
रांची: 14वीं JPSC परीक्षा में कथित गड़बड़ी और पेपर लीक मामले में जेल में बंद अभय कुमार तिवारी और उमेश कुमार को अदालत से राहत नहीं मिली है। बुधवार को अपर न्यायायुक्त योगेश कुमार की अदालत में दोनों की जमानत याचिका पर सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद कोर्ट ने दोनों की जमानत याचिका खारिज कर दी। इससे पहले मंगलवार को अदालत ने मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
इस मामले की जांच कर रही CID के अनुसार, अभय कुमार तिवारी की भूमिका जांच के दौरान महत्वपूर्ण और संदिग्ध पाई गई है। अभय तिवारी TDPL में मार्केटिंग मैनेजर के पद पर काम कर चुका है। जांच एजेंसी का आरोप है कि उसने अपने सगे-संबंधियों के अलावा कई अभ्यर्थियों को नौकरी दिलाने का झांसा देकर उनसे कथित तौर पर बड़ी रकम वसूली।
14वीं JPSC परीक्षा में कथित अनियमितता को लेकर CID ने कांड संख्या 16/2026 दर्ज कर जांच शुरू की थी। मामले में जांच एजेंसी अब तक 20 से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। CID की टीम परीक्षा में कथित धांधली से जुड़े पूरे नेटवर्क और पैसों के लेनदेन की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।
जांच की आंच JPSC के पूर्व चेयरमैन एल. ख्यांग्ते तक भी पहुंच चुकी है। CID ने उन्हें गिरफ्तार कर रिमांड पर लेकर पूछताछ की थी। इसके बाद से वे न्यायिक हिरासत में हैं। जांच के दौरान अभय तिवारी के कथित स्वीकारोक्ति बयान में पूर्व चेयरमैन की भूमिका का जिक्र सामने आने की बात भी एजेंसी की ओर से कही गई है। हालांकि, मामले में अंतिम रूप से दोष तय होना न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है।
CID की जांच के मुताबिक, उमेश कुमार समेत गिरफ्तार किए गए कुछ आरोपी कथित तौर पर एजेंट के रूप में काम करते थे। ये लोग अभ्यर्थियों से संपर्क कर उनके दस्तावेज हासिल करते, उनसे रकम लेते और फिर अपने नेटवर्क के जरिए परीक्षा संचालित करने वाली एजेंसी मेसर्स टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) तक जानकारी पहुंचाते थे।
जांच एजेंसी का दावा है कि इन एजेंटों के TDPL के निदेशक रामवीर सिंह और मार्केटिंग मैनेजर अभय कुमार तिवारी से संपर्क थे। TDPL के पदाधिकारियों से रिमांड के दौरान हुई पूछताछ में ही CID को कथित तौर पर इन एजेंटों के नेटवर्क की जानकारी मिली।
इसके बाद CID ने इंटर-स्टेट लिंकेज की जांच करते हुए उमेश कुमार समेत अन्य आरोपियों को रांची से गिरफ्तार किया। एजेंसी के मुताबिक, आरोपियों के पास से बड़ी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य बरामद किए गए हैं।
CID का दावा है कि इन डिजिटल साक्ष्यों में अभ्यर्थियों की परीक्षा में कथित सेटिंग कराने और परीक्षा से जुड़ी गतिविधियों में उनकी भूमिका से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी मौजूद है। जांच एजेंसी अब इन साक्ष्यों के आधार पर पूरे नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।






