
तिरुनेलवेली:तमिलनाडु के तिरुनेलवेली से सामने आए नाबालिगों के यौन शोषण के एक गंभीर मामले में विशेष POCSO अदालत ने बेहद सख्त फैसला सुनाया है। अदालत ने ईसाई प्रार्थना सभा चलाने वाले 47 वर्षीय पादरी एस. अब्राहम को चार नाबालिग लड़कियों के यौन उत्पीड़न का दोषी करार देते हुए चार अलग-अलग मामलों में मौत की सजा सुनाई है। अदालत ने प्रत्येक पीड़िता के लिए 10 लाख रुपये मुआवजा देने का भी निर्देश दिया है।
करीब दो साल तक चलता रहा मामला
अभियोजन पक्ष के मुताबिक, यह मामला करीब दो साल तक चलता रहा। आरोप है कि वर्ष 2020 से 2022 के बीच अब्राहम ने बच्चियों को धार्मिक शिक्षा, बाइबिल और संगीत की कक्षाओं के बहाने अपने संपर्क में रखा और उनका यौन शोषण किया।
पुलिस के अनुसार, आरोपी कुछ बच्चियों को उनके इलाके के सुनसान स्थानों पर भी ले जाता था। मामले की गंभीरता तब सामने आई, जब वर्ष 2022 में परिवार की एक 8 वर्षीय बच्ची ने असहजता और दर्द की शिकायत की। इसके बाद उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकीय जांच के दौरान उसके साथ यौन अपराध होने की जानकारी सामने आई।
एक बच्ची के सामने आने के बाद खुला पूरा मामला
पहली बच्ची के मामले का पता चलने के बाद परिवार की तीन अन्य नाबालिग लड़कियों ने भी अपनी माताओं के सामने आरोपी के खिलाफ शिकायत की। पुलिस के अनुसार, ये बच्चियां एक ही विस्तारित परिवार से संबंधित थीं।
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी कथित तौर पर बच्चियों को डराता-धमकाता था, जिसके कारण वे लंबे समय तक घटना के बारे में किसी को नहीं बता सकीं। पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद अब्राहम को वर्ष 2022 में POCSO कानून के तहत गिरफ्तार किया था।
कोर्ट में मेडिकल और गवाहों के बयान बने अहम आधार
मामले की सुनवाई के दौरान पीड़ित बच्चियों, उनके माता-पिता और अन्य गवाहों के बयान दर्ज किए गए। अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने मेडिकल साक्ष्यों समेत विभिन्न सबूत पेश किए।
विशेष लोक अभियोजक पी. उषा के अनुसार, जांच के दौरान जुटाए गए चिकित्सकीय साक्ष्य अभियोजन के लिए महत्वपूर्ण रहे। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर अब्राहम को चारों मामलों में दोषी माना।
‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ मानकर सुनाई गई सजा
विशेष POCSO अदालत के न्यायाधीश के. सुरेश कुमार ने मामले को गंभीर प्रकृति का मानते हुए आरोपी को चार अलग-अलग मामलों में मृत्युदंड सुनाया। रिपोर्ट के मुताबिक अदालत ने अपराध को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ श्रेणी में माना। इसके साथ ही कुल 52 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।
अदालत ने तमिलनाडु सरकार को चारों पीड़िताओं के लिए 10-10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का भी आदेश दिया है। इस तरह पीड़िताओं के लिए कुल मुआवजा 40 लाख रुपये निर्धारित किया गया है।
POCSO मामलों में पुलिस की ‘केस ऑफिसर’ व्यवस्था से तेज हुई कार्रवाई
इस मामले की जांच और सुनवाई को आगे बढ़ाने में तिरुनेलवेली पुलिस की नई ‘केस ऑफिसर’ व्यवस्था की भी भूमिका बताई गई है। वर्ष 2026 में लंबित POCSO मामलों की निगरानी और त्वरित कार्रवाई के लिए विशेष टीमों को जिम्मेदारी दी गई थी।
अब्राहम से जुड़े मामले की निगरानी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के. शणमुगम के नेतृत्व वाली टीम ने की। पुलिस के अनुसार, मामले की प्रगति की नियमित समीक्षा की जाती रही और केस को दोषसिद्धि तक पहुंचाने में टीम ने लगातार काम किया।
धार्मिक शिक्षा की आड़ में अपराध का आरोप
पुलिस की जांच के अनुसार, आरोपी बच्चियों को बाइबिल, संगीत और नैतिक शिक्षा देने के नाम पर अपने संपर्क में लाता था। अभियोजन पक्ष का आरोप था कि इसी भरोसे का फायदा उठाकर उसने बच्चियों के साथ अपराध किया।
इस मामले ने बच्चों के साथ जुड़े संस्थानों और धार्मिक गतिविधियों में उनकी सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, अदालत का फैसला आरोपी के खिलाफ पेश किए गए साक्ष्यों और मामले की न्यायिक सुनवाई पर आधारित है।
क्या-क्या हुआ फैसला?
आरोपी: एस. अब्राहम, 47 वर्ष
मामला: चार नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण से जुड़ा POCSO केस
अदालत: तिरुनेलवेली विशेष POCSO अदालत
सजा: चार मामलों में अलग-अलग मृत्युदंड
जुर्माना: कुल ₹52,000
मुआवजा: प्रत्येक पीड़िता को ₹10 लाख
कुल मुआवजा: ₹40 लाख
घटनाकाल: 2020 से 2022 के बीच
गिरफ्तारी: वर्ष 2022
मुख्य साक्ष्य: मेडिकल साक्ष्य, पीड़िताओं एवं अन्य गवाहों के बयान
यह फैसला नाबालिगों के खिलाफ यौन अपराधों के मामलों में अदालत द्वारा दिखाई गई सख्ती का एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।





