ढाका: बांग्लादेश में सांप्रदायिक तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। देश के अलग-अलग हिस्सों से हिंदू समुदाय को निशाना बनाए जाने की घटनाएं सामने आ रही हैं। इसी कड़ी में शरीयतपुर जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना ने अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ताजा मामले में दामुड्या थाना क्षेत्र के अंतर्गत केउरभांगा बाजार के पास भीड़ द्वारा किए गए अमानवीय हमले में एक हिंदू व्यवसायी की इलाज के दौरान मौत हो गई। मृतक की पहचान खोकन चंद्र दास के रूप में हुई है, जो इलाके में दवा और मोबाइल बैंकिंग की एक छोटी दुकान चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे।
नए साल की पूर्व संध्या पर हुआ हमला
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, 31 दिसंबर की रात खोकन चंद्र दास अपनी दुकान बंद कर ऑटो-रिक्शा से घर लौट रहे थे। इसी दौरान पहले से घात लगाए बैठे असामाजिक तत्वों की एक भीड़ ने उन्हें रास्ते में रोक लिया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हमलावरों ने धारदार हथियारों से उन पर बेरहमी से हमला किया।
हमले के बाद भी दरिंदों का कहर यहीं नहीं थमा। आरोप है कि हमलावरों ने खोकन चंद्र दास पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी। जान बचाने के प्रयास में वह पास के एक तालाब में कूद पड़े, लेकिन तब तक उनका शरीर बुरी तरह झुलस चुका था।
अस्पताल में कई दिन तक चले इलाज के बाद मौत
घटना के तुरंत बाद स्थानीय लोगों की मदद से गंभीर रूप से घायल खोकन चंद्र दास को अस्पताल में भर्ती कराया गया। वह कई दिनों तक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करते रहे, लेकिन अंततः इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। उनकी मौत की खबर फैलते ही इलाके में तनाव और आक्रोश का माहौल बन गया। दामुड्या थाना पुलिस ने इस मामले में दो स्थानीय युवकों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। खोकन की पत्नी सीमा दास का आरोप है कि उनके पति ने हमलावरों को पहचान लिया था, इसलिए उन्हें जान से मारने की नीयत से जलाया गया।
अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
इस घटना के बाद स्थानीय हिंदू समुदाय में गहरा भय व्याप्त है। लोगों का कहना है कि चुनाव नजदीक आते ही अल्पसंख्यकों को चुन-चुनकर निशाना बनाया जा रहा है। मानवाधिकार संगठनों ने भी इस घटना पर चिंता जताते हुए कहा है कि बांग्लादेश में बढ़ती सांप्रदायिक हिंसा लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए गंभीर खतरा है।













