मौत को मात देने वाला योद्धा: मेजर मोहित शर्मा की शौर्य और बलिदान की अमर कहानी

On: August 15, 2025 7:23 PM

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Major Mohit Sharma: भारतीय सेना के साहसी और निडर योद्धा मेजर मोहित शर्मा का नाम इतिहास के स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज है। उनकी बहादुरी और दरियादिली की कहानियां सुनकर किसी के भी रोंगटे खड़े हो जाएं। 13 जनवरी 1978 को रोहतक, हरियाणा में जन्मे मेजर मोहित को बचपन से ही देश सेवा का जुनून था। आर्मी पब्लिक स्कूल और नेशनल डिफेंस एकेडमी से शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने भारतीय सेना में कमीशन पाया।
मेजर मोहित 1 पैरा (स्पेशल फोर्स) के अधिकारी थे और अपने साहस के कारण उन्हें “मेजर इयान” के नाम से भी जाना जाता था। 2004 में कश्मीर घाटी में तैनाती के दौरान मेजर मोहित शर्मा ने एक गुप्त ऑपरेशन में ‘इफ्तिखार भट्ट’ नाम से आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन में घुसपैठ की। महीनों तक उन्होंने दुश्मनों का विश्वास जीता और खुफिया जानकारी इकट्ठा कर कई बड़े आतंकी नेटवर्क को ध्वस्त किया। यह साहसिक मिशन उनकी असाधारण बहादुरी का प्रमाण था। इस मिशन में उन्होंने हिजबुल मुजाहिदीन के दो कुख्यात कमांडर्स (अबु तोरारा और अबु सबज़ार) को मार डाला।
सबसे यादगार घटना 21 मार्च 2009 की है, जब जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के हफरूड़ा जंगल में आतंकियों से मुठभेड़ के दौरान मेजर मोहित ने अपने दो साथियों को सुरक्षित निकालने के लिए खुद आगे बढ़कर आतंकियों का ध्यान अपनी ओर खींचा। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने चार आतंकियों को ढेर कर दिया और अपने सैनिकों की जान बचाई। इस वीरता के लिए उन्हें मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च युद्धकालीन सम्मान “अशोक चक्र” से सम्मानित किया गया।
लेकिन मेजर मोहित केवल युद्ध के मैदान में ही नहीं, बल्कि दिल के भी बड़े थे। कश्मीर में तैनाती के दौरान वे स्थानीय बच्चों के लिए स्कूल की किताबें, कपड़े और मिठाइयाँ लेकर जाते थे। गांववालों की समस्याएं सुनते और उनकी मदद करते थे। उनके लिए सेना का मतलब केवल दुश्मन को हराना नहीं, बल्कि लोगों का दिल जीतना भी था।
आज भी मेजर मोहित शर्मा की गाथा भारतीय सेना और देशवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनका जीवन हमें सिखाता है कि सच्चा सैनिक वह है, जो न केवल अपने देश की रक्षा करे, बल्कि मानवता की भी रक्षा करे।