
राम, सीता, लक्ष्मण, हनुमान और रावण समेत विभिन्न पात्रों की भूमिका निभा रहे स्थानीय ग्रामीण, राम-जानकी विवाह उत्सव ने मोहा मन
दिनेश गुप्ता
रमना(गढ़वा)। प्रखंड मुख्यालय सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में शारदीय नवरात्र को लेकर भक्तिमय माहौल बना हुआ है. विभिन्न गांवों के पूजा पंडालों में कलश स्थापना कर मां दुर्गा की आराधना की जा रही है. वहीं, पूजा के अवसर पर आयोजित धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं. इसी क्रम में भगोडीह पंचायत अंतर्गत चुंदी गांव स्थित चुंदी देवी धाम के प्रांगण में आयोजित रामलीला का मंचन लोगों के बीच विशेष आकर्षण बना हुआ है. पिछले 21वर्षों से स्थानीय ग्रामीणों द्वारा लगातार रामलीला का मंचन किया जा रहा है. इस वर्ष भी ग्रामीण कलाकार पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ रामायण के विभिन्न प्रसंगों को जीवंत कर रहे हैं.रामलीला में भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण, भरत, हनुमान और रावण समेत अन्य पात्रों की भूमिका स्थानीय ग्रामीण निभा रहे हैं. ग्रामीण कलाकारों द्वारा पारंपरिक वेशभूषा, संवाद और अभिनय के माध्यम से रामायण की कथाओं को मंच पर प्रस्तुत किया जा रहा है. अपने ही गांव के लोगों को रामलीला के विभिन्न पात्रों के रूप में देखने के लिए दर्शकों में खासा उत्साह देखा जा रहा है. मंचन देखने के लिए चुंदी गांव सहित आसपास के क्षेत्रों से प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण पहुंच रहे हैं. शाम होते ही देवी धाम परिसर में दर्शकों की भीड़ जुटने लगती है. रामलीला के दौरान भगवान श्रीराम के जयकारों से पूरा परिसर भक्तिमय हो उठता है.
राम-जानकी विवाह उत्सव का हुआ मंचन
रामलीला के दौरान श्रीराम-जानकी विवाह उत्सव का मंचन विशेष आकर्षण रहा.
रामलीला के दौरान श्रीराम-जानकी विवाह उत्सव का मंचन विशेष आकर्षण रहा. कलाकारों ने विवाह प्रसंग को पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ प्रस्तुत किया. ढोल-बाजे की धुन और उत्सवी माहौल के बीच भगवान श्रीराम और माता सीता के विवाह की रस्में संपन्न करायी गयीं. विवाह प्रसंग देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे. कलाकारों की प्रस्तुति ने दर्शकों को रामायण के प्रसंगों से भावनात्मक रूप से जोड़ दिया. धार्मिक आयोजन के माध्यम से ग्रामीणों को भगवान श्रीराम के आदर्शों, मर्यादा, त्याग और कर्तव्यनिष्ठा का संदेश भी मिल रहा है.
स्थानीय कलाकारों की मेहनत से जीवंत हो रही रामायण
रामलीला की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें अभिनय करने वाले सभी कलाकार स्थानीय ग्रामीण हैं. सीमित संसाधनों के बावजूद कलाकार अपनी मेहनत, लगन और धार्मिक आस्था के बल पर रामायण के प्रसंगों को मंच पर जीवंत कर रहे हैं. पिछले दो दशकों से चली आ रही इस परंपरा ने गांव में धार्मिक और सांस्कृतिक एकता को मजबूत किया है.आयोजन के माध्यम से नयी पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, परंपरा और भगवान श्रीराम के जीवन से परिचित होने का अवसर मिल रहा है. ग्रामीणों का उत्साह और दर्शकों की बढ़ती भीड़ आयोजन की लोकप्रियता को दर्शाती है.
रामलीला में शंभू यादव, चंद्रदेव प्रजापति, विशुनदेव प्रजापति, कृष्णा यादव, गणेश प्रजापति, नागेश्वर सिंह, राकेश विश्वकर्मा, मुकेश विश्वकर्मा, सत्यनारायण साह, नागेंद्र पाल, महेंद्र पाल और रमेश साह समेत अन्य ग्रामीण कलाकार महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. कार्यक्रम को सफल बनाने में कमेटी के अध्यक्ष रमेश साह, गुलाबचंद साह, धनंजय साह,संतोष साह,विनोद प्रजापति, प्रभु भुइयां, लालू राम, आदित्य साह, अवधेश साह, नारायण साह और रामप्यारे साह समेत अन्य ग्रामीण सक्रिय भूमिका निभा रहे है.







