जमशेदपुर: टिनप्लेट गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी का चुनाव निष्पक्ष होगा इस पर सवालिया निशान शुरू से ही लग रहे हैं और इसके खिलाफ प्रधान पद के प्रत्याशी गुरदयाल सिंह मन्नावल टीम पहले से ही मोर्चा खोले हुए हैं और पुरानी मौजूदा कमेटी को भंग कर चुनाव कराने और निष्पक्ष संयोजक की मांग कर रहे हैं इसके लिए उन्होंने तकरीबन अब तक चार बार केंद्रीय गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान भगवान सिंह को ज्ञापन सौंपा। चौथी बार तो आज सीजीपीसी को फिर
टिनप्लेट गुरुद्वारा कमिटी में सुरजीत सिंह खुशीपुर की मनमानी के खिलाफ सुरजीत के विरोध में खड़े गुरदयाल सिंह मनोवाल की टीम से चारो प्रत्याशी, गुरदयाल सिंह, परमजीत सिंह, कुंदन सिंह, कुलवंत सिंह सेंट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी कार्यालय पहुंचे। जहां प्रधान भगवान सिंह की अनुपस्थिति में सीजीपीसी के पदधिकारी गुरनाम को ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन सौंपने वालों में ये थे शामिल
इस मौके पर गुरदयाल सिंह मन्नावाल, परमजीत सिंह, कुंदन सिंह,कुलवंत सिंह कमलजीत सिंह,.कुलदीप सिंह, हरजिंदर सिंह मतेवाल, सतपाल सिंह मतेवाल, दलविंदर सिंह मतेवाल, हरदेव सिंह ,राजेंदर सिंह ,कश्मीर सिंह,जसवंत सिंह, गुरदीप सिंह नैनोकोट, प्रताप सिंह, अमरीक सिंह, नरेंद्र सिंह मौजूद थे।
गुरदयाल सिंह मन्नावाल ने ज्ञापन में कहा है कि टिनप्लेट गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान पद का प्रत्याशी होने के नाते, वर्तमान चुनाव प्रक्रिया में व्याप्त विसंगतियों और लोकतांत्रिक मूल्यों के हनन की ओर आपका ध्यान आकृष्ट करना चाहता हूं. वर्तमान स्थिति सिख पंथ की मर्यादा और चुनावी निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करती है.

1)संवैधानिक मर्यादा का उल्लंघनः वर्तमान प्रधान सुरजीत सिंह खुशीपुर, स्कूल सचिव गुरुचरण सिंह बिल्ला, चेयरमैन बलवंत सिंह शेरो और सिख नौजवान सभा के प्रधान सरताज सिंह ताजे, ये सभी पदाधिकारी वर्तमान कमेटी के रसूखदार पदों पर बने हुए हैं और स्वयं ही उम्मीदवार भी हैं. एक ही पक्ष का चुनाव आयोजक और उम्मीदवार दोनों होना चुनावी पारदर्शिता की धज्जियां उड़ाने जैसा है.
2)नैतिकता एवं पद का दुरुपयोगः नियमानुसार, नामांकन दाखिल करने के बाद उम्मीदवार को चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने वाले पद से मुक्त हो जाना चाहिए. जब 31 मार्च 2026 तक नामांकन हो चुके हैं, तो सुरजीत सिंह खुशीपुर ने अब तक प्रधान पद से इस्तीफा क्यों नहीं दिया? क्या उनके पद पर बने रहने से मतदाता सूची और स्क्रूटनी की प्रक्रिया प्रभावित नहीं होगी?
3)स्क्रूटनी एवं संयोजक की मांगः धार्मिक स्क्रूटनी से पहले एक स्वतंत्र चुनाव संयोजक की नियुक्ति अनिवार्य है, जो अपनी रिपोर्ट सीधे अकाली दल के संयोजक को सौंपे. बिना किसी तटस्थ मध्यस्थ के, वर्तमान कमेटी का नियंत्रण चुनाव को एकतरफा बना सकता है.
4)सीजीपीसी की भूमिकाः सीजीपीसी शहर की सभी गुरुद्वारा कमेटियों की सर्वोच्च संस्था है. यह खेद का विषय है कि सीजीपीसी से जुड़े कुछ लोग अभी से एक पक्ष विशेष के लिए प्रचार कर रहे हैं. संस्था की निष्पक्षता न केवल होनी चाहिए, बल्कि समाज को दिखनी भी चाहिए.

एक पंथिक अभिभावक के नाते आपसे निवेदन है कि टिनप्लेट गुरुद्वारा चुनाव में हस्तक्षेप कर निष्पक्ष वातावरण तैयार करें. यदि वर्तमान पदाधिकारी इस्तीफा नहीं देते और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं लाई जाती है, तो मुझे विवश होकर जिला प्रशासन और न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ेगा. आशा है कि आप पंथिक और नैतिक जवाबदेही निभाते हुए तुरंत उचित निर्णय लेंगे.









