
ताशकंद: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन दिनों दो देशों के दौरे पर हैं। अपने विदेश दौरे के पहले पड़ाव के तौर पर वे उज्बेकिस्तान पहुंचे हैं। ताशकंद पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री ने उज्बेकिस्तान योग फेडरेशन की ओर से आयोजित विशेष योग सत्र में हिस्सा लिया। इस दौरान पीएम मोदी स्थानीय लोगों के साथ योग करते और उन्हें योगाभ्यास कराते नजर आए। योग सत्र के दौरान उन्होंने वहां मौजूद प्रतिभागियों से बातचीत भी की।

योग कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया। प्रधानमंत्री मोदी ने विभिन्न योगासन और अभ्यास किए। कार्यक्रम के दौरान भारत की योग परंपरा और इसके स्वास्थ्य लाभों को लेकर भी सकारात्मक माहौल देखने को मिला। योग सत्र समाप्त होने के बाद पीएम मोदी ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों के साथ सेल्फी वीडियो रिकॉर्ड किया।
प्रधानमंत्री मोदी का यह योग कार्यक्रम केवल स्वास्थ्य और फिटनेस तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके जरिए भारत और उज़्बेकिस्तान के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव का संदेश भी दिया गया। योग भारत की प्राचीन परंपरा है, जो दुनियाभर में लोकप्रिय हो चुकी है। ताशकंद में स्थानीय लोगों के साथ प्रधानमंत्री का योग करना दोनों देशों के बीच लोगों से लोगों के संपर्क को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के तौर पर देखा जा रहा है।

योग कार्यक्रम के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उज़्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता करेंगे। इस दौरान दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के मुद्दे पर चर्चा होने की उम्मीद है। बैठक में व्यापार और निवेश के साथ-साथ रक्षा, डिजिटल कनेक्टिविटी, ऊर्जा, शिक्षा और आपसी सहयोग से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर बातचीत हो सकती है। दोनों पक्ष द्विपक्षीय संबंधों को नई गति देने और सहयोग के नए क्षेत्रों की संभावनाओं पर भी विचार कर सकते हैं।
उज़्बेकिस्तान प्रधानमंत्री मोदी के मौजूदा दो देशों के दौरे का पहला पड़ाव है। ताशकंद के बाद वे किर्गिस्तान के लिए रवाना होंगे। वहां प्रधानमंत्री 31 अगस्त से 1 सितंबर तक आयोजित होने वाले 26वें शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे।
किर्गिस्तान में SCO शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी विभिन्न देशों के नेताओं के साथ क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा कर सकते हैं। भारत की सुरक्षा, आर्थिक सहयोग, कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय साझेदारी से जुड़े मुद्दे भी इस दौरान अहम रहेंगे।







