
नई दिल्ली: सहारा समूह की सहकारी समितियों में जमा रकम की वापसी का इंतजार कर रहे लाखों निवेशकों के लिए बड़ी राहत की खबर है। केंद्र सरकार ने CRCS-सहारा रिफंड पोर्टल को दोबारा सक्रिय कर दिया है। पोर्टल के फिर से शुरू होने के बाद करीब 20 लाख लंबित दावों की जांच, सत्यापन और निपटारे की प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है।
सहकारिता मंत्रालय के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, अब तक करीब 42 लाख जमाकर्ताओं को 9,267 करोड़ रुपये की राशि वापस की जा चुकी है। सहारा की सहकारी समितियों में फंसे पैसे की वापसी की प्रक्रिया जुलाई 2023 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शुरू हुई थी। इसका उद्देश्य वैध दावों का सत्यापन कर पात्र जमाकर्ताओं को उनकी जमा राशि लौटाना है।
रिफंड प्रक्रिया के दौरान कुछ समय से तकनीकी और प्रशासनिक अड़चनों की वजह से दावों के सत्यापन और निपटारे की रफ्तार प्रभावित हुई थी। समितियों के आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर, सॉफ्टवेयर लाइसेंस, कंप्यूटर सिस्टम के रखरखाव और प्रशिक्षित कर्मचारियों की उपलब्धता से जुड़ी समस्याओं का असर रिकॉर्ड की जांच पर पड़ा।
इसके अलावा, नवंबर 2025 में सामने आए विवादों के बाद कुछ समितियों के परिसरों को सील किए जाने से रिकॉर्ड के मिलान और अन्य प्रशासनिक कार्यों में भी बाधा आई। इसके बाद सहकारिता मंत्रालय ने मामले में हस्तक्षेप कर जरूरी व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने की दिशा में कदम उठाए। अब पोर्टल को दोबारा सक्रिय किए जाने से लंबित दावों के निपटारे की प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है।
रिफंड की व्यवस्था सहारा समूह की चार सहकारी समितियों के पात्र जमाकर्ताओं के लिए लागू है। इनमें सहारा क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड, सहारायन यूनिवर्सल मल्टीपर्पज सोसाइटी लिमिटेड, हमारा इंडिया क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड और स्टार्स मल्टीपर्पज कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड शामिल हैं।
रिफंड के लिए दावा और सत्यापन की प्रक्रिया ऑनलाइन उपलब्ध है। पोर्टल पर आवेदन करने के बाद निवेशक द्वारा दी गई जानकारी और दस्तावेजों का संबंधित समिति के रिकॉर्ड से मिलान किया जाता है।
सत्यापन में पात्र पाए जाने वाले निवेशकों को रिफंड की राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से उनके आधार से जुड़े बैंक खाते में भेजी जाएगी।
जिन निवेशकों के पहले किए गए आवेदन में तकनीकी समस्या, दस्तावेजों की कमी या डेटा मिसमैच के कारण आपत्ति आई थी, वे आवश्यक सुधार के बाद री-सबमिशन प्रक्रिया के जरिए अपना दावा दोबारा जमा कर सकते हैं। इससे ऐसे आवेदकों को भी अपने दावे को दुरुस्त कर आगे बढ़ाने का मौका मिलेगा।
रिफंड प्रक्रिया के बीच निवेशकों को फर्जी वेबसाइटों, बिचौलियों और अनधिकृत एजेंटों से सावधान रहने की जरूरत है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि निवेशक रिफंड से संबंधित प्रक्रिया के लिए केवल आधिकारिक CRCS-सहारा रिफंड पोर्टल https://mocrefund.crcs.gov.in का इस्तेमाल करें।
निवेशकों को सलाह दी गई है कि वे अपना बैंक विवरण, OTP, पासवर्ड या अन्य संवेदनशील जानकारी किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा न करें। रिफंड के नाम पर किसी एजेंट को पैसे देने से भी बचें।







