लिखित शिकायत मुख्य सचिव और पीएमओ कार्यालय को दी गई है, जिसमें राज्य के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी और उनके करीबियों पर आउटसोर्सिंग, दवा खरीद और टेंडर प्रक्रिया में व्यापक अनियमितता बरतने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं.
शिकायत पत्र के अनुसार, राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई है क्योंकि स्वास्थ्य मंत्री के करीबियों ने पूरे सिस्टम को कथित तौर पर हाइजैक कर लिया है. आरोप है कि मंत्री के प्रभाव का इस्तेमाल कर अधिकारियों पर दबाव बनाया जाता है और चहेती कंपनियों को ऊंचे दरों पर काम दिलाया जाता है.
विशेष रूप से रिम्स और रांची सदर अस्पताल में आउटसोर्सिंग के कार्यों में भारी हेराफेरी की बात!
शिकायत में तीन भाइयों खवाजा अब्दुल ओएदीर अहमद भट, खवाजा मोहसिन अहमद और खवाजा फरहान अहमद के नाम का उल्लेख किया गया है. दावा है कि ये तीनों भाई मंत्री के निजी आवास से कई फर्मों का संचालन करते हैं. इनमें हिंद इंफ्रा प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड, क्योरिंग फार्मास्यूटिकल्स, भारत आर्ट्स एंड सप्लायर्स, ऑल टाइम मेडिसिन, हृदयालया और मयूरी सॉल्यूशन जैसी कंपनियां शामिल हैं. आरोप है कि जैम (GeM) और ई-टेंडरिंग की प्रक्रिया में नियमों में बदलाव करवाकर इन फर्मों को टेंडर दिलाए जाते हैं।
जामताड़ा में कथित रूप से आयुष्मान भारत योजना फर्जी मोतियाबिंद ऑपरेशन घोटाले का मामला
मंत्री इरफान के कार्य शैली पर इसके पूर्व भी उठे हैं सवाल
इसके पूर्व जामताड़ा में मोतियाबिंद के फर्जी ऑपरेशन और आयुष्मान भारत योजना में हुए कथित घोटाले को लेकर भाजपा ने उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए झारखंड सरकार पर बड़ा हमला बोला था। भाजपा प्रवक्ता अजय साह ने कहना था कि यह केवल एक अस्पताल का मामला नहीं है, बल्कि यह झारखंड की पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार, राजनीतिक संरक्षण और प्रशासनिक विफलता का बड़ा उदाहरण है। उन्होंने सीधे तौर पर स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी की कार्यशैली, भूमिका और जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
अजय साह ने कहा कि आयुष्मान भारत जैसी क्रांतिकारी योजना की शुरुआत भले ही झारखंड की धरती से हुई हो, लेकिन विडंबना यह है कि हेमंत सोरेन सरकार ने इस योजना को घोटाले की भेंट चढ़ा दी। जामताड़ा के सिटी अस्पताल और मंगलम नेत्रालय ने मात्र एक महीने में हजारों मोतियाबिंद ऑपरेशन का दावा कर आयुष्मान भारत के नाम पर लाखों रुपये की निकासी कर ली। इतना बड़ा फर्जीवाड़ा महीनों तक चलता रहा और जब मामले का खुलासा हुआ तो दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने के बजाय पूरे मामले की लीपापोती करने का प्रयास किया गया।केवल एक सिविल सर्जन को दूसरे जिलें में भेज कर पूरे मामले को रफा दफा करने का प्रयास किया गया।
अजय साह ने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य मंत्री के ही विधानसभा क्षेत्र में महीनों तक इतना बड़ा घोटाला चलता रहा और मंत्री को इसकी जानकारी नहीं थी, यह बात कोई भी सामान्य व्यक्ति स्वीकार नहीं कर सकता।
प्राप्त जानकारी के अनुसार संबंधित दोनों अस्पतालों में स्वास्थ्य मंत्री के करीबी लोगों का लगातार आना-जाना और पैरवी करना भी गंभीर जांच का विषय है। अस्पताल संचालकों और स्वास्थ्य मंत्री के बीच संबंधों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके। हर मुद्दे पर बोलने वाले स्वास्थ्य मंत्री की इस मुद्दे पर चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।
उन्होंने कहा कि जिन अस्पतालों में ये ऑपरेशन किए गए, वहां न केवल फर्जी ऑपरेशन हुए बल्कि बिना लाइसेंस के फार्मेसी और अन्य स्वास्थ्य सेवाएं भी अवैध रूप से चलाई जा रही थीं। अगर स्वास्थ्य मंत्री अपने ही विधानसभा क्षेत्र में एक-दो कमरे के अस्पतालों में चल रहे घोटालों को नहीं रोक पाए, तो पूरे राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पर उनका नियंत्रण किस स्तर का है, यह समझा जा सकता है।
