
रांची: झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की संयुक्त स्नातक स्तरीय प्रतियोगिता परीक्षा (JSSC-CGL) में कथित अनियमितता और पेपर लीक मामले की जांच कर रही अपराध अनुसंधान विभाग (CID) की टीम ने रविवार को एक और सफल अभ्यर्थी को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार अभ्यर्थी की पहचान समीर कुमार के रूप में हुई है। वह गिरिडीह जिले के बेंगाबाद थाना क्षेत्र का रहने वाला बताया गया है।
समीर कुमार की गिरफ्तारी के साथ ही इस मामले में सीआईडी के हाथों गिरफ्तार किए जा चुके सफल अभ्यर्थियों की संख्या सात हो गई है। जांच एजेंसी का कहना है कि मामले की जांच के दौरान सफल अभ्यर्थियों की भूमिका को लेकर महत्वपूर्ण साक्ष्य सामने आए हैं।
समीर कुमार से पहले सीआईडी ने सफल अभ्यर्थियों दीपक कुमार, उमेश कुमार राय, विजय कुमार तिवारी, आनंद कुमार सिंह, अक्षय तिवारी और सुषमा कुमारी को गिरफ्तार किया था। जांच का दायरा लगातार बढ़ने के साथ सीआईडी अब कथित पेपर लीक से जुड़े पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
सीआईडी के अनुसार, मामले में गिरफ्तार अभ्यर्थियों पर आरोप है कि उन्होंने कथित तौर पर दलालों और एजेंटों के माध्यम से लीक प्रश्नपत्र हासिल किया था। इसके बाद प्रश्नों के उत्तर तैयार कर उन्हें याद किया गया और परीक्षा में उसका इस्तेमाल कर सफलता हासिल की गई।
इस मामले की जांच के दौरान अक्षय तिवारी और सुषमा कुमारी का नाम भी सामने आया है। अक्षय तिवारी, जेपीएससी की परीक्षा संचालित कराने वाली एजेंसी टीडीपीएल के मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी का भाई है, जबकि सुषमा कुमारी अभय तिवारी की पत्नी हैं। अभय तिवारी की गिरफ्तारी जेपीएससी मेधा घोटाला मामले में हुई है। जांच एजेंसियों की ओर से उसे जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं से जुड़े नेटवर्क का प्रमुख कड़ी बताया गया है।
सीआईडी की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, JSSC-CGL प्रतियोगिता परीक्षा से संबंधित CID थाना कांड संख्या 01/2025 में समीर कुमार की गिरफ्तारी की गई है। एजेंसी के अनुसार, मामले की जांच के दौरान इन सभी सफल अभ्यर्थियों की भूमिका को लेकर पर्याप्त साक्ष्य प्राप्त हुए हैं। अब जांच एजेंसी गिरफ्तार किए गए सभी अभ्यर्थियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ की तैयारी में है। पूछताछ के दौरान कथित प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने वाले दलालों, एजेंटों और अन्य संबंधित लोगों के बारे में जानकारी जुटाने के साथ यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि प्रश्नपत्र लीक होने के बाद उसे किन-किन लोगों तक पहुंचाया गया।




