
आकाश लोहार
गढ़वा
झारखंड की सियासत में इन दिनों खनिज,रोजगार और सरकारी योजनाओं को लेकर आरोप प्रत्यारोप का दौर तेज है,एक तरफ झामुमो MMDR संशोधन कानून को झारखंड के अधिकार और राजस्व से जोड़कर विरोध कर रहा है,तो दूसरी तरफ भाजपा नेताओं की ओर से सरकार पर दूसरे मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने का आरोप लगाया जा रहा है,इसी कड़ी में रिंकू तिवारी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और झामुमो पर तीखा हमला बोला है,झामुमो की ओर से MMDR संशोधन के कारण झारखंड को राजस्व नुकसान की आशंका जताई गई है और पार्टी ने इसके खिलाफ राज्यव्यापी आंदोलन भी किया है।
रिंकू तिवारी ने आरोप लगाया कि झारखंड के बच्चों और गरीब मेधावी विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़े सवालों का जवाब देने के बजाय सरकार MMDR बिल को लेकर राजनीति कर रही है,उन्होंने कहा कि राज्य में प्रतियोगी परीक्षाओं और सरकारी नौकरियों को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं और सरकार को इन सवालों पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए,उन्होंने सीजीएल,JSSC और JPSC जैसी परीक्षाओं का जिक्र करते हुए सरकार से सवाल किया कि इन परीक्षाओं से संबंधित प्रक्रिया में कितनी राशि प्राप्त हुई और उसका पूरा हिसाब किताब क्या है,रिंकू तिवारी ने आरोप लगाया कि गरीब और मेधावी युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर सरकार को पारदर्शिता के साथ जवाब देना चाहिए।
MMDR संशोधन कानून को लेकर रिंकू तिवारी ने दावा किया कि केंद्र सरकार का उद्देश्य खनन क्षेत्र में नियमों में एकरूपता लाना और अवैध खनन तथा कथित कोयला चोरी पर अंकुश लगाना है,वहीं,झामुमो का कहना है कि नए कानून से झारखंड के खनिज और राजस्व संबंधी अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।
रिंकू तिवारी ने कहा कि MMDR के मुद्दे को लेकर जनता के बीच भ्रम फैलाने के बजाय सरकार को कानून के वास्तविक प्रावधानों और उसके प्रभाव पर तथ्य सामने रखने चाहिए,उन्होंने आरोप लगाया कि महिलाओं और आम लोगों की भावनाओं को मुद्दे से जोड़कर राजनीतिक माहौल बनाया जा रहा है,उन्होंने मंईयां सम्मान योजना का भी मुद्दा उठाते हुए आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में महिलाएं अभी भी योजना के लाभ से वंचित हैं,उन्होंने सरकार से सवाल किया कि यदि नए लाभुकों को जोड़ने के लिए पोर्टल बंद है,तो आखिर इसके पीछे वास्तविक कारण क्या है और सरकार इस समस्या का समाधान कब करेगी।
रिंकू तिवारी ने राज्य सरकार से वित्तीय पारदर्शिता को लेकर भी सवाल उठाया,उन्होंने CAG रिपोर्ट का हवाला देते हुए राज्य सरकार पर बड़ी राशि का हिसाब नहीं देने का आरोप लगाया और कहा कि गरीबों के हक और सरकारी धन से जुड़े हर सवाल का जवाब जनता के सामने आना चाहिए,उन्होंने झामुमो नेता मिथिलेश कुमार ठाकुर को भी निशाने पर लेते हुए सवाल किया कि MMDR विरोधी आंदोलन के दौरान उनकी सक्रिय भूमिका कहां दिखाई दे रही है और वे किन मुद्दों को लेकर सक्रिय हैं।
अंत में रिंकू तिवारी ने कहा कि जनता अब सिर्फ राजनीतिक बयान नहीं,बल्कि रोजगार,शिक्षा,योजनाओं और सरकारी धन के इस्तेमाल पर स्पष्ट जवाब चाहती है,उन्होंने कहा कि सरकार को आरोप प्रत्यारोप से आगे बढ़कर जनता के सवालों का जवाब देना चाहिए,वहीं,MMDR संशोधन को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पक्ष इससे अलग है,उन्होंने केंद्र सरकार के संशोधन पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि इससे झारखंड के खनिज राजस्व और राज्यों के संवैधानिक अधिकार प्रभावित हो सकते हैं,राज्य सरकार इस मुद्दे को लेकर कानूनी रास्ता अपनाने की तैयारी भी कर रही है।
अब देखना यह है कि MMDR बिल को लेकर चल रही यह सियासी लड़ाई आने वाले दिनों में किस दिशा में जाती है और रोजगार,खनिज राजस्व तथा सरकारी योजनाओं से जुड़े इन सवालों पर सरकार और विपक्ष की ओर से जनता के सामने क्या तथ्य रखे जाते हैं।






