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पेट्रोल-डीजल की कीमतों की हर 15 दिन में होगी समीक्षा, एक्साइज ड्यूटी की कटौती के बाद केंद्र सरकार का बड़ा ऐलान

On: March 27, 2026 9:02 PM
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नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के चलते वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज़ उछाल के बीच केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों की हर 15 दिन में समीक्षा करने का निर्णय लिया है। शुक्रवार को एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए ईंधन मूल्य निर्धारण को लचीला बनाए रखना जरूरी हो गया है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार अभी भी अनिश्चितता के दौर से गुजर रहे हैं।

अंतर-मंत्रालयी बैठक के दौरान केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) के अध्यक्ष विवेक चतुर्वेदी ने स्पष्ट किया कि वर्तमान स्थिति सामान्य नहीं है। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण शिपिंग मार्गों, आपूर्ति श्रृंखलाओं और कच्चे तेल की उपलब्धता पर असर पड़ा है, जिससे वैश्विक कीमतों में तेज वृद्धि देखी जा रही है। ऐसे में सरकार उपभोक्ताओं के हितों, राजकोषीय दबाव और तेल कंपनियों की वित्तीय स्थिति के बीच संतुलन बनाने के लिए सोच-समझकर कदम उठा रही है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, हर पखवाड़े ईंधन की कीमतों की समीक्षा की जाएगी। इस दौरान आयात लागत, घरेलू मांग, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम और अन्य आर्थिक संकेतकों का विश्लेषण किया जाएगा। इन सभी कारकों को ध्यान में रखते हुए ही करों या खुदरा कीमतों में बदलाव का निर्णय लिया जाएगा।

सरकार का मानना है कि इस तरह की नियमित समीक्षा प्रणाली से अचानक कीमतों में उछाल को रोका जा सकेगा और उपभोक्ताओं पर पड़ने वाला बोझ नियंत्रित रहेगा। साथ ही, यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्थिति और बिगड़ती है या आपूर्ति बाधित होती है, तो सरकार त्वरित नीतिगत निर्णय लेने में सक्षम होगी।

हाल ही में सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर ₹10 प्रति लीटर की उत्पाद शुल्क कटौती की थी। जानकारी के अनुसार, इस कदम से मात्र दो सप्ताह में ही लगभग ₹7,000 करोड़ का राजस्व नुकसान हुआ है। यह दर्शाता है कि कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए सरकार को कितना बड़ा वित्तीय भार उठाना पड़ रहा है।
कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने के बावजूद खुदरा ईंधन कीमतों में वृद्धि नहीं की गई। इसके बजाय उत्पाद शुल्क में कटौती कर राहत दी गई। पेट्रोल पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क ₹13 से घटाकर ₹3 प्रति लीटर कर दिया गया, जबकि डीजल पर यह शुल्क ₹10 से घटाकर शून्य कर दिया गया।

हालांकि, उपभोक्ताओं को खुदरा स्तर पर इसका सीधा लाभ नहीं मिल पाया है, क्योंकि इस राहत का उपयोग सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों (इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम) को हो रहे नुकसान की भरपाई के लिए किया जा रहा है। ये कंपनियां लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय कीमतों और घरेलू खुदरा कीमतों के बीच अंतर को वहन कर रही हैं।

सरकार के अनुसार, इस कर कटौती का वार्षिक राजकोषीय प्रभाव लगभग ₹1.75 लाख करोड़ आंका गया है, जो वैश्विक तेल कीमतों में आई तेजी से उत्पन्न दबाव को दर्शाता है।

इसके साथ ही सरकार ने डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) पर निर्यात शुल्क भी फिर से लागू कर दिया है। डीजल पर ₹21.5 प्रति लीटर और एटीएफ पर ₹29.5 प्रति लीटर का निर्यात शुल्क निर्धारित किया गया है, ताकि घरेलू बाजार में ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे और ऊंची वैश्विक कीमतों के कारण अत्यधिक निर्यात को रोका जा सके।

पश्चिम एशिया में तनाव के चलते हाल के हफ्तों में कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 50 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है, जिससे तेल कंपनियों पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव पड़ा है। सरकार ने खुदरा कीमतों में अचानक वृद्धि करने के बजाय करों में समायोजन के माध्यम से इस प्रभाव का कुछ हिस्सा स्वयं वहन करने का निर्णय लिया है।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि देश में पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है। भारत के पास पर्याप्त कच्चे तेल का भंडार है और एलपीजी, एलएनजी तथा अन्य परिष्कृत ईंधनों की आपूर्ति भी संतोषजनक स्तर पर बनी हुई है, भले ही वैश्विक बाजार में अस्थिरता जारी हो।

Vishwajeet

मेरा नाम विश्वजीत कुमार है। मैं वर्तमान में झारखंड वार्ता (समाचार संस्था) में कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हूं। समाचार लेखन, फीचर स्टोरी और डिजिटल कंटेंट तैयार करने में मेरी विशेष रुचि है। सटीक, सरल और प्रभावी भाषा में जानकारी प्रस्तुत करना मेरी ताकत है। समाज, राजनीति, खेल और समसामयिक मुद्दों पर लेखन मेरा पसंदीदा क्षेत्र है। मैं हमेशा तथ्यों पर आधारित और पाठकों के लिए उपयोगी सामग्री प्रस्तुत करने का प्रयास करता हूं। नए विषयों को सीखना और उन्हें रचनात्मक अंदाज में पेश करना मेरी कार्यशैली है। पत्रकारिता के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की कोशिश करता हूं।

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