
रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच कर रही सीआईडी (CID) ने बुधवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी ने यह कार्रवाई सीआईडी थाना कांड संख्या 16/2026 (22 जुलाई 2026) में दर्ज मामले में मिले साक्ष्यों के आधार पर रांची और उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में स्थानीय पुलिस के सहयोग से की।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों में लोहरदगा के उमाकांत उरांव, रांची के रोशन केरकेट्टा, मनोज कुमार और धर्मेंद्र कुमार तथा लखनऊ के रक्षक सिंह शामिल हैं।
सीआईडी की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि उमाकांत उरांव, रोशन केरकेट्टा और मनोज कुमार ने कथित तौर पर 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा में अनुचित साधनों का इस्तेमाल कर सफलता हासिल की थी। जांच एजेंसी का यह भी दावा है कि उमाकांत उरांव अन्य अभ्यर्थियों को परीक्षा नेटवर्क से जोड़ने के लिए एजेंट के रूप में काम करता था।
जांच के दौरान लखनऊ से गिरफ्तार रक्षक सिंह की भूमिका भी अहम बताई जा रही है। वह TDPL कंपनी में अकाउंटेंट है, जिसे जेपीएससी परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी दी गई थी। सीआईडी का आरोप है कि वह परीक्षा में कथित गड़बड़ी की साजिश का हिस्सा था। वहीं, जांच में संदिग्ध भूमिका सामने आने के बाद धर्मेंद्र कुमार को भी गिरफ्तार किया गया।
सीआईडी ने आरोपियों के ठिकानों पर छापेमारी कर कई महत्वपूर्ण डिजिटल उपकरण और दस्तावेजी साक्ष्य जब्त किए हैं। इन सभी सामग्रियों को फॉरेंसिक जांच के लिए सुरक्षित रखा गया है, ताकि परीक्षा में कथित अनियमितताओं के पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके।
जांच एजेंसी का कहना है कि मामला अभी खुला हुआ है और जांच तेजी से आगे बढ़ रही है। परीक्षा संचालन से जुड़े अन्य लोगों और संभावित अभ्यर्थियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
सूत्रों के अनुसार, जब्त डिजिटल साक्ष्यों की जांच और गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के बाद इस मामले में कई और नाम सामने आ सकते हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियों से भी इनकार नहीं किया जा रहा है। सीआईडी ने कहा है कि जांच में सामने आने वाले हर तथ्य के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।




