
कई शहरों में भटकी महिला,आखिर मेराल में इलाज के बाद मिली राहत
ज्योति नर्सिंग होम पहुंचकर बयां किया अपना दर्द
आकाश लोहार
गढ़वा
कहते हैं,बीमारी जब इंसान को घेर लेती है,तो उसकी जिंदगी सिर्फ दवाइयों और अस्पतालों के इर्द गिर्द सिमटकर रह जाती है,हर दिन एक नई उम्मीद के साथ शुरू होता है और हर रात इस इंतजार में गुजरती है कि काश,कोई ऐसा इलाज मिल जाए,जिससे इस तकलीफ से छुटकारा मिल सके,मरीज के लिए बीमारी का दर्द जितना बड़ा होता है,उससे कहीं ज्यादा तकलीफ तब होती है,जब वह एक जगह से दूसरी जगह भटकता रहे,लेकिन उसे राहत का रास्ता नजर न आए,कुछ ऐसी ही कहानी झारखंड के गढ़वा जिले से सटे विशुनपुर की एक महिला की है,जो नस से जुड़ी समस्या को लेकर लंबे समय से परेशान थीं,अपनी परेशानी से निजात पाने के लिए उन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ी,कभी रांची,कभी डाल्टनगंज,कभी गढ़वा,तो कभी दूसरे राज्यों तक जाकर इलाज कराया,हर बार मन में यही उम्मीद रहती थी कि शायद इस बार उनकी तकलीफ दूर हो जाएगी,लेकिन महिला के अनुसार,तमाम जगहों पर इलाज कराने के बावजूद उन्हें अपेक्षित राहत नहीं मिल सकी।
जब हर दरवाजे पर दस्तक देने के बाद भी नहीं मिली राहत :- लगातार इलाज,अस्पतालों के चक्कर और उम्मीदों के टूटने के बीच महिला की परेशानी बनी हुई थी,ऐसे में किसी व्यक्ति ने उन्हें सलाह दी कि आप इतनी जगहों पर इलाज करा चुकी हैं,एक बार मेराल प्रखंड के संगबरिया स्थित ज्योति नर्सिंग होम में डॉ. अनिल कुमार साह से भी मिलकर देखिए।
एक सलाह बनी नई उम्मीद का सहारा :- इसके बाद महिला ने एक बार फिर उम्मीद जुटाई और ज्योति नर्सिंग होम,मेराल के संगबरिया पहुंचीं,वहां उन्होंने डॉ. अनिल कुमार साह से मुलाकात कर अपनी समस्या बताई और चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार इलाज कराया।
महिला ने खुद बयां किया अपना अनुभव :- ज्योति नर्सिंग होम में इलाज कराने के बाद महिला ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि वह इससे पहले कई जगहों पर इलाज करा चुकी थीं,रांची,डाल्टनगंज,गढ़वा और दूसरे राज्यों तक गईं,लेकिन उनकी नस से जुड़ी परेशानी में अपेक्षित सुधार नहीं हो रहा था,वहीं,यहां इलाज कराने के बाद उन्हें पहले की तुलना में काफी बेहतर महसूस हो रहा है,महिला ने बताया कि उनकी स्थिति में पहले से काफी सुधार हुआ है।
मरीज के लिए राहत से बढ़कर कुछ नहीं :- दरअसल,किसी भी मरीज के लिए सबसे बड़ी खुशी तब होती है,जब लंबे समय से चली आ रही परेशानी में उसे राहत महसूस होने लगे,बीमारी के दौरान मरीज को सिर्फ दवाइयों की ही नहीं,बल्कि सही चिकित्सकीय परामर्श,देखभाल और भरोसे की भी जरूरत होती है,विशुनपुर की इस महिला का अनुभव भी इसी उम्मीद को बयां करता है,फिलहाल महिला ने ज्योति नर्सिंग होम में कराए गए इलाज के बाद अपनी संतुष्टि जाहिर की है,हालांकि,नस संबंधी बीमारियों में हर मरीज की स्थिति और उपचार का परिणाम अलग अलग हो सकता है,इसलिए योग्य चिकित्सक से जांच और परामर्श के बाद ही इलाज कराना चाहिए।




