
पलामू: जिले में भ्रष्टाचार से जुड़े करीब 12 साल पुराने मामले में पलामू जिला व्यवहार न्यायालय परिसर स्थित भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की विशेष अदालत ने अहम फैसला सुनाया है। विश्रामपुर के तत्कालीन प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी (BSO) रमेशचंद्र प्रसाद को रिश्वतखोरी के मामले में दोषी करार देते हुए अदालत ने 5 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने उन पर 25 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। जुर्माने की राशि जमा नहीं करने पर उन्हें अतिरिक्त 3 माह का सश्रम कारावास भुगतना होगा।
यह फैसला ACB के विशेष न्यायाधीश राजकुमार मिश्रा की अदालत ने सुनाया। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत तथ्यों के आधार पर आरोपी को भ्रष्टाचार से जुड़े आरोपों में दोषी माना।
अदालत ने रमेशचंद्र प्रसाद को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत भी दोषी पाया। इस धारा के तहत उन्हें 4 वर्ष के सश्रम कारावास और 20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई है। अर्थदंड नहीं देने की स्थिति में अतिरिक्त 3 माह का सश्रम कारावास भुगतना होगा।
हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि दोनों धाराओं के तहत सुनाई गई सजाएं साथ-साथ चलेंगी। यानी अलग-अलग धाराओं में सजा सुनाए जाने के बावजूद आरोपी को कुल मिलाकर अधिकतम 5 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा भुगतनी होगी।
पूरा मामला वर्ष 2014 का है। विश्रामपुर निवासी मोनीर आलम ने तत्कालीन निगरानी विभाग, जो वर्तमान में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) है, के समक्ष तत्कालीन प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी रमेशचंद्र प्रसाद के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायत में आरोप लगाया गया था कि खाद्यान्न के उठाव के एवज में तत्कालीन BSO द्वारा प्रति क्विंटल 10 रुपये की दर से अवैध राशि की मांग की जा रही थी। शिकायत मिलने के बाद निगरानी विभाग ने आरोपों की सत्यता की जांच के लिए शिकायत का सत्यापन कराया। सत्यापन के दौरान आरोपों की पुष्टि होने के बाद आरोपी को रिश्वत लेते पकड़ने की कार्रवाई की गई।
ACB ने शिकायत की पुष्टि के बाद आरोपी अधिकारी को पकड़ने के लिए जाल बिछाया। 17 अक्टूबर 2014 को शिकायतकर्ता से जब 3 हजार रुपये रिश्वत ली जा रही थी, उसी दौरान निगरानी विभाग की टीम ने कार्रवाई करते हुए रमेशचंद्र प्रसाद को स्वतंत्र गवाहों की मौजूदगी में रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तारी के बाद इस मामले में तत्कालीन निगरानी थाना, रांची में प्राथमिकी दर्ज की गई। इसके बाद मामले की विस्तृत जांच शुरू हुई। जांच पूरी होने पर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपी के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया गया।
रिश्वतखोरी का यह मामला करीब 12 वर्षों तक न्यायिक प्रक्रिया से गुजरा। लंबी सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से मामले से जुड़े साक्ष्य और गवाह अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए गए। इन तमाम तथ्यों पर सुनवाई पूरी होने के बाद विशेष अदालत ने तत्कालीन BSO रमेशचंद्र प्रसाद को दोषी करार दिया और अब उन्हें पांच वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।






