रांची: झारखंड में प्रस्तावित नगर निकाय चुनाव को लेकर प्रदेश भाजपा ने अपनी तैयारियों को औपचारिक रूप से शुरू कर दिया है। रविवार को प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू की अध्यक्षता में हुई अहम बैठक में निकाय चुनावों को लेकर संगठनात्मक रणनीति, कार्यकर्ताओं की भूमिका और चुनावी तैयारियों पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में निर्णय लिया गया कि भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की विशेष टीमें प्रमंडल स्तर पर जाकर जमीनी हकीकत का फीडबैक लेंगी। यह फीडबैक सीधे प्रदेश नेतृत्व को सौंपा जाएगा, ताकि चुनावी रणनीति को और धार दी जा सके। इसके साथ ही 24 जनवरी को प्रदेश भाजपा की पूरी टीम निकाय चुनाव से पहले संगठन की तैयारियों और कार्यकर्ताओं की रणनीति का व्यापक जायजा लेगी।
दलीय आधार और ईवीएम से चुनाव की मांग
प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने इस मौके पर राज्य सरकार से नगर निकाय चुनाव शीघ्र कराने की मांग की। उन्होंने बैलेट पेपर की जगह ईवीएम से और दलीय आधार पर चुनाव कराने पर जोर दिया। आदित्य साहू ने कहा कि भाजपा लोकतांत्रिक मर्यादाओं की रक्षा करते हुए दलीय आधार पर चुनाव की वकालत करती है, जिससे राजनीतिक दलों और कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित हो सके।
उन्होंने हेमंत सोरेन सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि सरकार अपनी संभावित हार से डर रही है, इसी वजह से दलीय आधार पर चुनाव कराने से कतरा रही है। प्रदेश अध्यक्ष ने दावा किया कि जिस तरह महाराष्ट्र में भाजपा को ऐतिहासिक जीत मिली है, उसी तरह का परिणाम झारखंड में भी देखने को मिलेगा और भाजपा सभी 48 नगर निकायों में जीत का परचम लहराएगी। महाराष्ट्र जैसा परिणाम झारखंड में दोहराया जाएगा।
कई दिग्गज नेता रहे मौजूद
इस रणनीतिक बैठक में भाजपा के कई बड़े और वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। बैठक में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी, केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी, पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन, पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा समेत अनेक वरिष्ठ नेता और संगठन के पदाधिकारी शामिल हुए।
हालांकि, दो पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा और रघुबर दास की अनुपस्थिति भी चर्चा का विषय बनी रही। बताया गया कि अर्जुन मुंडा दिल्ली दौरे पर होने के कारण बैठक में शामिल नहीं हो सके, जबकि रघुबर दास के न आने को लेकर राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।
संगठन को मजबूत करने पर फोकस
बैठक के दौरान यह भी स्पष्ट किया गया कि निकाय चुनाव को भाजपा संगठन के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। बूथ स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने, स्थानीय मुद्दों को प्रमुखता से उठाने और सरकार की नीतियों को जनता के सामने लाने पर विशेष जोर दिया जाएगा।
कुल मिलाकर, नगर निकाय चुनाव से पहले भाजपा पूरी तरह से आक्रामक रणनीति के साथ मैदान में उतरने के मूड में नजर आ रही है और आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति में इसको लेकर हलचल और तेज होने की संभावना है।