भाजपा ने मांग की थी कि पूरे राज्य में आयुष्मान भारत के तहत हुए सभी मोतियाबिंद ऑपरेशनों का हेल्थ ऑडिट कराया जाए, ताकि जामताड़ा जैसे फर्जीवाड़े का पूरा सच सामने आ सके। अजय साह ने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की योजनाओं में राज्य स्तर पर हो रही भारी अनियमितताओं के कारण ही कई बार केंद्र सरकार को फंड रोकना पड़ता है, और बाद में राज्य सरकार उसी को राजनीतिक मुद्दा बनाकर जनता को गुमराह करने की कोशिश करती है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पूर्व स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता के कार्यकाल में भी इसी तरह का फ़र्ज़ी मोतियाबिंद ऑपरेशन घोटाला सामने आया था, लेकिन उस मामले की जांच का क्या परिणाम निकला, यह आज तक एक रहस्य बना हुआ है।
जामताड़ा जिले में मोतियाबिंद ऑपरेशन के नाम पर किए गए भुगतान के दावों में गड़बड़ी की आशंका सामने आई है। सिटी हॉस्पिटल जामताड़ा ने जहां तीन महीने में 1098 ऑपरेशन का दावा किया है, वहीं जांच में जब्त रिकॉर्ड में एक साल में मात्र 628 ऑपरेशन ही दर्ज मिले हैं। इस अंतर के बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई शुरू कर दी है। दरअसल जिला अंधापन नियंत्रण समिति के साथ जिले के चार अस्पतालों सिटी हॉस्पिटल जामताड़ा, मंगलम नेत्रालय, मधुपुर सिटी हॉस्पिटल (करमाटांड़) और परमानंद हॉस्पिटल का एमओयू किया गया है। समझौते के तहत मोतियाबिंद ऑपरेशन के लिए प्रति मरीज 2000 रुपये भुगतान का प्रावधान है।
सिटी हॉस्पिटल जामताड़ा ने जून, जुलाई और अगस्त 2025 में कुल 1098 मरीजों के ऑपरेशन का दावा करते हुए 21 लाख 96 हजार रुपए का क्लेम किया है। इसमें जून में 382, जुलाई में 349 और अगस्त में 367 ऑपरेशन दिखाए गए हैं। हालांकि जांच के दौरान अस्पताल से जब्त दस्तावेजों में 10 मार्च 2025 से 08 मार्च 2026 के बीच केवल 628 मरीजों के ऑपरेशन का रिकॉर्ड मिला है। दावे और वास्तविक रिकॉर्ड में इस बड़े अंतर ने पूरे मामले को संदेह के घेरे में ला दिया है। वहीं मंगलम नेत्रालय की ओर से करीब 06 लाख रुपए तथा मधुपुर सिटी हॉस्पिटल (करमाटांड़) की ओर से करीब 2.70 लाख रुपए का क्लेम किया गया है।जिला अंधापन नियंत्रण समिति से भुगतान के लिए अस्पतालों को मरीजों के नाम, मोबाइल नंबर सहित सभी आवश्यक दस्तावेज जमा करने होते हैं। वहीं जब डीसी रवि आनंद ने दस्तावेज में दर्ज मरीजों के मोबाइल नंबर पर संपर्क किया,तो कई मरीजों के मोबाइल नंबर गलत पाए गए। जिससे गड़बड़ी की आशंका और गहरा गई। फिलहाल डीसी की ओर से सिटी हॉस्पिटल जामताड़ा,मंगलम नेत्रालय व मधुपुर सिटी हॉस्पिटल (करमाटांड़) को सील करने का निर्देश दिया गया है।बीते बुधवार को डीसी रवि आनंद ने सिविल सर्जन डॉ एपीएन देव के साथ सिटी हॉस्पिटल जामताड़ा, मंगलम नेत्रालय और मधुपुर सिटी हॉस्पिटल (करमाटांड़) का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण में सिटी हॉस्पिटल में डॉक्टर अनुपस्थित मिले और परिसर में संचालित मेडिकल दुकान का वैध लाइसेंस भी नहीं पाया गया। हालांकि कुछ मरीज वहां मौजूद थे। जिनसे डीसी ने वार्ता भी की। इधर मंगलम नेत्रालय में कोई मरीज नहीं मिला। जबकि मधुपुर सिटी हॉस्पिटल (करमाटांड़) बंद पाया गया। इस मामले को गंभीर मानते हुए डीसी ने तीनों अस्पतालों को सील करने का निर्देश दिया है। करमाटांड़ स्थित अस्पताल को फिलहाल सील कर दिया गया है, जबकि अन्य पर कार्रवाई जारी है।
बहरहाल अब देखना है इन घोटालों के खिलाफ ठोस कार्रवाई होती है या पूर्व के घोटाले की तरह लीपा पोती! हालांकि इस बार भारतीय जनता पार्टी विपक्ष इन घोटालों को लेकर सरकार पर लगातार हमलावर है।









