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जमशेदपुर:सालगाझुरी रेलवे स्टेशन पर सभी लोकल ट्रेनों का ठहराव पुनः प्रारंभ करने की मांग

On: May 27, 2026 9:33 PM
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जमशेदपुर:संयुक्त ग्राम समन्वय समिति, जमशेदपुर के अध्यक्ष राम सिंह मुंडा ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि चक्रधरपुर रेल मंडल के अंतर्गत टाटानगर–कोलकाता रेल मार्ग पर स्थित सालगाझुरी रेलवे स्टेशन क्षेत्र के हजारों ग्रामीणों, मजदूरों, विद्यार्थियों एवं दैनिक यात्रियों के आवागमन का एक महत्वपूर्ण केंद्र रहा है।
उन्होंने बताया कि जब से टाटानगर–कोलकाता रेल मार्ग का निर्माण हुआ, तब से इस स्टेशन पर विभिन्न लोकल ट्रेनों का नियमित ठहराव होता रहा है। किंतु अक्टूबर 2025 में थर्ड लाइन का निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद चक्रधरपुर रेल मंडल के तत्कालीन डीआरएम द्वारा सालगाझुरी रेलवे स्टेशन पर सभी लोकल ट्रेनों का ठहराव बंद कर दिया गया, जिससे स्थानीय नागरिकों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
श्री मुंडा ने कहा कि इस जनहित के महत्वपूर्ण मुद्दे को लेकर संयुक्त ग्राम समन्वय समिति के नेतृत्व में क्षेत्रीय प्रबंधक, टाटानगर, मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम), चक्रधरपुर, जोनल रेलवे प्रबंधक, कोलकाता, रेल मंत्रालय, भारत सरकार तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, नई दिल्ली को कई बार ज्ञापन सौंपकर समस्या से अवगत कराया गया। इसके बावजूद आज तक रेलवे प्रशासन द्वारा कोई सकारात्मक पहल नहीं की गई है।
उन्होंने आगे कहा कि स्थानीय सांसद विद्युत वरण महतो तथा विधायक पूर्णिमा साहू ने भी रेलवे प्रशासन को पत्र लिखकर सालगाझुरी रेलवे स्टेशन पर पुनः सभी लोकल ट्रेनों का ठहराव सुनिश्चित करने की मांग की है, लेकिन उनकी मांगों को भी गंभीरता से नहीं लिया गया। इसका सीधा नुकसान क्षेत्र के आम नागरिकों और यात्रियों को उठाना पड़ रहा है।
उल्लेखनीय है कि सालगाझुरी रेलवे स्टेशन पर लगभग 4.5 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक स्टेशन भवन, टिकट बुकिंग काउंटर एवं अन्य यात्री सुविधाओं का निर्माण किया गया है, जिसका ऑनलाइन उद्घाटन देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा किया गया था। इसके बावजूद स्टेशन पर लोकल ट्रेनों का ठहराव बंद होना जनहित और विकास की भावना के विपरीत प्रतीत होता है।
संयुक्त ग्राम समन्वय समिति, जमशेदपुर की मांग है कि यात्रियों की सुविधा एवं क्षेत्रीय जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए सालगाझुरी रेलवे स्टेशन पर सभी लोकल ट्रेनों का ठहराव अविलंब पुनः प्रारंभ किया जाए। यदि शीघ्र उचित कार्रवाई नहीं की गई तो स्थानीय नागरिकों एवं ग्रामीणों का बढ़ता आक्रोश जनआंदोलन का रूप ले सकता है। ऐसी स्थिति में धरना-प्रदर्शन, जनसभा तथा रेल चक्का जाम जैसे लोकतांत्रिक आंदोलनात्मक कार्यक्रम चलाने के लिए स्थानीय जनता बाध्य हो सकती है, जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी रेलवे प्रशासन की होगी।

Satish Sinha

मैं सतीश सिन्हा, बीते 38 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़ा हूँ। इस दौरान मैंने कई अखबारों और समाचार चैनलों में रिपोर्टर के रूप में कार्य करते हुए न केवल खबरों को पाठकों और दर्शकों तक पहुँचाने का कार्य किया, बल्कि समाज की समस्याओं, आम जनता की आवाज़ और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की वास्तविक तस्वीर को इमानदारी से उजागर करने का प्रयास भी निरंतर करता रहा हूँ। पिछले तकरीबन 6 वर्षों से मैं 'झारखंड वार्ता' से जुड़ा हूँ और क्षेत्रीय से जिले की हर छोटी-बड़ी घटनाओं की सटीक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग के माध्यम से पत्रकारिता को नई ऊँचाइयों तक ले जाने का प्रयास कर रहा हूँ।

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