सरकारी नौकरी मिल गई, फिर भी आपका राशन कार्ड बंद तो नहीं हुआ? अब ये पड़ सकता है महंगा, जानिए कैसे, झारखण्ड हिंदी समाचार
सरकारी नौकरी मिलने के बाद भी राशन कार्ड सरेंडर नहीं करने वालों पर रांची में कार्रवाई शुरू हो गयी है. रेलवे कर्मचारियों और सरकारी शिक्षकों समेत कई अयोग्य लाभुकों को नोटिस जारी कर राशन राशि वसूलने की प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है.
राशन कार्ड नियम: अगर आपकी सरकारी नौकरी लग गई है और आपने अभी तक अपना राशन कार्ड सरेंडर नहीं किया है तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। झारखंड की राजधानी रांची में जिला प्रशासन ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत अयोग्य राशन कार्ड धारकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है. ऐसे लोगों को नोटिस जारी कर वर्षों से लिये गये सरकारी खाद्यान्न की राशि वापस जमा करने का निर्देश दिया गया है. राशि जमा नहीं करने पर कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है.
रांची जिला प्रशासन की जांच में कई चौंकाने वाले मामले सामने आये हैं. अधिकारियों के मुताबिक, सालों से सरकारी नौकरी कर रहे कुछ लोग भी गरीबों के लिए बनी राशन योजना का लाभ उठाते रहे। इनमें एक रेलवे कर्मचारी भी शामिल है, जो पिछले नौ साल से सरकारी सेवा में है, लेकिन फिर भी अंत्योदय राशन कार्ड पर अनाज लेता रहा. नोटिस मिलने के बाद उन्होंने दलील दी कि उन्हें नहीं पता था कि सरकारी नौकरी मिलने के बाद राशन कार्ड सरेंडर करना पड़ता है.
इसी तरह एक सरकारी शिक्षक भी जांच के घेरे में आ गया है। वह पिछले 10 वर्षों से सरकारी सेवा में हैं, लेकिन उन्हें नियमित रूप से सरकारी राशन मिलता रहा। उन्होंने प्रशासन को भी यही सफाई दी कि नियमों की जानकारी नहीं होने के कारण राशन कार्ड बंद नहीं किया गया है.
प्रशासन का कहना है कि आर्थिक स्थिति बदलने या सरकारी नौकरी मिलने पर राशन कार्ड सरेंडर करना लाभार्थी की जिम्मेदारी है. यदि वह ऐसा नहीं करता है, तो वह राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत लाभ का पात्र नहीं है।
अयोग्य लाभार्थियों की पहचान करने के लिए, जिला प्रशासन ने KPI (मुख्य प्रदर्शन संकेतक) आधारित सत्यापन किया। इसमें न केवल राशन कार्ड का सत्यापन किया गया, बल्कि भूमि स्वामित्व, आय, वाहन, जीएसटी और अन्य आर्थिक गतिविधियों से संबंधित डेटा का भी मिलान किया गया। जांच में बड़ी संख्या में ऐसे लोगों का खुलासा हुआ जो आर्थिक रूप से सक्षम होने के बावजूद वर्षों से गरीबों के हिस्से का सरकारी अनाज ले रहे थे।
प्रशासन ने ऐसे लोगों को नोटिस जारी कर सरकारी अनाज की कीमत जमा करने का निर्देश दिया है. कई मामलों में तो वसूली की रकम हजारों रुपये से लेकर तीन लाख रुपये तक पहुंच गई है. अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने या तय समय में राशि जमा नहीं करने पर वसूली के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई और एफआईआर भी दर्ज करायी जा सकती है.
नोटिस मिलने के बाद बड़ी संख्या में लोग रांची समाहरणालय और जिला आपूर्ति कार्यालय पहुंच रहे हैं. कोई कह रहा है कि उन्हें नियमों की जानकारी नहीं है तो कोई कार्रवाई से बचने के लिए अलग-अलग तर्क दे रहा है. हालांकि, प्रशासन ने साफ कर दिया है कि अयोग्य लाभार्थियों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी.
