नई दिल्ली: बैंक से कर्ज लेने वाले और डिजिटल पेमेंट करने वाले करोड़ों ग्राहकों के लिए राहत भरी खबर है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अब बैंकों और फाइनेंशियल संस्थाओं की मनमानी पर सख्त शिकंजा कसने की तैयारी में है। लोन रिकवरी एजेंटों की बदसलूकी, ग्राहकों को गुमराह कर प्रोडक्ट बेचने की शिकायतें और डिजिटल फ्रॉड के मामलों को देखते हुए RBI तीन नए ड्राफ्ट रेगुलेशन लाने जा रहा है।
शुक्रवार को मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इन प्रस्तावित नियमों का मकसद ग्राहकों की सुरक्षा को मजबूत करना और बैंकों की जवाबदेही तय करना है।
मिस-सेलिंग पर चलेगा सख्त डंडा
पहला ड्राफ्ट गाइडलाइन बैंकों और वित्तीय संस्थाओं द्वारा की जा रही ‘मिस-सेलिंग’ पर केंद्रित होगा। कई मामलों में ग्राहक को लोन, बीमा या निवेश प्रोडक्ट की पूरी जानकारी नहीं दी जाती या गलत तरीके से जबरन प्रोडक्ट बेचे जाते हैं। नए नियमों के तहत ऐसी अनुचित बिक्री प्रथाओं पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
रिकवरी एजेंटों की मनमानी पर लगेगी लगाम
दूसरा मसौदा लोन रिकवरी प्रक्रिया और रिकवरी एजेंटों की भूमिका से जुड़ा होगा। देशभर से लगातार यह शिकायतें मिलती रही हैं कि रिकवरी एजेंट दबाव, धमकी और अभद्र व्यवहार का सहारा लेते हैं। RBI पहले भी इस पर चिंता जता चुका है, लेकिन अब इस मुद्दे पर कड़ा एक्शन लेने की तैयारी है।
डिजिटल फ्रॉड में ग्राहकों को बड़ी राहत
तीसरी और सबसे अहम ड्राफ्ट गाइडलाइन अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग ट्रांजैक्शन से जुड़ी होगी। प्रस्ताव है कि स्मॉल वैल्यू फ्रॉड ट्रांजैक्शन में अगर ग्राहक को नुकसान होता है, तो उसकी जिम्मेदारी सीमित की जाए। इसके तहत ग्राहकों को अधिकतम ₹25,000 तक मुआवज़ा देने के लिए एक अलग फ्रेमवर्क तैयार किया जाएगा। इससे डिजिटल पेमेंट करने वाले यूजर्स को बड़ी राहत मिल सकती है।
बिना गारंटी मिलेगा ₹20 लाख तक का लोन
छोटे कारोबारियों के लिए भी आरबीआई ने बड़ा कदम उठाया है। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) के लिए बिना गारंटी वाले लोन की सीमा को 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये करने का प्रस्ताव दिया गया है।
रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं
RBI की 59वीं MPC बैठक 4 से 6 फरवरी 2026 के बीच आयोजित हुई थी। बैठक में समिति ने सर्वसम्मति से रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखने का फैसला किया। मजबूत आर्थिक विकास और अमेरिका के साथ हालिया ट्रेड एग्रीमेंट के बाद टैरिफ दबावों में आई कमी को देखते हुए यह निर्णय लिया गया।
ग्राहक हितों पर RBI का फोकस
कुल मिलाकर RBI का यह कदम बैंकिंग सिस्टम में पारदर्शिता बढ़ाने और ग्राहकों के अधिकारों की रक्षा की दिशा में अहम माना जा रहा है। आने वाले दिनों में इन ड्राफ्ट गाइडलाइंस पर सुझाव मांगे जाएंगे, जिसके बाद इन्हें अंतिम रूप दिया जाएगा।













