
हजारीबाग। जिले के आंगो थाना से होमगार्ड जवान के साथ कथित मारपीट का मामला सामने आने के बाद पुलिस महकमे में सवाल खड़े हो गए हैं। दारू अंचल में प्रतिनियुक्त होमगार्ड जवान मनोज कुमार सिन्हा ने आंगो थाना प्रभारी जानू कुमार पर गंभीर आरोप लगाते हुए एसडीपीओ को लिखित शिकायत दी है। जवान का आरोप है कि थाना प्रभारी ने उसके हाथ-पैर बांधकर लाठी से उसकी पिटाई की।
मनोज कुमार के मुताबिक, घटना के बाद उन्हें चोटें आईं और उनकी एक उंगली में गंभीर चोट लगने की बात भी सामने आई है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
थाना प्रभारी ने आरोपों को बताया बेबुनियाद
वहीं, आंगो थाना प्रभारी जानू कुमार ने होमगार्ड जवान की ओर से लगाए गए आरोपों को खारिज किया है। रिपोर्ट के अनुसार थाना प्रभारी का कहना है कि जवान नशे की हालत में गाली-गलौज कर रहा था। ऐसे में अब पूरे मामले में दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं।
मामले की सच्चाई जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। बताया गया है कि शिकायत के बाद एसडीपीओ स्तर से मामले की जांच के निर्देश दिए गए हैं।
होमगार्ड संगठन भी मैदान में
इस मामले में यह कहना पूरी तरह सही नहीं होगा कि एसोसिएशन चुप है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक झारखंड होमगार्ड वेलफेयर एसोसिएशन ने घटना पर आपत्ति जताई है और निष्पक्ष जांच के साथ दोषी अधिकारी पर कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
एसोसिएशन के प्रदेश महासचिव राजीव कुमार तिवारी ने कहा कि होमगार्ड जवान कानून-व्यवस्था बनाए रखने में प्रशासन के साथ काम करते हैं। यदि किसी जवान के साथ मारपीट का आरोप सामने आता है तो उसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है। संगठन ने यह भी चेतावनी दी है कि उचित कार्रवाई नहीं होने पर हजारीबाग उपायुक्त कार्यालय के समक्ष धरना-प्रदर्शन किया जा सकता है।
लेकिन जयराम महतो प्रकरण से हो रही तुलना!
इस पूरे घटनाक्रम ने हाल के जयराम महतो और पुलिस एसोसिएशन विवाद की भी याद दिला दी है। जयराम महतो प्रकरण में पुलिस एसोसिएशन ने पुलिसकर्मियों की गरिमा और सम्मान का मुद्दा उठाते हुए खुलकर विरोध दर्ज कराया था। एसोसिएशन की ओर से जयराम महतो से माफी की मांग से लेकर कार्रवाई और आंदोलन तक की चेतावनी सामने आई थी।
यही वजह है कि अब सवाल उठ रहा है कि जब किसी पुलिसकर्मी या अधिकारी के सम्मान का मामला सामने आता है तो संगठन इतनी सक्रियता दिखाता है, तो किसी होमगार्ड जवान द्वारा अपने ही विभाग के अधिकारी पर गंभीर मारपीट का आरोप लगाए जाने पर संगठन की भूमिका कितनी प्रभावी होगी?
हालांकि, उपलब्ध जानकारी के मुताबिक होमगार्ड संगठन इस मामले में पहले ही जांच और कार्रवाई की मांग कर चुका है। इसलिए असली सवाल अब यह है कि क्या जांच निष्पक्ष तरीके से होगी और आरोप सही पाए जाने पर क्या कार्रवाई की जाएगी?
जांच के बाद साफ होगी तस्वीर
फिलहाल इस मामले में सबसे अहम कड़ी जांच रिपोर्ट होगी। एक तरफ होमगार्ड जवान ने हाथ-पैर बांधकर पिटाई किए जाने का गंभीर आरोप लगाया है, जबकि थाना प्रभारी इन आरोपों को बेबुनियाद बता रहे हैं।
ऐसे में पुलिस प्रशासन के सामने चुनौती है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाई जाए। यदि आरोप सही साबित होते हैं तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और यदि आरोप गलत पाए जाते हैं तो इसकी स्थिति भी स्पष्ट होनी चाहिए।
अब नजर जांच की कार्रवाई पर है—क्या होमगार्ड जवान के आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी, और क्या दोष साबित होने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई होगी?






