जनसहभागिता से सरस्वतिया नदी को पुनर्जीवित करने की पहल, डी-सिल्टिंग कार्य में जुटे लोग
झारखंड वार्ता संवाददाता
गढ़वा : जनसहभागिता और प्रशासनिक सहयोग से संचालित “आपन सरस्वतिया” अभियान के तहत बुधवार को गढ़वा शहर में लगातार 11वें दिन तथा मेराल क्षेत्र में लगातार पांचवें दिन भी सरस्वतिया नदी की सफाई एवं डी-सिल्टिंग का कार्य जारी रहा। अभियान के माध्यम से नदी के प्राकृतिक स्वरूप को पुनर्स्थापित करने और उसे स्वच्छ एवं अविरल बनाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
गढ़वा शहर के नवादा क्षेत्र में बुधवार को नदी सफाई अभियान चलाया गया, जहां नदी में जमा गाद, प्लास्टिक एवं अन्य अपशिष्ट पदार्थों को हटाने के लिए मशीनों की सहायता ली गई। अभियान के लिए जेसीबी मशीन की व्यवस्था चैंबर ऑफ कॉमर्स के सदस्य बबलू पटवा एवं पेट्रोल पंप संचालिका अनु दुबे के सहयोग से उपलब्ध कराई गई।

अभियान में स्थानीय नागरिकों ने भी बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाई तथा नदी संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई। प्रशासन की ओर से उनके योगदान की सराहना की गई। नदी के किनारों एवं तल में जमा गाद और कचरे को हटाकर नदी के प्राकृतिक स्वरूप को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया जा रहा है।
वहीं मेराल क्षेत्र में भी लगातार पांचवें दिन सफाई एवं डी-सिल्टिंग कार्य जारी रहा। प्रभारी बीडीओ सह अंचलाधिकारी यशवंत नायक के नेतृत्व में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों, बुद्धिजीवियों और ग्रामीणों के सहयोग से अभियान को गति दी जा रही है। नदी क्षेत्र से गाद एवं अन्य अवरोधों को हटाने का कार्य लगातार जारी है, जिससे नदी के प्राकृतिक प्रवाह को पुनः स्थापित करने में सहायता मिल रही है।
अनुमंडल पदाधिकारी संजय कुमार ने कहा कि “आपन सरस्वतिया” अभियान अब धीरे-धीरे जनआंदोलन का रूप ले चुका है। गढ़वा और मेराल दोनों क्षेत्रों में लोगों का स्वस्फूर्त सहयोग यह दर्शाता है कि समाज अपनी प्राकृतिक धरोहर के संरक्षण के प्रति गंभीर और जागरूक है।
उन्होंने अभियान में सहयोग करने वाले सामाजिक संगठनों, व्यवसायियों, जनप्रतिनिधियों और नागरिकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरस्वतिया नदी की पूर्ण सफाई, डी-सिल्टिंग एवं अतिक्रमण मुक्ति तक यह अभियान लगातार जारी रहेगा।
उन्होंने लोगों से अपील की कि नदी क्षेत्र में कचरा न फेंकें तथा स्वच्छता बनाए रखने में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाएं, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए इस प्राकृतिक धरोहर को सुरक्षित रखा जा सके।














