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23 अप्रैल को दिखाई देगा ‘पिंक मून’, जानिए क्या है इसका कारण

On: April 18, 2024 2:52 PM
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झारखंड वार्ता न्यूज

Pink Moon, 2024: इस बार चैत्र पूर्णिमा मंगलवार, 23 अप्रैल, 2024 को होगी। लेकिन इस बार की चैत्र पूर्णिमा में शाम का नजारा कुछ अलग ही होने वाला है। इस दिन पूर्णिमा की रात को गुलाबी चांद (पिंक मून) दिखेगा और साथ ही देश भर में हनुमान जयंती भी मनाई जाएगी। गुलाबी चांद (पिंक मून) 23 अप्रैल, मंगलवार को शाम 7:49 पर सबसे ज्यादा चमकीला दिखेगा। इस खास खगोलीय घटना को पिंक मून, स्प्राउटिंग ग्रास मून, एग मून, फिश मून, फसह मून, फेस्टिवल मून और बक पोया के नाम से भी जाना जाता है।

पिंक मून!

पिंक मून की स्थिति तब बनती है जब दो घटनाएं एक साथ हों। चांद धरती के बहुत करीब हो और उसी समय पूर्णिमा हो यानी कि फुल मून हो। ऐसी स्थिति में चांद बड़ा तो दिखता ही है। तब चांद पृथ्वी से 3,63,3000 किलोमीटर दूर होता है। अप्रैल माह में दिखने वाले इस चांद को पिंक मून कहा जाता है जबकि यह गुलाबी नहीं दिखता। इसके एक उत्तरी अमेरिका में पाए जाने वाले गुलाबी फूल के कारण पिंक नाम दिया गया है।

चांद के कई रंग

चांद कई बार लाल रंग का भी दिखाई देता है, इसे की ब्लड  मून भी कहा जाता है। जिस तरह से कई बार सूर्य की रोशनी आकाश में बिखरने के कारण आकाश कई बार लाल या नारंगी रंग का दिखाई देता है, उसी वजह से चांद भी लाल रंग का दिखाई देता है।

कई बार प्रदूषण के कारण चांद का रंग पीला या नारंगी भी नजर आता है। प्रदूषण वाली जगहों पर रोशनी ज्यादा बिखरती है ऐसे में नीले की जगह यह पीला या नारंगी नजर आ जाता है। इस दौरान चांद से आनी वाली सफेद रोशनी में से नीली रोशनी बिखर जाती है और यह पीला या नारंगी दिखता है।

चांद बहुत ही कम बार नीले रंग का भी दिखाई देता है। वायुमंडल में बिखरे कणों के कारण यह नीला सा दिखाई देता है जैसे आमतौर पर स्केटरिंग ऑफ लाइट सिद्धांत के कारण हमें आकाश नीला दिखाई देता है। लेकिन चांद आमतौर पर तीन सालों में एक बार  ऐसा दिखता है।

जब हवा में मौजूद कण चांद का रंग नहीं बदल पाते तो यह भूरे रंग के जैसा दिखता है। इस हाल में चांद के धब्बे भी दिखाई देते हैं। चांद के पृथ्वी के पास होने के कारण सूर्य की रोशनी उस पर कम पहुंचती है जिससे उसकी चमक कम हो जाती है।

चांद सबसे ज्यादा सफेद चमकीला या चांदी के रंग का दिखाई देता है। सूर्य की रोशनी उससे टकराकर धरती पर लौटती है तब रात में वह चांदी के रंग का दिखाई देता है।

उल्का बौछार

हर साल नजर आने वालीं ‘लिरिड उल्का बौछार’ (meteor shower) इस साल 22-23 अप्रैल की रात दिख सकती हैं। इस दौरान आसमान में आग के गोलों के रूप में चमकीली उल्‍काओं को देखा जा सकेगा।

Satyam Jaiswal

सत्यम जायसवाल एक भारतीय पत्रकार हैं, जो झारखंड राज्य के रांची शहर में स्थित "झारखंड वार्ता" नामक मीडिया कंपनी के मालिक हैं। उनके पास प्रबंधन, सार्वजनिक बोलचाल, और कंटेंट क्रिएशन में लगभक एक दशक का अनुभव है। उन्होंने एपीजे इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन से शिक्षा प्राप्त की है और विभिन्न कंपनियों के लिए वीडियो प्रोड्यूसर, एडिटर, और डायरेक्टर के रूप में कार्य किया है। जिसके बाद उन्होंने झारखंड वार्ता की शुरुआत की थी। "झारखंड वार्ता" झारखंड राज्य से संबंधित समाचार और जानकारी प्रदान करती है, जो राज्य के नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण है।

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