July 26, 2026

प्रस्ताव पारित, काम रुका! लंबित विकास कार्यों से नाराज पार्षदों ने धनबाद नगर निगम बोर्ड बैठक का बहिष्कार किया

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धनबाद नगर निगम बोर्ड की बैठक

धनबाद नगर निगम बोर्ड की बैठक (ईटीवी भारत)

धनबाद: इस बार नगर निगम की बोर्ड बैठक विकास के मुद्दों से ज्यादा पार्षदों के विरोध को लेकर चर्चा में रही. निगम प्रशासन की कार्यशैली और लंबित विकास योजनाओं से नाराज पार्षदों ने बैठक में अपना असंतोष जताया और अंततः सामूहिक रूप से बैठक का बहिष्कार कर दिया. इसके चलते कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा अधूरी रह गयी.

जनसमस्याओं को लेकर निर्वाचित वार्ड पार्षदों का कहना है कि बोर्ड की बैठकों में विकास से जुड़े कई प्रस्तावों को मंजूरी तो मिल जाती है, लेकिन धरातल पर उसका कार्यान्वयन नहीं होता है. नतीजतन योजनाएं फाइलों तक ही सीमित रह जाती हैं.

डिप्टी मेयर अरुण चौहान ने कहा कि पिछली स्थायी समिति की बैठक में जो मुद्दे तय किये गये थे, उस पर प्रगति रिपोर्ट बोर्ड की बैठक में संतोषजनक नहीं पायी गयी. इसके विरोध में अधिकांश पार्षदों ने बैठक से वॉकआउट करने का निर्णय लिया.

धनबाद नगर निगम बोर्ड बैठक का पार्षदों ने किया बहिष्कार (ईटीवी भारत)

बाबूडीह स्थित विवाह भवन में आयोजित बोर्ड बैठक में मेयर संजीव सिंह, विधायक राज सिन्हा, डिप्टी मेयर अरुण चौहान, सभी वार्ड पार्षद और निगम अधिकारी मौजूद थे. बैठक के दौरान विधायक राज सिन्हा ने एसीबी जांच के कारण वर्षों से लंबित जर्जर सड़कों के निर्माण का मुद्दा प्रमुखता से उठाया.

उन्होंने कहा कि नगर आयुक्त फंड और कर्मचारियों की कमी का हवाला दे रहे हैं, जबकि जनता विकास कार्यों का इंतजार कर रही है. विधायक ने निगम प्रशासन को और अधिक सक्रिय होने तथा सरकार से पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर बल दिया.

बैठक के दौरान कई पार्षदों ने निगम प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाया और विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में लगातार हो रही देरी पर नाराजगी जतायी. मेयर संजीव सिंह ने कहा कि पार्षद जनता की उम्मीदों का प्रतिनिधित्व करते हैं, लेकिन विकास कार्य समय पर नहीं होने से उनमें असंतोष बढ़ा है. उन्होंने माना कि इसी कारण पार्षदों ने बैठक का बहिष्कार किया.

नगर निगम बोर्ड की बैठक में पार्षदों के सामूहिक बहिष्कार से यह संकेत मिल गया है कि जन प्रतिनिधियों और निगम प्रशासन के बीच समन्वय की कमी अब गंभीर रूप ले चुकी है. अब सबकी निगाहें इस पर होंगी कि प्रशासन लंबित योजनाओं को कितनी तेजी से आगे बढ़ाता है और जन प्रतिनिधियों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित कर विकास कार्यों को गति देने में कितना सफल होता है.

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